Thursday , September 2 2021

हिंदी में आसानी से किये जा सकते हैं वैज्ञानिक और तकनीकी कार्य

आईआईटीआर में हिंदी दिवस पर हिंदी सप्ताह का आयोजन

 

लखनऊ. हिंदी के महत्व को वैज्ञानिक भी मानते हैं. उनका मानना है कि वैज्ञानिक और तकनीकी कार्य अगर हिंदी में किये जाएँ तो इसमें कोई दिक्कत नहीं होगी, हिंदी में कार्य करना बहुत आसान है.

 

हिंदी दिवस के अवसर पर आज भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में हिंदी सप्ताह का आयोजन किया गया. इस मौके पर अनेक लोगों ने अपने विचार रखे.

वैज्ञानिक एवं फिल्म कलाकार डॉ॰ अनिल रस्तोगी ने कहा कि हिंदी में सोचें, हिंदी में लिखें और हिंदी में ही बोलें। डॉ॰ रस्तोगी ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी भाषा केवल भारत में ही नहीं अपितु अनेक देशों में बोली जाती है । उन्होंने भारत सरकार की विभिन्न हिंदी प्रोत्साहन योजनाओं तथा हिंदी भाषा में कार्य करने हेतु उपलब्ध डिजिटल टूल्स  पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें अपनी भाषा को बढ़ावा देने के लिए और गंभीर प्रयास करने चाहिए।

 

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी पीयूष वर्मा ने अपने संबोधन में  कहा कि केवल हिंदी दिवस पर ही नहीं बल्कि संपूर्ण वर्ष इसी चेतना एवं संकल्प से  हिंदी में अधिक से अधिक कार्य करना चाहिए। हमें अपनी भाषा पर गर्व करना चाहिए । सरल भाषा का प्रयोग करते हुए  विज्ञान की  छोटी – छोटी पुस्तके हिंदी भाषा में लिखना चाहिए । भाषा को रोज़गार से जोड़ना चाहिए । हम सभी को हिंदी भाषा के विकास के लिए संकल्प लेना चाहिए । उन्होंने संस्थान की राजभाषा पत्रिका एवं संस्थान में हिंदी में किए जा रहे अन्य कार्यों की सराहना भी की।

 

संस्‍थान के निदेशक, प्रोफेसर आलोक धवन ने अपने अध्‍यक्षीय संबोधन में कहा कि विज्ञान को आगे ले जाने हेतु भाषा एक सशक्‍त माध्‍यम है। किसी देश की उन्नति उसकी भाषा और संस्कृति से होती है । हिंदी भाषा बहुत समृद्ध भाषा है, इसका शब्द भंडार बहुत विशाल है, वैज्ञानिक और तकनीकी कार्य इसमें आसानी से किए जा सकते हैं।  हमारा संस्थान इस दिशा में अग्रसर है और अनेक शोध पत्र, वैज्ञानिक लेख हिंदी में लिखे जा रहे हैं । संस्थान में वर्ष 2016 में हिंदी में राष्ट्रीय वैज्ञानिक संगोष्ठी का सफलता पूर्वक आयोजन किया गया था और इस वर्ष 11 – 13 अक्टूबर, 2017 को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संगोष्ठी होने जा रही है ।   हिंदी सप्‍ताह के दौरान हमें विचार करना चाहिए कि कैसे हम अपनी राजभाषा हिंदी को और आगे ले जा सकते हैं और पूरे वर्ष कैसे अधिक से अधिक इसका प्रयोग कर सकते हैं।

 

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