पोनसेटी पद्धति से जन्मजात टेढ़े पंजे को सीधा बनाना संभव

केजीएमयू में क्लब फुट पर सतत चिकित्सा शिक्षा आयोजित

लखनऊ। क्लब फुट यानी जन्मजात पैर के टेढ़े पंजे वाले बच्चों को सामान्य बनाने के लिए आजकल प्रयोग की जा रही तकनीक पोनसेटी पद्धति की जानकारी देने के लिए किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्व विद्यालय केजीएमयू में शनिवार 24 जून को एक सतत चिकित्सा शिक्षा सीएमई का आयोजन किया गया।
केजीएमयू और क्योर इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में कलाम सेंटर में आयोजित पोनसेटी पद्धति से इलाज के तीसरे रिफ्रेशर प्रशिक्षण क्लब फुट प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए क्योर इंडिया के निदेशक डॉ संतोष झा ने बताया कि भारत में यह 68वां ट्रेनिंग प्रोग्राम है, इसकी शुरुआत यहां पहली बार 2009 में हुई थी। उत्तर प्रदेश में यह प्रशिक्षण तीन साल से चल रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में इसे सभी मेडिकल कॉलेजों में चलाया जा रहा है तथा छह मोबाइल सेंटर भी हैं। अब तक 3600 चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि देश भर में 75000 बच्चे पंजीकृत हुए हैं तथा उत्तर प्रदेश में प्रत्येक वर्ष 1000 बच्चों को उपचार के लिए पंजीकृत किया जा रहा है।

जल्दी से जल्दी इलाज कराना होता है अच्छा

कार्यक्रम में चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मदन लाल ब्रह्म भट्ट ने कहा कि क्योर इंडिया ऑर्गेनाइजेशन एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। क्लबफुट की पहचान जितनी जल्दी कर इसका उपचार शुरू किया जाए उतनी जल्दी अच्छी सफलता प्राप्त होती है। इसकी जल्दी पहचान ही इसके इलाज की कुंजी है। इस तरह की बीमारी को पूरी तरह से ठीक करना हमारा प्राकृतिक लक्ष्य है। यह बड़े गर्व की बात है की यह क्लब फुट मैनेजमेण्ट की कार्यशाला चिकित्सा विश्वविद्यालय में आयोजित किया जा रहा है इससे चिकित्सा विश्वविद्यालय के चिकित्सकों सहित प्रदेश के चिकित्सकों को पोनसेटी तकनीक के विषय में जानकारी मिलेगी और इस क्लब फुट बीमारी से पीडि़त बच्चों का इलाज ज्यादा से ज्यादा सम्भव हो सकेगा।
इस मौके पर दिल्ली के सेंटसिफेन अस्पताल के डॉ मैथ्यू वर्गीस ने कहा कि क्लब फुट एक पैदाइशी बीमारी है जो कि जेनेटिक भी हो सकती है। अभी इस बीमारी के कारणों का नहीं पता चल सका है। उन्होंने कहा कि पोनसेटी तकनीक से बच्चों के पैर जल्दी ठीक हो जाते हैं। उन्होंंने कहा कि इस तकनीक को किताबों से पढक़र नहीं सीखा जा सकता है, इसलिए इसका प्रशिक्षण लेना आवश्यक है।

आठ से दस बार प्लास्टर बांधकर सीधा करते हैं टेढ़ा पैर

कार्यक्रम में चिकित्सा विश्वविद्यालय के ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभाग के प्रो. अजय सिंह ने बताया कि क्लब फुट से पीडि़त बच्चे डॉक्टरों के पास काफी लेट आते हैं और तब तक हड्डियां मजबूत हो जाती हैं और फिर सर्जरी के अलावा इसे ठीक नहीं किया जा सकता है। इस विधि से छोटे बच्चों का जल्दी से जल्दी इलाज कराने से सिर्फ प्लास्टर बांधने से ही पैर सीधे हो जाते हैं। कार्यशला में चिकित्सा विश्वविद्यालय के ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभाग के प्रो. स्ंातोष कुमार ने बताया कि इस पद्धति से इलाज कराने में पैर सीधा करके बच्चे को हर सप्ताह प्लास्टर बांधा जाता है, इस तरह से 6 से 8 सप्ताह तक प्लास्टर हर हफ्ते बांधने के बाद आखिर में बच्चे को शू ब्रेस देते हैं इसे बच्चे को पांच साल तक पहनाना जरूरी होता है। इसलिए इस दौरान देखरेख की बहुत आवश्यकता होती है नहीं तो फिर से पैर टेढ़े होने की संभावना बन जाती है। बच्चों को शू ब्रेस और उनकी काउंसलिंग क्योर इंडिया द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध करायी जाती है।
कार्यक्रम में दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय के डॉ. अनिल मेहता ने बताया कि यह बीमारी लडक़े और लड़कियों में 2:1 के अनुपात में पाया जाता है। इससे ज्यादातर दायां पैर प्रभावित होता है। उत्तर प्रदेश में साल में करीब 11000 क्लब फुट के बच्चे पैदा होते हुए पूरे हिन्दुस्तान में लगभग 50,000 के करीब क्लब फुट बच्चे पैदा होता है।
कार्यक्रम में अन्य उपस्थित व्यक्तियों ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभाग के प्रो. आरएन श्रीवास्तव प्रो. एके अग्रवाल, बलरामपुर अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ आरके सक्सेना सहित लखनऊ के अन्य चिकित्सा संस्थानों के चिकित्सक उपस्थित रहे।