पैथोलॉजी के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वार्षिक फीस की ₹700 से ₹5000

पैथोलॉजिस्ट एंड माइक्रोबायोलॉजिस्ट एसोसिएशन ने प्रदूषण बोर्ड से मिलकर रखी अपनी बात, मिला आश्वासन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा मेडिकल जैविक कचरा निस्तारण के लिए निर्धारित की गई दरों में अप्रत्याशित रूप से कई गुना बढ़ोतरी कर दी गई है। पैथोलॉजी से अभी तक साल भर में ली जाने वाली ₹700 की धनराशि को बढ़ाकर अब ₹5000 कर दिया है। इस भारी वृद्धि पर एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट एंड माइक्रोबायोलॉजिस्ट उत्तर प्रदेश ने विरोध जताया है।

 

एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर एच एल शर्मा ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एक पत्र सौंपा है। मेंबर सेक्रेटरी को लिखे पत्र में एसोसिएशन ने कहा है कि पैथोलॉजी तो ओपीडी क्लीनिक की भांति कार्य करती है, इसमें न तो मरीज को भर्ती किया जाता है और न ही बेड होते हैं। ऐसी स्थिति में पैथोलॉजी केंद्र से बहुत कम मात्रा में जैविक कूड़ा निकलता है। उस अनुपात में निर्धारित की गई नई दरें काफी अधिक है।

 

एसोसिएशन ने अपील की है कि इस मुद्दे पर पुनर्विचार करते हुए पूर्व की निर्धारित दर ही लागू करने का आदेश करना उचित होगा।

 

एसोसिएशन की ओर से यह भी कहा गया है कि उक्त निर्धारित रकम एक बार में ही लेने की व्यवस्था लागू हो जबकि वर्तमान में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित एजेंसी को प्रतिमाह के आधार पर भी कूड़ा ले जाने के लिए भुगतान करना पड़ता है।

 

एसोसिएशन की ओर से गये प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि बोर्ड द्वारा हम लोगों की बात सुनी गई तथा इस संबंध में दो-तीन दिन के अंदर कार्यवाही करने का आश्वासन दिया गया है।

 

बताया जाता है कि बोर्ड द्वारा चंद बड़ी कारपोरेट कल्चर वाली पैथोलॉजी को मानक मानकर रेट निर्धारित कर दिया गया है जबकि छोटे स्तर की पैथोलॉजी के कार्य और वहां से निकलने वाले कूड़े की मात्रा में जमीन आसमान का अंतर है फिलहाल एसोसिएशन को बोर्ड से राहत मिलने का इंतजार है। मिलने गये प्रतिनिधि मंडल में डॉ पी के गुप्ता, डॉ अमित रस्तोगी, डॉ दीपक दीक्षित, डॉ आलोक दीक्षित, डॉ मनीषा भार्गव, डॉ अरशद इकराम और डॉ स्मृति शंकर शामिल थीं।