सात लाख लेने के बाद भी मरीज को बंधक बना लिया निजी अस्पताल ने

एक लाख और मांगे थे, नहीं देने पर एफआई हॉस्पिटल ने बना लिया बंधक

लखनऊ। निजी अस्पतालों मे इलाज करवाने वालों का शोषण थम नहीं रहा है। ये वे अस्पताल हैं जहां इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है जब परिजनों के पास रुपये समाप्त हो जाते हैं या फिर स्थिति नाजुक हो जाती है तो सरकारी अस्पतालों में भेजकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। इलाज के खर्च की वसूली करने में इन अस्पतालों का यह हाल है कि जब तक पूरा भुगतान न हो जाये ये मरीज को बंधक बनाने से भी गुरेज नहीं करते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ रविवार 11 जून को यहां के एफआई हॉस्पिटल में भर्ती मरीज के इलाज के लिए सात लाख रुपये भुगतान करने के बाद भी बचे एक लाख के लिए मरीज को बंधक बना लिया। मरीज के परिवारीजनों ने हुसैनगंज थाने में एफआई हास्पिटल दृारा मरीज को बंधक बनाने की तहरीर दी, तहरीर में आरोप है कि सात लाख जमा करने के बाद, मरीज को रेफर करने के लिए एक लाख मांंग रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार सीतापुर के भैसहा निवासी मनोज कुमार (15) बीते मई माह में एक सडक़ दुर्घटना में गम्भीर रूप से घायल हो गया था। जब परिवारीजन इलाज के लिए लहरपुर स्थित क्षेत्रीय अस्पताल पहुंचे तो मरीज की गम्भीर स्थित को देखते हुये ट्रॉमा सेन्टर रेफर कर दिया। परिजनों के अनुसार जब वे लोग मरीज को ट्रॉमा सेन्टर ला रहे थे तभी रास्ते में मरीज की हालत ज्यादा खराब होने पर कुर्सी रोड स्थित सेन्ट मेरी अस्पताल में भर्ती कराया। सेन्ट मेरी अस्पताल मेें मरीज दो दिन भर्ती रहा, उसके बाद वहां पर भी चिकित्सकों ने मरीज को ट्रॉमा रेफर कर दिया। ट्रॉमा सेन्टर से मरीज को बेड न होने का हवाला देकर बलरामपुर अस्पताल रेफर कर दिया गया था।

एफआई अस्पताल ले जाने के लिए ट्रॉमा सेंटर में मिला था दलाल

मरीज के भाई अनूप का कहना है कि ट्रॉमा सेंटर में अफजल नाम का एक आदमी मिला,जिसने अच्छे इलाज की बात कहकर एफआई हास्पिटल पहुंचा दिया। यहां पर चिकित्सकों ने भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया। अनूप के मुताबिक अपने मौसेरे भाई के इलाज में छह बीघा जमीन बेच चुका है। लेकिन अस्पताल वालों की पैसे की भूख नहीं खत्म हुयी।

एफआई हॉस्पिटल के खिलाफ मरीज के तीमारदार ने तहरीर दी है थाने में

रविवार को अस्पताल की तरफ से अनूप को एक लाख का बिल और थमा दिया गया। इस पर अनूप का कहना था कि उसके मरीज को किसी सरकारी अस्पताल में रेफर कर दिया जाये। अनूप ने बताया कि मौजूदा समय में 50 हजार रुपये ही बचे थे। जो उसने अस्पताल में जमा करने की बात कही बाकी पैसा बाद में देने का वादा किया। लेकिन फिर भी अस्पताल के कर्मचारी भडक़ गये और मरीज को बंधक बना लिया। जिसकी शिकायत अनूप ने पुलिस से की है।