एनएचएम के निर्माण कार्यों का जायजा औचक निरीक्षण करके लें : योगी

शास्त्री भवन में आयोजित बैठक  में समीक्षा करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अन्तर्गत किए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित कराने हेतु नियमित रूप से औचक निरीक्षण कराए जाएं। उन्होंने कहा कि सम्बन्धित जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को औचक निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और उसकी प्रगति की विस्तृत आख्या प्रत्येक माह उच्चाधिकारियों को प्रस्तुत करनी अनिवार्य होगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अन्तर्गत गठित राज्य स्तरीय, मण्डलीय एवं जनपदीय तथा ब्लॉक स्तरीय समितियों की बैठकें नियमित रूप से निर्धारित समय में अवश्य आयोजित कराई जाएं। उन्होंने कहा कि जनपद एवं ब्लॉक स्तर पर आयोजित की जाने वाली बैठकें इस प्रकार से आयोजित की जाएं, ताकि गठित समितियों के चिकित्सक सदस्यों की निर्धारित ड्यूटी में कोई व्यवधान न आए और वे मरीजों की देखभाल भी सुनिश्चित कर सकें।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कार्यों की समीक्षा की

मुख्यमंत्री आज यहां शास्त्री भवन में आयोजित बैठक  में  राज्य स्वास्थ्य मिशन के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि राज्य सरकार द्वारा नागरिकों को दी जा रही नि:शुल्क चिकित्सा सेवाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार हो। आम नागरिकों को सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर होर्डिंग लगवाई जाएं, ताकि आम नागरिक योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठा सके। उन्होंने कहा कि शासकीय धन का दुरुपयोग कतई नहीं होने दिया जाएगा। जनता की गाढ़ी कमाई को लूटने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई प्रत्येक दशा में सुनिश्चित होनी चाहिए।

भर्तियों में पूरी पारदर्शिता बरतें

उन्होंने एन0एच0एम0 के अन्तर्गत संविदा के आधार पर की जा रही नियुक्तियों में भ्रष्टाचार की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए कड़े निर्देश दिए कि भर्तियां नियमानुसार पूरी पारदर्शिता के साथ भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था के तहत कराई जाएं। उन्होंने कहा कि जांच करने पर भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर सम्बन्धित अधिकारी की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

भ्रूण लिंग जांच पर प्रभावी अंकुश लगायें

श्री योगी ने प्रदेश में लिंगानुपात के गिरते स्तर पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कड़े निर्देश दिए कि राज्य में अनियमित रूप से की जा रही भ्रूण लिंग जांच पर प्रभावी अंकुश लगाने का अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि जिन जनपदों में विशेष तौर से लिंगानुपात में ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है, उन जनपदों में यह अनुपात बढ़ाने की दिशा में ठोस कार्य योजना बनाकर कार्यवाही की जाए। उन्होंंने कहा कि पी0सी0पी0एन0डी0टी0 एक्ट का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित हो।

जुलाई तक हर जिले में शुरू कर दें डायलिसिस सेवाएं

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम योजना के अन्तर्गत प्रत्येक मण्डल स्तरीय जिला चिकित्सालयों में डायलिसिस इकाइयां तत्काल स्थापित कराकर आगामी माह जुलाई तक डायलिसिस की सेवाएं प्रत्येक दशा में पीडि़त व्यक्ति को उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने प्रदेश के 14 चिकित्सालयों में जुलाई माह से एवं अन्य शेष चिकित्सालयों में सितम्बर, 2017 से सी0टी0 स्कैन कैटेगरी-1 के अन्तर्गत पी0पी0पी0 मॉडल पर सी0टी0 स्कैन सेवाएं उपलब्ध कराने में आम जनता के साथ चीटिंग कतई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पीपीपी मोड पर उपलब्ध कराई जा रही फ्री डायग्नोस्टिक, एम0आर0आई0, सी0टी0 स्कैन सेवाओं की लागत में कमी लाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तकनीकी स्टाफ की उपस्थिति सम्बन्धित चिकित्सालयों में अनिवार्य रूप से कराने के साथ-साथ उन्हें अपने शासकीय दायित्वों का निर्वहन करना होगा। उन्होंने प्रदेश के 52 जनपद स्तरीय चिकित्सालयों में फ्री डायग्नोस्टिक सेवाओं की सुविधा आगामी 30 मई तक सभी स्वास्थ्य इकाइयों में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

मातृ और शिशु मृत्यु दर को घटाने का हर सम्भव प्रयास करें

मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृ और शिशु मृत्यु दर को घटाए जाने के सम्बन्ध में हर सम्भव प्रयास किए जाएं। साथ ही, नवजात शिशु मृत्यु दर और सकल प्रजनन दर के लक्ष्यों को भी प्राप्त करने की दिशा में कार्यवाही की जाए। उन्होंने सिक न्यू बॉर्न केयर इकाई, पोषण पुनर्वास केन्द्र, होम डेज न्यू बॉर्न केयर कार्यक्रम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम की भी समीक्षा करते हुए इन्हें और प्रभावी बनाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के तहत नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के क्षेत्र में प्रतिमाह कैम्पों के आयोजन की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के भी निर्देश दिए।
श्री योगी ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सहयोग से संचालित संचारी व गैर संचारी रोगों के नियंत्रण सम्बन्धित कार्यक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत एक्यूट इंसेफ्लाइटिस से प्रभावित जनपदों में स्थानीय स्तर पर उपचार की सुविधा मुहैया कराने के निर्देश देते हुए कहा कि इस रोग के सम्बन्ध में वैक्सीन के प्रति जागरूकता उत्पन्न किए जाने के कार्यक्रम चलाए जाएं, जिसमें विभिन्न स्वैच्छिक संगठनों और मीडिया की सहभागिता भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि फील्ड स्तर के कर्मियों के प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता है, जिसकी मॉनीटरिंग की जाए।

सभी को मिलें प्रभावी और विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवायें

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के नागरिकों खासतौर से गरीब और कमजोर वर्गों को प्रभावी और विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए कहा कि जो क्षेत्र स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा की दृष्टि से उपेक्षित हैं, वहां पर 100 दिनों की कार्य योजना के तहत स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा सुविधाएं प्राथमिकता के स्तर पर पहुंचाने के कार्य सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने वर्ष 2010-11 से संचालित 133 मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के संचालन में किसी भी प्रकार की कोई विधिक बाधा न होने की जानकारी विभाग को वर्ष 2014 में उपलब्ध होने के बावजूद भी लगभग 03 वर्षों तक विभागीय प्रस्ताव न प्रस्तुत किए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि ऐसी कार्यशैली कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा स्वीकृत 150 अन्य मेडिकल मोबाइल यूनिट्स के संचालन की कार्यवाही शीघ्रता से की जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता के हित में योजनाओं के क्रियान्वयन में समय से आवश्यक कार्यवाहियां सुनिश्चित कराकर सम्बन्धित अधिकारियों को अपनी कार्यशैली में तेजी लानी होगी। उन्होंने कहा कि शासकीय योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना सम्बन्धित अधिकारियों एवं चिकित्सकों का दायित्व है, जिसमें लापरवाही क्षम्य नहीं होगी।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर टीकाकरण सत्र आयोजित करें

श्री योगी ने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्रों पर टीकाकरण सत्र आयोजित कर टीकाकरण सेवाओं को उपलब्ध कराया जाए। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अन्तर्गत सभी बच्चों एवं किशोरों को स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। जननी सुरक्षा योजना एवं जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत दी जाने वाली सुविधाओं में पूरी पारदर्शिता बरतते हुए लाभार्थियों को सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत स्वयंसेवी संस्थाओं और निजी चिकित्सकों द्वारा भी स्वैच्छिक योगदान को बढ़ावा दिए जाने की दिशा में कार्य किए जाएं।