राज्‍यभर के स्‍कूलों की कक्षाओं में बनाये जायेंगे ‘मन दूत’ और ‘मन परी’

-बच्‍चों की परेशानियों को समझने और उसके हल के लिए है यह कार्यक्रम
-विद्यालयों में मेंटल नोडल शिक्षकों के लिए आयोजित की गयी कार्यशाला
-मनाया जा रहा विश्व मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। बच्‍चों के मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए शुरू किया गया मन दूत और मन परी कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए अब इसे पूरे राज्‍य में लागू किया जायेगा। इस कार्यक्रम के तहत प्राइमरी स्‍कूलों में हर कक्षा में दो मॉनीटर, एक लड़का मन दूत के रूप में तथा एक लड़की मन परी के रूप में चुने जाते हैं।

यह जानकारी राज्य स्तरीय मानसिक स्वास्थ्य अधिकारी डा. सुनील पाण्‍डेय ने दी। डॉ सुनील पाण्‍डेय विश्व मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह के तीसरे दिन आज मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के सभागार में जिले के सरकारी व प्राइवेट स्कूलों के नोडल शिक्षकों के लिये एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला को सम्‍बोधित कर रहे थे। डॉ पाण्‍डेय ने बताया कि खास बात यह है कि इन मॉनीटरों का चुनाव बच्‍चों द्वारा ही किया जाता है यानी सारे बच्‍चे जिसे पसंद करते हों, उसे ही चुना जाता है। इसके बाद हर कक्षा के इन मॉनीटरों का एक स्‍वास्‍थ्‍य दस्‍ता तैयार कर लिया जाता है, जो कि आपस में सहयोग करता है, यह दस्‍ता जो बच्‍चे पढ़ाई के कारण, घर के किसी टेंशन के कारण परेशान हों उन बच्‍चों की भी हेल्‍प करता है, बच्‍चे की परेशानी के बारे में क्‍लास टीचर और विद्यालय में बनाये गये मेंटल नोडल टीचर को बताता है। इन्‍हीं नोडल टीचर के लिए एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में शिक्षकों को इस बात का प्रशिक्षण दिया गया कि वे अपने-अपने स्कूलों में मानसिक विकारों से ग्रसित बच्चों की पहचान कर सकें।

इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. नरेंद्र अग्रवाल ने कहा- बहुत से लोगों को पता ही नहीं होता है कि वह मानसिक विकार से ग्रसित हैं। आज यह रोग बहुत तेजी से अपने पैर पसार रहा है । इसका मुख्य कारण आज की वर्तमान जीवन शैली व वर्तमान समाज है । वयस्कों के साथ-साथ बच्चे भी इससे ग्रसित हो रहे हैं। बच्चे अपना ज्यादा से ज्यादा समय टीवी, मोबाइल व लैपटॉप पर व्यतीत करते हैं जिसका परिणाम होता है कि बच्चे व माता-पिता के बीच दूरी बन जाती है और ऐसी स्थिति बन जाती है कि बच्चा आत्महत्या कर लेता है।

राज्य स्तरीय मानसिक स्वास्थ्य अधिकारी डा. सुनील पांडे ने बताया कि यह कार्यक्रम प्रदेश के सभी जिलों में चल रहा है। 43 जनपदों में इससे सम्बधित नियुक्तियां हो चुकी हैं और 32 जनपदों में होना बाकी हैं । नोडल शिक्षकों की यह कार्यशाला सभी जनपदों में आयोजित की जायेगी। विभाग द्वारा इस सम्बन्ध में आदेश पारित किया जा चुका है।

लखनऊ जिले में लगभग 1600 सरकारी व 1000 प्राइवेट स्कूल हैं। आज यह पहला चरण है। अब यह कार्यशाला बराबर चलती रहेगी। डा. पांडे ने बताया कि पिछले वर्ष कुछ जनपदों में कक्षा के मॉनिटर के समान कक्षा में विद्यार्थियों के मध्य मन दूत व मन परी को बनाया गया था जो कि बच्चों के मानसिक व्यवहार पर उनसे बात करते थे। यह कार्यक्रम सफल हुआ है अब इसे पूरे राज्य में लागू करने की बात चल रही है।

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के निदेशक डा. आलोक कुमार ने कहा कि भौतिक सुखों से हम स्वस्थ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्राप्त कर सकते हैं । यह ही तनाव का एक प्रमुख कारण है जिससे बच्चे भी प्रभावित होते हैं । बच्चे अपना  7-8  घण्टे स्कूल में बिताते हैं। अत: शिक्षकों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ उनके सम्पूर्ण व्यक्तित्व को निखारें।

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के मानसिक रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डा. पी.के. दलाल ने बताया कि आज बहुत से बच्चों में हमें तनाव की समस्या देखने को मिलती है | इसका कारण कहीं और नहीं हमारे ही आस-पास है और इसका निराकरण भी हमारे ही पास है | अनियमित एवं बदलती जीवन शैली, जंक फूड का सेवन, व्यायाम की कमी, टी.वी. के सामने देर तक बैठना, मोबाइल देखना, आउटडोर एक्टिविटी का अभाव यह ऐसे कारण हैं जो कि तनाव या स्ट्रैस को जन्म देते हैं।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के मानसिक रोग विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डा.एस.सी.तिवारी ने बताया मानसिक विकारों को लेकर हमारे समाज में भ्रांतियां फैली हैं। इन्हें दूर करने के उद्देश्य से ही यह मानसिक स्वास्थ्य जागरुकता सप्ताह मनाया जाता है ।

इस अवसर पर राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल व अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा.आर.के.चौधरी, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा.जी.के.बाजपेयी, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अजय राजा, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एके दीक्षित व जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी योगेश रघुवंशी उपस्थित थे ।

कार्यशाला में डा. आशुतोष श्रीवास्तव द्वारा मेन्टल हेल्थ फ़र्स्ट एड, डा.डेविस इब्राहम द्वारा लाइफ स्किल्स फ़ॉर टींस तथा डा.सुनील पांडे द्वारा स्ट्रेस मैनेजमेंट पर शिक्षकों को जानकारी दी गयी।