सीखना छोडऩा मतलब अपने विकास को अवरुद्ध करना : प्रो.एमएलबी भट्ट

केजीएमयू पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट के प्रथम बैच की विदाई पार्टी में कुलपति ने दिया गुरुमंत्र

लखनऊ। जीवन में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं करनी चाहिये, जिसने सोचा कि वह अब सब कुछ सीख गया तो समझ लीजिये उसका विकास रुक गया, आपके सीखने का एक पड़ाव आज खत्म हुआ लेकिन दूसरा महत्वपूर्ण पड़ाव अब शुरू होगा जब आप अपने कार्य को अंजाम देंगे।
यह गुरुमंत्र गुरुवार 27 जुलाई को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय केजीएमयू के कुलपति प्रो.एमएलबी भट्ट ने केजीएमयू इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस के प्रथम बैच 2015-17 के विद्यार्थियों को उनके लिए आयोजित फेयरवेल पार्टी में दिया। इसका आयोजन संस्थान के साइंटिफिक कन्वेंशन सेण्टर में किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रो. भट्ट ने अपने सम्बोधन में पासआउट छात्रों से कहा आप ने जो इस संस्थान में पढ़ा और जब आप किसी संस्था में अपना सेवा प्रदान करेंगे तो इसमे दो कम्पार्टमेण्ट मत समझियेगा। फर्क इतना है कि केजीएमयू आईपीएमएस की प्रयोगशालाओं में यहां इसके प्रागंण मे आप लोग यहां टीचर्स की गाइडेंस में सीख रहे थे अब चूंकि आप इतने सक्षम हो गये कि आपने जो भी सीखा है उससे अपने आप भी ज्ञान अर्जित कर सकते हैं। आपकी असली परीक्षा की घड़ी की शुरुआत अब होगी।

अच्छे प्रदर्शन के लिए पूर्ण भाव से कार्य करना जरूरी : कुलपति

उन्होंने कहा कि कोई भी कार्य दो तरह से किया जाता है पूर्ण कौशल से या इत्तिफाक से किन्तु जीवन में लगातार आपका प्रदर्शन अच्छा रहे इसके लिए पूर्ण भाव से कार्य करना होगा। मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है सुख, समृद्धि और शांति। आप को पूरी दक्षता और क्षमता के साथ दिये गये कार्य को करना है। जीवन एक उत्तरोत्तर विकास की यात्रा है आप को काम के साथ विश्राम और मनोरंजन भी करना है। जिस प्रकार रुके हुये जल में सडऩ पैदा हो जाती है उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में भी जो सीखना छोड़ देता है उसके विकास की गति रुक जाती है। आपके कंधों पर विश्वविद्यालय के ब्राण्ड के रूप में एक बड़ी जिम्मेदारी है और मै आश्वस्त हूॅ कि आप सब इस दिशा में अग्रसर रहेंगे।

सर्वधर्म समभाव : हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई

कुलपति ने कहा कि मुझे खुशी है कि केजीएमयूआईपीएमएस के प्रथम बैच के फेयरवेल समारोह मे हमे आने का मौका मिला। ये विश्वविद्यालय के लिए आनंद और गौरव का विषय है। इसके लिए आईपीएमएस और इसके अधिष्ठाता एवं इसके संकाय सदस्य बधाई के पात्र हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि आपका परफॉर्मेंस क्राउन परफॉर्मेंस है। फेयरवेल समारोह और पासिंग आउट समारोह मे एक मिश्रित भाव उत्पन्न होता है। प्रशिक्षण पूरा होने की खुशी के साथ संस्थान के गौरवशाली इतिहास और अपने प्रशिक्षकों और सहपाठियों से बिछडऩे का गम भी होता है।

ये एक नयी यात्रा का आरम्भ : प्रो विनोद जैन

इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारम्भ में केजीएमयू आईपीएमएस के अधिष्ठाता प्रो. विनोद जैन ने कहा कि ये एक नई यात्रा का शुभारम्भ है। उन्होंने कहा कि आईपीएमएस का संचालन के शुभारम्भ करते हुये हम सब बहुत ही डरे हुये थे किन्तु हमे पूरी खुशी है की आप लोग ने अपने दो वर्ष के प्रशिक्षण में अनुशासन बनाये रखा और केजीएमयू के गौरवशाली इतिहास के सम्मान में दाग नहीं लगने दिया। इंस्टीट्यूट अगला बैच लेने के लिए पूरी तरह से तैयार है। आप लोगों ने अभी एक पड़ाव पार किया है। आप लोग जब अपने व्यवसाय में आयेंगे तो और भी बहुत सारी चुनौतिया आयेंगी, किन्तु आप लोग विश्वास, साहस, धैर्य और कठिन परिश्रम से जीवन में उत्तरोतर विकास और सफलता को प्राप्त करते रहेंगे। केजीएमयू एक ब्राण्ड नेम है। आप की आगे पहचान इसी नाम के साथ होगी। प्रो जैन ने यह भी घोषणा की जो विद्यार्थी चाहें तो वे यहां इंटर्नशिप का फॉर्म भर सकते हैं।

सेवा प्रदाता खुद मांगे यह बड़ी बात : डॉ परिहार

कार्यक्रम में डॉ. अनिल परिहार सहायक अधिष्ठाता पैरामेडिकल साइंस ने कहा कि हमें आपको जितना यहां सिखाना था उतना सिखा दिया किन्तु आगे भी आपको सीखने का मौका मिलता रहेगा। परीक्षा में पास होना बड़ी बात नहीं है किन्तु जब आप लोग यहां से जब अपना प्रशिक्षण पूरा कर लें तो सेवा प्रदाता आप को हमारे पास मांगने आये यह ज्यादा महत्वपूर्ण है।

लीडर का निर्माण करता है केजीएमयू : डॉ अनुराधा निश्चल

कुलानुशासकआईपीएमएस प्रो अनुराधा निश्चल ने कहा कि केजीएमयू एक ब्राण्ड नेम है और केजीएमयू अपने यहां लीडर का निर्माण करता है। मेरी शुभकामनायें आप लोगों के साथ है। डॉ0 शीतल वर्मा ने कहा आप लोग जहां भी जाओ और मेहनत करो हमारी शुभकामनायें आप के साथ हैं।

    मैरिश अशरफ और राघवेन्द्र

चुने गये मिस और मिस्टर केजीएमयू आईपीएमएस

कार्यक्रम में मिस केजीएमयू आईपीएमएस मैरिश अशरफ-डिप्लोमा इन कार्डियालॉजी और मिस्टर केजीएमयू आईपीएमएस राघवेन्द्र डिप्लोमा इन ओटी-टेक्निशियन बने तथा मंजरी शुक्ला द्वारा सरस्वती वंदना पर नृत्य, नवनीत द्विवेदी द्वारा गणेष वंदना और प्रगति मिश्रा द्वारा गायन प्रस्तुत किया गया। इसके अतिरिक्त हिन्दू-मुस्लिम -सिख-ईसाई की एकता के साथ सर्वधर्म प्रार्थना भी प्रस्तुत की गयीं तथा शालिनी गुप्ता के निर्देशन में भारत के राज्यों की संस्कृति की झलक दिखाने के लिए जम्मू-कश्मीर, पंजाब, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, केरल के नृत्यों के साथ ही अंत में वंदे मातरम गीत पर ग्रुप परफॉर्मेंस की धमाकेदार प्रस्तुति की गयी। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉक्टर अंकिता ने किया।