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जानिये जन्‍म और मृत्‍यु का पंजीकरण क्‍यों महत्‍वपूर्ण है हमारे लिए

-संजय गांधी पीजीआई में राज्‍य स्‍तरीय संगोष्‍ठी का आयोजन

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। जीवन और मृत्यु का पंजीकरण सिर्फ एक आंकड़ा ही नहीं बल्कि यह व्यक्ति की बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सरकार द्वारा बनाई जाने वाली योजनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला दस्‍तावेज है, जिस देश की जितनी आबादी होती है उस आबादी की पूर्ति के लिए पर्याप्त संसाधनों की व्यवस्था सरकार करती हैं, व्यवस्था कितने लोगों के लिए की जानी है, इसका आकलन जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से ही किया जाता है ऐसी स्थिति में प्रत्‍येक नागरिक के लिए आवश्यक है कि वह जन्म और मृत्यु के पंजीकरण कार्य को शत प्रतिशत पूर्ण कराने में अपना सहयोग प्रदान करें।

इसी महत्वपूर्ण विषय पर आज शनिवार 26 मार्च को संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान एसजीपीजीआई के अस्पताल प्रशासन विभाग, रजिस्ट्रार जन्म और मृत्यु विभाग के प्रमुख डॉ आर हर्षवर्धन द्वारा एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस राज्य स्तरीय संगोष्ठी में कानूनी क्षेत्र के विशेषज्ञों ने अनेक जानकारियां दीं। निदेशक और संयुक्त रजिस्ट्रार जनरल सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम आईएएस शीतल वर्मा ने सरकारी प्रक्रिया में तेजी लाने में नवीनतम तकनीक के उपयोग के बारे में संगोष्ठी में उपस्थित लोगों को अवगत कराया। उन्होंने जन्म और मृत्यु का पंजीकरण अधिनियम 1969 और उत्तर प्रदेश जन्‍म-मृत्‍यु  पंजीकरण नियम 2002 तथा नागरिक पंजीकरण कार्यकर्ताओं की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी दी।

इस मौके पर सहायक निदेशक सी आर एस, डी सी ओ यूपी गौरव पांडे ने विभिन्न प्रकार के सी ए आर एस फॉर्म भरने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उपनिदेशक आईटीडीसीओ यू पी अनुपम सिंह सोमवंशी ने सीआरएस पोर्टल के बारे में जानकारी दी।

संस्थान के निदेशक डॉ आर के धीमन ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मेडिकल रिकॉर्ड्स क्लीनीशियंस पर्सपेक्टिव के बारे में जानकारी दी और मेडिकल रिकॉर्ड की आवश्यकता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

यूनिसेफ कि राज्य सलाहकार डॉ आकांक्षा पटेल ने मृत्यु के कारणों के चिकित्सा प्रमाणन एमसीसीडी के बारे में जानकारी दी और प्रमाणीकरण की आवश्यकता पर अपनी सलाह दी। इसी प्रकार टाटा मेमोरियल सेंटर की डॉ शारवरी महापंकर ने एन सी सी डी में त्रुटि होने पर केस स्टडीज दिखाकर उसके बारे में जानकारी दी।

एसजीपीजीआई के सीएमएस डॉ गौरव अग्रवाल ने मृत्यु प्रमाण करण और महत्वपूर्ण घटनाओं के रिकॉर्ड के महत्व के बारे में बताया साथ ही उन्होंने सभी जीवन की घटनाओं के रिकॉर्ड बनाए रखने के बारे में भी जानकारी दी।

आयोजक डॉ हर्षवर्धन ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण आर बी डी अधिनियम 1969 के कानूनी आयामों पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने बताया कि 1969 में बने इस अधिनियम ने पूरे देश में पंजीकरण की प्रणाली को एकीकृत किया और जन्म और मृत्यु के पंजीकरण को अनिवार्य बना दिया गया इसने अधिनियम के प्रवर्तन से जुड़ी प्रक्रियाओं मशीनरी सिद्धांतों कर्मियों और दंड को भी परिभाषित किया उन्होंने बताया कि अस्पताल नर्सिंग होम स्वास्थ्य केंद्रों आदि में होने वाले जन्म और मृत्यु की रिपोर्ट संबंधित क्षेत्र के जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रार को देना प्रभारी अधिकारी या उसके द्वारा अधिकृत किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी है उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ता जो जन्म या मृत्यु के समय उपस्थित रहते हैं वह घटना के बारे में संबंधित रजिस्ट्रार को सूचना देने के लिए बाध्य हैं।     

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