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जिलानी ने कहा, दबाने से दबने वाला नहीं है सीएए-एनआरसी के खिलाफ आंदोलन, हिंसा न करने की अपील

– नागरिक संशोधन अधिनियम संशय और समाधान विषय पर सेमिनार का आयोजन
जफरयाब जिलानी

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश के पूर्व महाधिवक्‍ता जफरयाब जिलानी ने कहा है कि सरकार को अगर लगता है कि नागरिक संशोधन कानून को लेकर चल रहा विरोध महीने-दो महीने में खत्‍म हो जायेगा तो गलत सोच रही है। पूरे मुल्‍क में इसका विरोध कर रहे लोगों को नुकसान होने का पूरा अंदेशा भी है, ऐसा नहीं है कि ये किसी के बहकावे में आकर धरने पर बैठे हैं। लखनऊ में भी यही हाल है जो औरतें बैठी हैं उन्‍हें किसी ने नहीं बहकाया है, उनके मन में कुछ न कुछ जरूर चल रहा होगा, तभी बैठी हैं, ऐसे ही कोई नहीं बैठ जाता है। इस पर चल रहा विरोध दबाने से दबने वाला नहीं है।

जिलानी रविवार को बीरबल साहनी इंस्‍टीट्यूट के सभागार में संवैधानिक अधिकारों को समर्पित चेरीटेबुल ट्रस्‍ट पीपुल्‍स फोरम फॉर जस्टिस द्वारा आयोजित नागरिक संशोधन अधिनियम संशय और समाधान विषय पर आयोजित विमर्श में बोल रहे थे। इस सेमिनार में उनके साथ मंच पर बंगलुरू से आये वहां के विश्‍वविद्यालय के प्रोफेसर उमा महेश, सुप्रीम कोर्ट की वकील सुबुही खान, पीपुल्‍स फोरम फॉर जस्टिस के ट्रस्‍टी डॉ गिरीश गुप्‍ता, सेमिनार के आयोजक हाईकोर्ट के वकील गिरीश सिन्‍हा तथा एडवोकेट रवि सिंह भी उपस्थित थे।

जिलानी ने कहा कि इस मसले पर विरोध 1965 से होता चला आ रहा है। इंदिरा गांधी ने भी इसे लागू करने की कोशिश की थी। इंदिरा गांधी जैसी ताकतवर प्रधानमंत्री जिन्‍होंने पाकिस्‍तान के दो टुकड़े करवा दिये जब वे इसका विरोध करने वालों को नहीं दबा सकीं तो अब सरकार क्‍या दबा पायेगी। इसलिए यह सोचना कि विरोध करने वाले दबाने से दब जायेंगे, गलत है।

उन्‍होंने कहा कि 19 दिसम्‍बर को लखनऊ में लोग अचानक निकल कर आये थे तो उन्‍हें किसी ने बहकाया थोड़े ही था। इस कानून के दोनों पहलुओं पर गौर करना चाहिये। उन्‍होंने कहा कि सरकार के पास अगर इसके समर्थन में तर्क हैं तो विरोध करने वालों के पास भी विरोध करने के तर्क हैं। सरकार को कम से कम यह तो अहसास करना चाहिये कि आखिर दूसरा जो विरोध कर रहा है उसके अपने क्‍या तर्क है, कानून बदलना और न बदलना तो अलग बात है। कम से कम सरकार अहसास तो करे, और अंतिम फैसला तो जनता करती है। जनता के पास विरोध करने वाले भी जा रहे हैं, सरकार भी जा रही है। अंतत: जनता क्‍या फैसला करेगी यह 2024 में तय होगा, यूपी में 2022 में तय होगा। जनता को फैसला करने के लिए माहौल अच्‍छा रहना चाहिये न पुलिस की तरफ से और न ही विरोध करने वालों की तरफ से हिंसा नहीं होनी चाहिये।

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जिलानी ने कहा कि सरकार के पास और भी विकल्‍प मौजूद हैं जिससे वे घुसपैठियों की पहचान कर सकती है। उदाहरण के लिए बाहर के लोगों की तलाश के लिए अलग से फोर्स गठित कर सकती है जो हर शहर में जाकर देखे कि कौन बाहर के लोग आ गये हैं, उनके खिलाफ कानून के अनुसार मुकदमा चलाइये। लेकिन इसके लिए मुल्‍क के पूरे 130 करोड़ लोगों को इस इम्‍तहान में न डालिये। उन्‍होंने कहा कि इस कवायद में देश का करोड़ों रुपया खर्च हो जायेगा, ऐसे कामों पर खर्च करने की जरूरत नहीं है।