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डिग्री आधारित शिक्षा से हटाकर अनुभव और अनुभूति के अर्जन पर केंद्रित करना होगा ध्‍यान

केजीएमयू के दीक्षांत समारोह में पद्म भूषण प्रो बीएम हेगड़े ने व्‍यक्‍त किये विचार

 

लखनऊ। चिकित्‍सा ऐसा व्यवसाय है जिसमें जीवन भर अध्ययन की आवश्यकता रहती है। उन्होंने कहा कि रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए हमें स्‍कूली सिस्‍टम को बदलते हुए डिग्री आधारित शिक्षा से ध्‍यान हटाकर अनुभव और अनुभूति के अर्जन पर केंद्रित करना होगा। हमें अपनी प्राइमरी शिक्षा को मजबूत बनाना होगा। भारत की प्राचीन आयुर्वेद और चिकित्सा पद्धति में भी बहुत कुछ सीखने लायक है। रिसर्च को जनोपयोगी बनाना होगा। डिग्री लेने के बाद अपने क्षेत्र में अभिनव प्रयोग करने होंगे।

ये विचार किंग जार्ज चिकित्सा विष्वविद्यालय के 13 वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि वर्ल्‍ड एकेडमी ऑफ ऑथेंटिक हीलिंग साइंसेज, मैंगलुरू के चेयरमैन पद्म भूषण प्रो बीएम हेगड़े ने व्‍यक्‍त किये। प्रो बीएम हेगड़े द्वारा एमबीबीएस की डिग्री स्टेनली मेडिकल कॉलेज मद्रास एवं एमडी की डिग्री किंग जार्ज चिकित्सा विश्‍वविद्यालय से प्राप्त की गयी है तदोपरान्त प्रो0 हेगड़े द्वारा रॉयल कॉलेज ऑफ फि‍जीशियन लंदन ग्‍लास्‍गो ऐडिनबर्ग से एफआरसीपी की डिग्री प्राप्त की गई है। दीक्षांत समारोह का आयोजन साइंटिफि‍क कन्‍वेन्‍शन सेण्टर में हुआ।  प्रो हेगड़े ने कहा कि चिकित्सा विवि के होनहार विद्यार्थियों द्वारा इस संस्थान का नाम विदेशों में भी रोशन किया गया है। यह सफलता आप लोगों के अथक परीश्रम का ही फल है। आप जीवन में और तरक्की पाएं यह हमारी शुभ कामना है। आप लोगो की इस उपलब्धि में आपके शिक्षको एवं अभिभावकों का भी अहम योग दान है। आज आप को लाइसेंस मिल गया कि आप लोग जीवन में और ज्यादा सीखें, ज्यादा शोध करें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलाधिपति राज्‍यपाल राम नाईक द्वारा मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की प्रशंसा की गई और उनके उज्‍ज्‍वल भविष्य की कामना की गई। उन्‍होंने कहा कि चिकित्सा का व्यवसाय एक महान व्यवसाय है। इस व्यवसाय के माध्यम से आप लोग गरीब मरीजों एवं समाज की सेवा कर सकते है। जीवन सफलता कठिन एवं सतत प्रयत्न से प्राप्त की जा सकती है। किंग जार्ज चिकित्सा विष्वविद्यालय का देश के साथ विदेशोंे में भी काफी नाम है। 1912 से जिस प्रकार यह संस्थान विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं मरीजो को आकर्षित कर रहा वह काबिले तारीफ है। आज का दिन आप सबके लिए काफी महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में डॉ सुधीर गुप्ता, प्रो0 जीके रथ ने मानद उपाधि को ग्रहण कर हमारे मान को बढ़ाया है। आज जब हम महिला सशक्तीकरण की बात करते है तो आज का यहा का दृश्‍य देख कर हमे पूर्णतः यकीन हो गया है कि भारत की महिलाएं अब शसक्त हो गई हैं। आज हर क्षेत्र में महिलाओं का योगदान है।

 

13 वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर प्रो0 सुधीर गुप्ता, प्रोफेसर मेडिसिन, पैथोलॉजी एण्ड लैबोरेटरी मेडिसिन, माइक्रोबायोलॉजी एण्ड मालेक्यूलर जेनेटिक्स, प्रमुख बेसिक एण्ड क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी तथा प्रो0 जी0के0 रथ, प्रमुख, नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट, द्वितीय कैम्पस एम्स, झज्जर, हरियाणा को डीएससी की  मानद उपाधि प्रदान की गई। इस अवसर पर एमबीबीएस के कुल 31 एवं बीडीएस के 3 मेधावी विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल से नवाजा गया जिसमें अपराजिता चतुर्वेदी को ‘‘हीवेट’’ गोल्ड मेडल, चांसलर मेडल एवं यूनिवर्सिटी ऑनर्स मेडल से नवाजा गया। उपरोक्त कार्यक्रम में प्रो0 एम0के0 मित्रा, सेवा निवृत्त प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग को ‘डॉ केबी भाटिया मेमोरियल’’ गोल्ड मेडल द्वारा लाइफ टाइम अचिवमेण्ट सम्मान दिया गया।

 

कार्यक्रम के शुभारम्भ में कुलपति प्रो एमएलबी भट्ट द्वारा स्वागत सम्बोधन प्रस्तुत किया गया। उन्‍होंने कहा कि  चिकित्सा विश्‍वविद्यालय द्वारा उत्तर प्रदेश के सारे राजकीय मेडिकल कॉलेजों को संबद्ध किया जा रहा है तथा पहले से ही डॉ राम मनोहर लोहिया इस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, विवेकानंद एवं कमाण्ड अस्पताल आदि को संबद्धता दी जा चुकी है। इसके अलावा 10 नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कालेजो को सम्बद्धता प्रदान की चुकी है। इस तरह से कार्य बहुत ज्यादा बढ़ गया है इसलिए विष्वविद्यालय में एक बड़े स्तर पर संबद्धता इकाई की जरूरत है। इन सारे मेडिकल, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेजों की परीक्षाएं सम्पन्न कराने के लिए परीक्षा इकाई को और सुदृढ़ करने की आवश्‍यकता है। इसके लिए धन और श्रम शक्ति की आव़श्‍यकता पड़ेगी।

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