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संक्रामक रोग बढ़ रहे, रोकने में कारगर भूमिका निभाने वालों पर अधिकारियों का ध्‍यान नहीं

संविदा एमपीडब्‍ल्‍यू एसोसिएशन के संरक्षक ने अधिकारियों के रवैये पर उठाये सवाल

-परिवार कल्‍याण निदेशालय में संविदा एमपीडब्‍ल्‍यू का बेमियादी सत्‍याग्रह आंदोलन जारी  

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। परिवार कल्‍याण महानिदेशालय परिसर में बीती 27 जुलाई से बेमियादी सत्‍याग्रह आंदोलन कर रहे पुरुष संविदा एमपीडब्‍ल्‍यू प्रशिक्षण की मांग को लेकर डटे हुए हैं। संविदा एमपीडब्‍ल्‍यू एसोसिएशन के संरक्षक विनीत मिश्रा ने प्रशिक्षण की मांग को एमपीडब्‍ल्‍यू तथा प्रदेश की जनता के हितों से जोड़ते हुए कहा कि प्रशिक्षण न कराकर विभाग जहां अपनी घोषणा का उल्‍लंघन कर रहा है वहीं प्रतिवर्ष संक्रमण की चपेट में आने वाली प्रदेश की जनता के साथ भी अन्‍याय कर रहा है।

विनीत मिश्रा ने कहा कि एमपीडब्‍ल्‍यू की भूमिका संक्रामक रोगों की रोकथाम में अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है, उन्‍होंने कहा कि एमपीडब्‍ल्‍यू (मल्‍टी परपज वर्कर्स) को तैयार करने का उद्देश्‍य ही यही था कि संक्रामक रोगों जैसी बीमारियों की रोकथाम में इन स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ताओं को लगाया जाये।  

उन्‍होंने कहा कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ के तमाम क्षेत्रों में डेंगू तेजी से फैल रहा है। इसी प्रकार प्रदेश में गोंडा, देवरिया, बलिया, आजमगढ़, सुल्तानपुर, जौनपुर, गाजीपुर, लखीमपुर आदि जिले संक्रामक रोगों की चपेट में हैं। समय रहते अगर ध्यान नहीं दिया गया तो यहां पर भारी जन हानि हो सकती है, इसके लिए शासन के वे अधिकारी जिम्मेदार हैं, जिन्होंने नीतिगत फैसले पारदर्शी ढंग से नहीं लिए।

उनहोंने कहा कि संक्रामक रोगों को रोकने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ता संविदा एम.पी.डब्ल्यू. (पुरुष) को प्रशिक्षण न देना, प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का अभाव संक्रामक रोगों के प्रसार का मुख्य कारण है। प्रदेश में संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए दीर्घजीवी कारगर रणनीति के अभाव के चलते समय-समय पर प्रति वर्ष तमाम लोग संक्रामक रोगों की चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठते हैं। वास्तव में इसका दोषी कौन है ? इसके दोषी शासन में बैठे वे अधिकारी हैं जो समय पर नीतिगत फैसला नहीं ले पाते। उनके टालमटोल का रवैया लोगों के जीवन पर भारी पड़ता है। नियमित रूप से मरीजों की ट्रैकिंग करके ही संक्रामक रोगों से बचाव किया जा सकता है। इसके लिए प्रदेश में प्रशिक्षित इकाई का होना अत्यंत आवश्यक है।

प्रदेश में नियमित 9080 तथा संविदा के 11453 पदों कुल मिलाकर 20533 पदों में से मात्र 1833 प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं से पूरे प्रदेश का कार्य लिया जा रहा है 18700 पद रिक्त हैं। जबकि विभागीय शासनादेश के अनुसार प्रति 5000 की आबादी पर एक प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ता की तैनाती प्रावधानित है जनगणना वर्ष 2011 के अनुसार इस पद के लिए 45000 से अधिक प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की आवश्यकता है और यहां विभाग में पहले से ही रिक्त पदों को भरने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।

यही नहीं भारत सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत के तहत हेल्थ एंड वैलनेस उपकेंद्रों पर प्रशिक्षण के अभाव में तैनाती नहीं दी जा रही है और शासन के अडंगे के चलते संविदा एमपीडब्ल्यू पुरुष को प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है जो पिछले 27 जुलाई से महानिदेशालय परिसर में 6ठे सप्ताह के कार्य दिवसों में पिछले 27 दिनों से अपने प्रशिक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं आज के आंदोलन की अध्यक्षता जनपद मैनपुरी और हाथरस के जिला अध्यक्ष गण विपिन यादव और संजीव शर्मा के द्वारा की गई। धरना स्थल पर जनपद हाथरस, मैनपुरी, मुजफ्फरनगर और लखनऊ के संविदा एम.पी.डब्ल्यू. स्वास्थ्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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