दुर्घटना में आंख सहित विकृत हो चुके चेहरे को सर्जरी से किया ठीक

केेजीएमयू के मैक्सिलोफेशियल विभाग के डॉक्टरों ने की विशेष सर्जरी

लखनऊ। 57 वर्षीय दुष्यंत को सडक़ दुर्घटना के बाद से एक चीज दो-दो नजर आती थीं, यही नहीं दुर्घटना में घायल होन के बाद उसके चेहरे की हड्डिïयां धंस गयी थीं जिस कारण उसका चेहरा विकृत हो गया था। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में वह बहुत आस लेकर आया था, यहां उसकी आस पूरी भी हुई। सडक़ दुर्घटना मे आंखों व चेहरे की टूट चुकी हड्डियों को मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के डॉ.शादाब मोहम्मद एवं उनकी टीम ने विशेष तकनीकी युक्त सर्जरी कर न केवल जोड़ दिया बल्कि आंखों को अपने नियत स्थान पर प्रतिस्थापित कर दिया, जिसके बाद 57 वर्षीय दुष्यंत सिंह में एक ही वस्तु के दो चित्र दिखने की समस्या खत्म हो गई। इतना ही नही हड्डियों के धंस जाने की वजह से विकृति हो चुके चेहरे को भी सामान्य अवस्था में पहुंचा दिया।

बुधवार को ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ.शादाब मोहम्मद ने बताया कि बीते दिनों दुष्यंत सिंह ओपीडी में आया था, उसने बताया कि उसे एक ही चीज दो जगह दिखाई देती हैं, चेहरे की हड़डिय़ां टूटने एवं धंस जाने की वजह से चेहरा असमान्य सा सपाट हो गया था। उन्होंने मरीज का सीटी स्कैन कराया तो स्थिति क्लीयर हो गई, आंखों के चारों ओर के साथ ही और चेहरे की हड्डिïयां कई जगह से टूट चुकी थीं, आंख के चारों ओर की हड्डी टूटने की वजह से हर एक चीज दो दिख रही थी। सीटी देखकर सर्जरी प्लान की गई। डॉ.शादाब ने बताया कि यह तकनीक विदेशों में सामान्य रूप से चलन में हैं। स्थानीय स्तर पर केजीएयमू में यह सुविधा उपलब्ध हैं, कई सफल सर्जरी संपन्न हो चुकी हैं। इसके साथ ही दंत संकाय के चिकित्सकों को इस सर्जरी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

सर्जरी टीम में शामिल डॉक्टर्स

डॉ.शादाब ने बताया कि कई घंटे चली सर्जरी में मेरे साथ डॉ.तस्वीर फातिमा, डॉ.देबराज होलडर, डॉ.रूबिन, डॉ.रूप गांगुली, डॉ.रेंगा, डॉ.प्रदीप व डॉ.विनोद शुक्ल शामिल रहे।