अग्न्याशय यानी पैंक्रियाज में अगर बार-बार सूजन आ रही है तो लापरवाही न करें

 

हो सकता है एक्यूट पेंक्रिएटाइटिस, गाल ब्लेडर में पथरी व शराब पीने वालों को ज्यादा खतरा

 

लखनऊ. अग्न्याशय यानी पैंक्रियाज में अगर बार-बार सूजन आ रही है तो इसे हलके में न लें, क्योंकि यह एक्यूट पेंक्रिएटाइटिस हो सकता है. यह बात एम्स नयी दिल्ली के डॉ. प्रमोद कुमार  आज किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के मेडिसिन विभाग द्वारा एक्यूट पेंक्रिएटाइटिस पर भाटिया-मिश्रा स्मारक व्याख्यान में कही. डॉ. गर्ग ने बताया कि अग्न्याशय मानव शरीर का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है जो पेट में पीछे की तरफ स्थित होता है। जो पाचक एंजाइम और इंसुलिन का निर्माण करता है। जब कभी अग्न्याशय में किसी वजह से सूजन आ जाती है तो इसे  एक्यूट पेंक्रिएटाइटिस कहा जाता है जिसकी वहज से पेट में असहनीय दर्द आदि लक्षण पैदा होते है।

उन्होंने बताया कि इस बीमारी के दो महत्वपूर्ण कारण है गाल ब्लैडर में पथरी और मदिरा का सेवन। ज्यादातर मरीजो में यह बीमारी 5 से 7 दिनों मे ठीक हो जाती है किन्तु एक्यूट पेंक्रिएटाइटिस के 20 से 30 प्रतिशत मरीजो को बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है तथा इसकी वजह से ऐसे मरीजो के अन्य अंगो जैसे हार्ट, लंग, किड्नी आदि अंगो पर भी प्रभाव पड़ने लगता है। ऐसे मरीजो का इलाज कई हफ्तो या महीनो तक चलता है। इस बीमारी से बचने के लिए शराब का सेवन नही करना चाहिए अग्न्याशय में बार बार सूजन आने पर डॉक्टर  से सलाह लें।

उन्होंने बताया की यदि किसी मरीज को गाल ब्लैडर की पथरी के साथ कोई तकलीफ हो तो उसे शल्य क्रिया कराना चाहिए। एक्यूट पेंक्रिएटाइटिस के 20 से 30 प्रतिशत मरीजो में मृत्यु दर बहुत ही उच्च होती हैं तथा ऐसे मरीजो का उपचार सर्जरी, मेडिसिन, रेडियोलाजिस्ट, गैस्ट्रोएंटोलाजिस्ट एवं आई0सी0यू0 के चिकित्सको के दल द्वारा मिलकर किया जाता है। भारत में इस बीमारी पर काफी शोध चल रहा है। 40 से 45 प्रतिशत मरीजो में गालब्लैडर की पथरी एवं 20 से 25 प्रतिशत मरीजो में शराब का सेवन इस बीमारी का मुख्य कारण है। इस बीमारी में अगर अग्न्यासय कें अंदर पस बन जाता है तो इसका उपचार इंडोस्कोपी के द्वारा किया जाता है। एक्यूट पैनक्रियाटाइटिस में इंडोस्कोपी का प्रयोग कर उपचार करना एक नई विधि है। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में इस बीमारी का सम्पूर्ण उपचार उपलब्ध हैं। जो कि  मेडिकल गैस्ट्रोइंटोलाजी विभाग के डा. सुमित रूंगटा, एवं मेडिसिन विभाग के डॉ. अजय कुमर द्वारा किया जाता है। एक्यूट पेंक्रिएटाईटिस में अब सर्जरी का कम उपयोग हो  रहा है अब इसके उपचार के लिए मरीज को आई0सी0यू0 में भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। डा गर्ग ने बताया की विश्व में एक लाख लोगो में से लगभग 80 मरीज इस बीमारी से ग्रसित होते है। जिन मरीजों को पेंक्रिएटाइटिस हो जाती है आर गाल ब्लैडर में पथरी होती है उन्हे सर्जरी जरूर करानी चाहिए।

कार्यक्रम में प्रो0 के0के0 सावलानी द्वारा प्रो0 बी0बी0 भाटिया एवं प्रो0 एस0एस0 मिश्रा का परिचय कराया गया जिनकी याद में इस व्याख्यान का आयोजन किया जाता है। डॉ.अजय कुमार द्वारा वोट ऑफ़ थैंक्स दिया गया। कार्यक्रम में प्रो0 विनीता दास, अधिष्ठाता, चिकित्सा संकाय, प्रो0 राजेन्द्र प्रसाद, प्रो0 रवि मिश्रा, प्रो0 अशोक चन्द्रा, प्रो0 सी0जी0 अग्रवाल, प्रो0 आर0सी0 अहुजा, प्रो0 माम चन्द्रा, डॉ. डी0 हिमांशु, सहित विभिन्न विभागों के चिकित्सा शिक्षक एवं रेजिडेण्ट डॉक्टर  उपस्थित रहे।