बच्चों को चोट लगने पर तभी अस्पताल जायें जब…

किस चोट में क्या करें और क्या न करें की जानकारी दी गयी केजीएमयू में

लखनऊ। बच्चों को अगर लग जाये चोट तो गंभीरता से तो लें लेकिन धैर्य रखते हुए लक्षणों के अनुसार ही उसको अस्पताल ले जाने का फैसला करें क्योंकि ऐसा देखा गया है कि बच्चों को लगने वाली चोटों में सिर्फ 15 से 20 फीसदी चोट ही ऐसी होती हैं जिनमें एक्सरे या सीटी स्कैन जैसी जांचों की जरूरत पड़ती है अन्यथा 80 फीसदी चोटों का इलाज घर पर ही किया जा सकता है।
यह महत्वपूर्ण जानकारी केजीएमयू के बाल्य अस्थि शल्य चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अजय सिंह ने दी। डॉ सिंह आम जनता की जागरूकता के लिए चिकित्सा विश्वविद्यालय में आयोजित वल्र्ड बोन एंड ज्वॉइन्ट डे के अवसर पर पीडियाट्रिक्स ट्रॉमा प्रीवेन्शन एंड प्री हॉस्पिटल मैनेजमेंट ऐट होम विषय पर आयोजित कार्यक्रम में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि घर पर एक फस्र्ट एड बॉक्स रखना चाहिये उन्होंने फस्र्ट एड बॉक्स में रखी दवाओं के बारे में जानकरी देते हुए बताया कि किस तरह के लक्षण हों तो किस तरह की दवा का इस्तेमाल करें और किन लक्षणों की मौजूदगी पर बच्चे को अस्पताल में दिखायें।
यदि बच्चे को चोट लग जाये तो उसपर नजर रखें और उसका इलाज घर पर ही करें यदि बच्चा सामान्य व्यवहार कर रहा है तो उसे अस्पताल लाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अक्सर बच्चों के गिरने से उनके सिर में चोट लग जाती है तो ऐसे में यदि उसे उल्टी नहीं आ रही है, उसे झटके नहीं आ रहे हैं या बेहोशी नहीं आ रही है तो फिर उसका इलाज घर पर ही किया जा सकता है।
डॉ अजय ने कहा कि इसी प्रकार अक्सर सुनायी पड़ता है कि बच्चे ने नाक, कान या मुंह में सिक्का, दाना जैसी कोई चीज चली गयी है ऐसी स्थिति में स्वयं इलाज न करें उसे चिकित्सक को अवश्य दिखायें। उन्होंने आगे बताया कि दरअसल होता यह है कि ऐसी स्थिति में घरवाले किसी न किसी चीज की सहायता से खुद ही फंसी हुई चीज निकालने की कोशिश करने लग जाते हैं इससे यह डर बना रहता है कि जो चीज चिकित्सक को दिखाने पर आसानी से बाहर निकल सकती है लेकिन घर पर की गयी कोशिश से केस बिगड़ जाता है और ऑपरेशन करने की स्थिति पैदा हो जाती है।
डॉ अजय ने गले, आंख, हड्डी के टूटने व सिर आदि की चोंटों में क्या करें और क्या न करें के बारे में जानकारी दी। उत्तर प्रदेश ऑथोपैडिक एसोसिएशन, लखनऊ ऑथोपैडिक एसोसिएशन व इंडियन सोसाइटी ऑफ पीडियाट्रिक्स एंड ट्रॉमोटोलॉजी के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रो अजय सिंह, प्रो एसजीके सिंह, सीएमएस डॉ एसएन संखवार, प्रो विनीत शर्मा, प्रो आरएन श्रीवास्तव, प्रो संतोष कुमार, प्रो आशीष कुमार भी उपस्थित रहे।