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वार्ता से सार्थक निर्णय नहीं निकाला गया तो शासन व कर्मचारियों के बीच टकराव तय

-जनवरी 2020 से जुलाई 2021 तक फ्रीज डीए के एरियर सहित 12 सूत्रीय मांगों के लिए 27 नवंबर को मशाल जुलूस

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ राज्‍य कर्मचारी संयुक्‍त परिषद ने कहा है कि सरकार कर्मचारियों की महत्वपूर्ण मांगों पर बातचीत के माध्यम से सार्थक निर्णय कर दे तो अच्‍छा है वरना शासन एवं कर्मचारियों के बीच टकराव रोक पाना संभव नहीं है। प्रदेश के कर्मचारी जनवरी 2020 से जुलाई 2021 तक के फ्रीज डीए का एरियर दिए जाने सहित 12 सूत्रीय मांगपत्र की पूर्ति के लिए 27 नवंबर को जनपद मुख्यालय पर सायं मशाल जुलूस निकालकर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजेंगे, जिसमें राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद महत्वपूर्ण भागीदारी करेगा।

इस सम्‍बन्‍ध में रणनीति बनाने के लिए आज परिषद की बैठक अध्यक्ष सुरेश रावत की अध्यक्षता में बलरामपुर चिकित्सालय में सम्पन्न हुई। परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा ने बताया कि परिषद का मत है कि सरकार को चाहिये कि वह महत्वपूर्ण मांगों पर बातचीत के माध्यम से सार्थक निर्णय कर शासन और कर्मचारियों के बीच होने वाला टकराव रोके।  

उन्‍होंने कहा कि मोर्चा के नेताओं द्वारा मांगों पर निर्णय करने के‍ लिए निरंतर पत्र भेजा गया। इसके बाद 20 सितंबर से 30 सितंबर तक सभी मंत्री गण/विधानसभा सदस्य/विधान परिषद सदस्य के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर आग्रह किया गया कि मोर्चा के पदाधिकारियों के साथ बैठक करके उन मांगों पर तत्काल निर्णय कराएं जो लंबे अरसे से लंबित हैं, परंतु खेद की बात है कि प्रदेश सरकार द्वारा मांग पूरी करना तो दूर वार्ता तक नहीं की गई,  जिससे कर्मचारियों में काफ़ी रोष व्याप्त है। उन्‍होंने कहा कि 9 दिसम्बर को प्रस्‍तावित कार्यबन्दी में प्रदेश की समस्त आवश्यक सेवाएं स्वास्थ्‍य, परिवहन वन, सिंचाई, रोडवेज़ सहित लगभग दो सौ संवर्गों के कर्मचारी शामिल होंगे और सरकार के उपेक्षित रवैये का पुरज़ोर विरोध करते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में जवाब देंगे।

राजकीय नर्सेस संघ के महामंत्री व परिषद के प्रवक्ता अशोक कुमार ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार कर्मचारियों के बकाये का भुगतान 6% व्याज के साथ किया जाना चाहिए। कर्मचारियों ने कोविड काल मे अपने प्राणों की बाजी लगाकर कार्य किया। हर कर्मचारियों का लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।

सुरेश रावत ने बताया कि विगत सभी मुख्यमंत्रियों एवं मुख्य सचिव ने मोर्चा व परिषद के साथ बराबर बैठकें कीं और सार्थक निर्णय किए गए, परंतु खेद है कि वर्तमान मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव की ओर से कर्मचारियों एवं शिक्षकों के प्रति उदासीनता बरतते हुए भेजे गए ज्ञापन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

फार्मेसिस्ट फेडरेशन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष व परिषद के प्रमुख उपाध्यक्ष सुनील यादव ने खेद व्यक्त किया कि प्रदेश सरकार की उपेक्षा के कारण प्रदेश के 22 लाख कर्मचारी शिक्षक आक्रोशित हैं। जब सरकार आर्थिक संकट में थी तो कर्मचारियों ने 1 दिन का वेतन दिया, अब जब  भीषण महंगाई से कर्मचारी परिवार संकट में है तो फ्रीज डी ए का बकाया एरियर भी नहीं दे रही है, जिसका खामियाजा भावी चुनाव में भुगतना पड़ेगा।

लैब टेक्नीशियन संघ के प्रवक्ता व परिषद के मीडिया प्रभारी सुनील कुमार ने कहा कि सरकार वेतन समिति के निर्णय को 4 वर्ष से रोके हुए हैं जिससे सातवें वेतन आयोग का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

संगठन प्रमुख के के सचान ने कहा कि स्थानीय निकायों, राजकीय निगमों, विकास प्राधिकरण, स्वायत्तशासी संस्थाओं के शिक्षणेतर कर्मचारियों को समानता नहीं मिल रही है। सेवा नियमावली सिंचाई, वाणिज्य कर ,वेतनरी फ़ार्मसिस्ट एवं अन्य विभागों की लंबित हैं।

एन एम ए संघ के अध्यक्ष सतीश यादव ने कहा कि पुरानी पेंशन की बहाली भी भारत सरकार एवं राज्य सरकार नहीं कर रही है जिससे युवाओं में बहुत असंतोष है।

परिषद ने प्रदेश के लाखों कर्मचारियों व सभी संघ, संगठनों से भी अपील की है कि अपना व संगठनों का अस्तित्व बचाने के लिए हम सभी को संयुक्त मोर्चा द्वारा घोषित आन्दोलन में सहयोग, समर्थन करके, देश, प्रदेश के लाखों नवजवानों को आउटसोर्सिंग/संविदा पर बहुत ही अल्प वेतन वह भी समय से न देकर उनके भविष्य को बर्बाद करने से बचाने के लिए वाजिब वेतन एवं सुरक्षा देने के लिए संघर्ष करने को तैयार रहें।

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