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आपका ‘हाई स्टैंडर्ड’ आपको अस्थमा तो नहीं दे रहा?

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद

लखनऊ। क्या आप जानते हैं कि अस्थमा के रोग के कारण कब आपको अपने घर में ही घेर लें और आप समझ भी न पायें। शहरों में अस्थमा मॉर्डर्न लाइफ स्टाइल के चलते हो रहा है। यही नहीं हाई स्टैंडर्ड या सम्पन्नता का प्रतीक समझे जाने वाले कारपेट को यदि आप नियमित रूप से कायदे से साफ नहीं करते हैं तो यह कारपेट आपको अस्थमा का शिकार बना सकता है। जिन्हें अस्थमा नहीं हैं उन्हें अस्थमा का रोगी बना सकता है और जो अस्थमा के रोगी हैं उन्हें और ज्यादा बीमार बना सकता है।

कारपेट के नीचे छिपे रहते हैं डस्ट माइट

वल्लभ भाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के पूर्व डाइरेक्टर डॉ राजेन्द्र प्रसाद से विश्व अस्थमा दिवस पर ‘सेहत टाइम्स’ ने विशेष बात की। डॉ. प्रसाद ने बताया कि धूल एक ऐसी चीज है जिसे घर के अंदर आने से रोक पाना बहुत लगभग नामुमकिन है क्योंकि हवा के साथ धूल के कण इतने मात्रा में आ जाते हैं कि इनसे निपटने का सिर्फ एक ही उपाय है, वह है सफाई। उन्होंने बताया कि घर में बिछे कारपेट की नियमित रूप से सफाई और उन्हें धूप दिखाना बहुत आवश्यक है क्योकि अक्सर कारपेट के ऊपर तो सफाई हो जाती है लेकिन कारपेट के नीचे धूल जमी रहती है, इसी धूल में माइट छिपे रहते हैं, यही डस्ट माइट जब सांस की नलियों  में जाकर चिपक जाते हैं तो अस्थमा का कारण बनते हैं। इसके लिए आवश्यक है कि कारपेट हटाकर सफाई करने के साथ ही कारपेट को धूप में भी रखना चाहिये। धूप मेें ये माइट नष्ट हो जाते हैं।

रजाई, गद्दे, तकिये को समय-समय पर धूप मेंं रखते रहेें

उन्होंने बताया कि पुराने समय में खासतौर से लोग रजाई, गद्दे, तकिये आदि को धूप में रखते थे, घर के अंदर भी धूप आती थी। लिहाफ, गद्दों, तकियों की रुई में धूल जम ही जाती है, ऐसे में इस धूल में माइट पनपते हैं। धूप में इन चीजों को रखकर माइट को नष्टï करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि माइट दरअसल एक तरह का ऑरगेनिज्म है। जीव होने की वजह से जब यह सांस की नलियों में पहुँचता है तो अस्थमा पैदा करता है। यही माइट जब धूप में पहुंचता है तो मर जाता है।

परदों की भी धूल साफ होती रहनी चाहिये

डॉ प्रसाद ने बताया कि इसी प्रकार यदि छत से यदि पानी टपकता है, घर में सीलन आती है तो इसमें फंगस उत्पन्न हो जाती है। यह फंगस भी अस्थमा का एक बड़ा कारण है। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार घर में लगे परदों में धूल जमती रहती है, कुछ घरों में तो पर्दे बहुत ज्यादा ही होते हैं तो इसका अर्थ है ज्यादा धूल होने की संभावना, इनकी भी नियमित सफाई होनी जरूरी है। उन्होंने बताया कि आजकल घर भी ज्यादातर ऐसे बनते हैं जिनके अंदर धूप तो आती नहीं है, हवा के साथ धूल जरूर आ जाती है।

पालतू जानवर, सॉफ्ट ट्वायज भी हैं कारण

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि इसी प्रकार घर में अगर पालतू जानवर है तो उसके बालों से अस्थमा होने का खतरा बहुत रहता है। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार से अगर बच्चे को धूल से एलर्जी है तो उसे सॉफ्ट ट्वायज खेलने को न दें। इन सॉफ्ट ट्वायज में बहुत धूल जम जाती है। डॉ प्रसाद ने बताया कि इसलिए आवश्यक है कि हम इस छिपी हुई धूल को जितना भी साफ करेंगे उतना ही डस्ट माइट इकट्ठे नहीं हो पायेंगे।

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