Wednesday , July 27 2022

स्वास्थ्य सेवाओं को प्रयोगशाला न बनाये सरकार

पीएमएस संघ की बैठक में अनेक बातों पर हुआ विचार, सरकार के समक्ष रखीं मांगें

लखनऊ। प्रदेश की राजकीय चिकित्सा सेवाओं में स्वेच्छाचारी प्रयोग करने इस महत्वपूर्ण सेवा को अनियंत्रित प्रयोगशाला बनाये जाने की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता जताते हुए पीएमएस एसोसिएशन ने मांग की है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाएं सुधारने के लिए पूर्वाग्रह मुक्त समीक्षा कर तकनीकी आधारों पर प्रमाणित, व्यावहारिक उपाय अविलम्ब करे।
यहां आयोजित एसोसिएशन की बैठक में महामंत्री डॉ अमित सिंह ने कहा कि चिकित्सकों पर कार्य का बोझ मानकों से बहुत ज्यादा है। स्थायी चिकित्सकों और स्थायी कर्मियों की भारी कमी है। खाली पड़े पदों को काफी समय से स्थायी रूप से नहीं भरा गया है। मुख्यालय उपाध्यक्ष डॉ आशुतोष दुबे ने कहा कि केवल कामचलाऊ व्यवस्था के तहत केवल संविदा पर तथा प्राइवेट एजेंसियों से भर्ती कराकर मानकविहीन व्यवस्था निर्मित की गयी है। भर्ती करने वाली निजी एजेंसियों द्वारा चिकित्सकों और कर्मियों की सेवा शर्तें, उनके वेतन और उनके कार्यस्थल का निर्धारण स्वेच्छाचारी तरीके से किया गया है और किया जा रहा है। इसका परिणाम यह है कि नियमित सेवा और कामचलाऊ सेवा में कार्यरत चिकित्सक और कर्मियों दोनों में ही कुंठा व्याप्त है।
पीएचसी, सीएचसी, जिला अस्पतालों की प्रयोगशालाओं की प्राथमिक जांचों की व्यवस्था सुधारने की शीर्ष प्राथमिकता होनी चाहिये। यदि जांच की बेसिक सुविधाएं वहां उपलब्ध नहीं हैं तो पीपीपी मोड पर हार्मोन्स तथा अति विशिष्ट जांचों को काम बिना किसी पुख्ता आधारों के निजी हाथों में देना औचित्यपूर्ण नहीं है और यह प्रयोग असफल भी हुआ है जिससे चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं की साख गिरी है। एक ही चिकित्सा इकाई में सरकारी सेवाओं के बीच में निजी सेवाओं का दखल प्रशासनिक और व्यवस्थागत अनुशासनहीनता को उत्पन्न कर रहा है। यदि किसी चिकित्सा इकाई को पीपीपी मोड पर चलाना है तो उसे पूरी तरह निजी हाथों में सौंपकर उसकी परख की जा सकती है।
बैठक में वर्ष 2017 की संवर्ग की स्थानांतरण नीति तथा कथित मानव सम्पदा सॉफ्टवेयर की खामियों को विस्तार से व्यक्त किया गया। बड़े पैमाने पर प्रोन्नतियां और विशिष्टï एसीपी का लाभ दिया जाना विलम्बित है, इसको लेकर निराशा व्यक्त की गयी। चिकित्सकों की सेवा निवृत्ति की अधिवर्षता आयु बढ़ाने को लेकर अलग-अलग पैमाना बनाने पर भी गहरी आपत्ति जतायी गयी। बैठक में अप्रैल 2017 में दिये गये मांग पत्र पर शिथिलता बरतने पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया।
बैठक में अध्यक्ष डॉ अशोक कुमार यादव, महासचिव डॉ अमित सिंह, उपााध्यक्ष डॉ आशुतोष दुबे, उपाध्यक्ष डॉ भावतोष शंखधर, उपाध्यक्ष डॉ विनय कुमार यादव, उपाध्यक्ष डॉ विकासेन्दु अग्रवाल, अपर महामंत्री डॉ अनिल कुमार त्रिपाठी तथा वित्त सचिव डॉ अनिल सिंह उपस्थित रहे।

 

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