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बड़े शहरों की मजबूरी, बढ़ती सेक्स से दूरी

मेट्रोपोलिटन शहरों में घट रहा है सेक्स के प्रति रुझान

लखनऊ। आपको जानकर ताज्जुब होगा कि पिछले 20 से 30 साल पहले की अपेक्षा वर्तमान में पति-पत्नी के बीच सेक्स को लेकर रुझान कम हुआ है। यह सर्वे रिपोर्ट बड़े शहरों यानी कि भारत के दिल्ली, मुंबई, बंगलुरू जैसे मेट्रोपोलिटन सिटीज की है। इसकी मुख्य वजह बढ़ता औद्योगिकीकरण, बढ़ती आवश्यकताएं और सामाजिक परिस्थितियां हैं। यह कहना है किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के मानसिक रोग विभाग के डॉ आदर्श त्रिपाठी का।

कामकाजी दम्पतियों के पास समय ही नहीं

एक विशेष वार्ता में डॉ आदर्श ने ‘सेेहत टाइम्स’ को बताया कि मेट्रोपोलिटन शहरों में जहां पति-पत्नी दोनों काम करते हैं वहां उनकी दिनचर्या ही ऐसी हो जाती है जैसे कि सुबह 8 बजे घर से निकलना और रात 10 बजे घर में वापस घुसना अब ऐसी स्थिति में दोनों इतने थके-मांदे होते हैं कि सामान्यत: उनको सोने के लिए बिस्तर ही नजर आता है। इसी प्रकार अगर पति-पत्नी की ड्यूटी अलग-अलग शिफ्ट में होती है तो फिर आपस में मिलने का मौका ही बमुश्किल मिलता है।

डॉ आदर्श त्रिपाठी

पति-पत्नी के अलग-अलग बेडरूम

डॉ आदर्श ने बताया कि यही नहीं कई घरों में तो पति-पत्नी अपने-अपने बेडरूम तक अलग कर लेते हैं क्योंकि जब एक सो गया है तो हो सकता है दूसरा ड्यूटी से लौट रहा हो, ऐसे में नींद में बाधा न पड़े इसके लिए अलग-अलग बेडरूम बना लेते हैं और जब सेक्स करना होता है तो रूम शेयर कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि जिस भी देश में औद्योगीकरण बढ़ रहा है वहां लोगों में सेक्स के प्रति इच्छा कम हो रही है क्योंकि उनके पास इसके लिए समय ही नहीं बच पाता है।

पारस्परिक सम्बन्धों पर पड़ता है असर

यह पूछने पर कि इसका क्या असर होता है तो उन्होंने बताया कि इसका असर पति-पत्नी के पारस्परिक सम्बन्धों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह सही है कि साधू-संत जैसे लोग जो सेक्स नहीं करते हैं वे अपनी लाइफ स्टाइल उसी तरह की बना लेते हैं लेकिन पति-पत्नी के जो अंतरंग रिश्ते होते हैं उनमें सेक्स की कमी होना सम्बन्धों पर असर डाल सकती है। उन्होंने बताया कि ऐसी स्थितियों के चलते कई पति-पत्नी ऐसे होते हेैं जो समानांतर जीवन जीते रहते हैं, यानी रहते तो एक साथ हैं लेकिन फिर भी एकसाथ नहीं होते।

बढ़ती है नपुंसकता और घटती है प्रजनन क्षमता

डॉ आदर्श ने बताया कि इसके अतिरिक्त सेक्स न करने का असर सेक्स करने की क्षमता पर भी पड़ता है, उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को सेक्स डिस्ऑर्डर हो जाता है क्योंकि ऐसा होता है कि यदि लगातार सेक्स करते रहने से सेक्स करने की क्षमता और प्रजनन क्षमता बनी रहती है लेकिन अगर सेक्स का अंतराल बहुत ज्यादा हो जाता है तो स्पर्म की क्वालिटी पर भी असर पड़ता है जिससे प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि सही समय से विवाह न होने के कारण आजकल बहुत से लोगों में नपुंसकता बढ़ रही है।

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