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केजीएमयू के 90 प्रतिशत कर्मियों में मिली कोविड एंटीबॉडीज, 10 फीसदी को गंभीर संक्रमण का खतरा

-100 कर्मी ऐसे भी जिनमें दोनों डोज लेने के बाद भी नहीं बनी एंटीबॉडीज

-60 स्‍वास्‍थ्‍य कर्मी ऐसे, जिनका नहीं हुआ है कोविड टीकाकरण

-सभी 2000 स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों में कोविड एंटीबॉडीज की करायी गयी थी स्‍क्रीनिंग

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय (केजीएमयू) के 2000 स्वास्थ्य कर्मियों में 90 प्रतिशत कर्मी ऐसे हैं जिनके अंदर कोविड-19 के खिलाफ एंटीबॉडी बन चुकी हैं, जबकि 10 फीसदी कर्मी ऐसे हैं जिनके अंदर कोविड से लड़ने वाली एंटीबॉडीज नहीं हैं। यह तथ्‍य यहां के कर्मियों की स्‍क्रीनिंग में सामने आया है।  

यह रिपोर्ट केजीएमयू के मीडिया प्रवक्‍ता डॉ सुधीर सिंह ने जारी करते हुए बताया है कि कुलपति ले.ज. डॉ बिपिन पुरी के मार्गदर्शन में ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की प्रमुख डॉ तूलिका चंद्रा द्वारा की गयी इस स्‍क्रीनिंग में ये परिणाम प्राप्‍त हुए हैं। उन्‍होंने बताया कि इन परिणामों के अनुसार केजीएमयू में चिकित्‍सक सहित सभी 2000 स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों में 90 प्रतिशत में कोविड आईजीजी स्पाइक एंटीबॉडी मिले जबकि शेष 10 प्रतिशत कर्मियों ने कोई एंटीबॉडी विकसित नहीं की, जिन 10 प्रतिशत में एंटीबॉडी नहीं पायी गयीं उनमें भी 5 प्रतिशत ऐसे हैं जिन्‍हें टीकाकरण की दोनों खुराकें दी जा चुकी हैं। 

रिपोर्ट के अनुसार केजीएमयू के 3 प्रतिशत कर्मियों ने चिकित्सीय स्थितियों के कारण अभी तक टीकाकरण नहीं कराया है जबकि 2 प्रतिशत ने अभी टीकाकरण की पहली खुराक ही ली है।

रिपोर्ट के अनुसार जिन 90 प्रतिशत में एंटीबॉडी पायी गयी हैं उनमें 68 प्रतिशत कर्मियों ने टीकाकरण की दोनों खुराकें प्राप्त कर ली हैं, जबकि 11 प्रतिशत ने वैक्‍सीन की एक खुराक प्राप्‍त कर ली है और शेष 11 प्रतिशत का टीकाकरण नहीं हुआ है यानी ये वे लोग हैं जिनके अंदर बिना टीकाकरण एंटीबॉडी पायी गयी हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि टीकाकरण की दोनों खुराक लेने वाले 41 फीसदी कर्मी ऐसे हैं जो कभी भी COVID 19 से संक्रमित नहीं रहे, यानी यह माना जा रहा है कि इनके अंदर जो भी एंटीबॉडी हैं वे मुख्‍य रूप से टीकाकरण के कारण हैं। इसके अतिरिक्‍त 26 प्रतिशत कर्मियों को टीके के दोनों डोज भी मिले और उन्‍हें कोविड संक्रमण भी हो चुका है। बताया गया है कि इस स्‍क्रीनिंग से यह भी निष्कर्ष निकाला गया कि संक्रमण के बाद अधिकांश लोगों में एंटीबॉडी का पता संक्रमण के 4 महीने के भीतर चल जाता है।

रिपोर्ट में एक खास बात बतायी गयी है कि टीकाकरण की एक खुराक लेने वालों में एंटीबॉडी की स्थिति वैसी ही है जैसी टीकाकरण न करवाने वालों की है। कुछ लोगों में बिना कोविड संक्रमण और बिना टीकाकरण के भी एंटीबॉडी हैं, ये संभवत: वे लोग हैं जो संक्रमित हुए और ठीक भी हो गये, लेकिन उन्‍हें इसका पता ही नहीं चला।

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