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बच्‍चे हफ्ते में कम से कम पांच बार खेल जैसी शारीरिक ग‍तिविधियों में अवश्‍य हिस्‍सा लें

-वर्ल्‍ड पीडियाट्रिक बोन एंड ज्‍वाइंट डे के अवसर पर केजीएमयू के बाल चिकित्सा हड्डी रोग विभाग में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। अपने बच्चों को सप्ताह में कम से कम 5 बार शारीरिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें, इन गति‍विधियों में उनकी उम्र के अनुसार मजेदार खेल या अन्‍य एक्टिविटी शामिल कर सकते हैं। ऐसा करने से बच्‍चों की हड्डियां, जोड़ मजबूत रहेंगे।

यह सलाह बाल चिकित्सा हड्डी रोग विभाग केजीएमयू और उत्तर प्रदेश ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (यूपीओए) के संयुक्‍त तत्‍वावधान में वर्ल्‍ड पीडियाट्रिक बोन एंड ज्‍वाइंट डे (19 अक्‍टूबर) के अवसर पर विभाग में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में विभागाध्‍यक्ष डॉ अजय सिंह ने दी।

डॉ सिंह ने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चे की हड्डियों के स्वास्थ्य को पोषण देने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को ध्यान में रखना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि माता-पिता को चाहिये कि अपने बच्चे को उम्र-उपयुक्त, मज़ेदार और विविध गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें।

डॉ सिंह ने बताया कि व्‍यायाम या खेल कौन सा चुना जाये यह आपके बच्चे की उम्र के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। उन्‍होंने कहा कि जैसे 3 वर्ष से 5 वर्ष की उम्र तक जब बच्‍चा स्‍कूल नहीं जाता है, उस समय कम से कम एक घंटा (60 मिनट) कोई न कोई फि‍जिकल एक्टिविटी जरूर करनी चाहिये, इसके अलावा इससे बड़े स्‍कूल जाने वाले बच्‍चे या टीन एजर यानी 6 वर्ष से 17 वर्ष की आयु के बच्‍चों को रोजाना एक घंटे शारीरिक श्रम वाले खेल या कार्य को करने के अलावा मांसपेशियों की मजबूती के लिए सप्‍ताह में कम से कम दो बार किसी ऊंची जगह पर चढ़ना या दंड बैठक (पुशअप) अवश्‍य करना चाहिये। इसके अलावा पोषण के लिए अपने बच्चों को कैल्शियम युक्त आहार प्रदान करें

उन्‍होंने बताया कि डेयरी उत्पादों में कैल्शियम मध्यम मात्रा में पाया जाता है। रागी जिसे मंडुवा भी कहते हैं, कैल्शियम का बेहतरीन स्रोत है। रागी में प्रति 100 ग्राम में 350-375 मिलीग्राम कैल्शियम होता है। रागी को अपने आहार में शामिल करना महत्वपूर्ण है। अगर रागी उपलब्ध नहीं है, तो इसकी जगह राजमा या तिल ले सकते हैं। राजमा में 275-300mg और तिल में 800mg कैल्शियम पाया जाता है।

डॉ अजय ने बताया कि आंकड़े बताते हैं कि ज्‍यादा सोडा और काबोनेटेड पेय जैसे कोल्‍ड ड्रिंक से हड्डियां कमजोर होती हैं। शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि सोडा, विशेष रूप से कोला, का सेवन हड्डियों के घनत्व पर कई प्रतिकूल प्रभाव डालता है और जो लोग कोला पीते हैं उनके पास पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी प्राप्त करने की संभावना कम होती है क्‍योंकि वे लोग अपने आहार में दूध या कैल्शियम-फोर्टिफाइड जूस जैसे अधिक पौष्टिक पेय पदार्थों का सेवन न करके उसकी जगह सोडा का सेवन करते हैं।

डॉ अजय ने बताया‍ कि इसी तरह ऑनलाइन क्लास लेते समय या टीवी देखते समय अपने बच्चे की मुद्रा पर नज़र रखें। बच्चों के बैठने के लिए ’90-90-90′ गाइडलाइन का पालन करना चाहिए। जब वह बैठता है तो आपके बच्चे की कोहनी, कूल्हे और घुटने 90 डिग्री के कोण पर होने चाहिए। इसका मतलब है कि आपके बच्चे का वर्कस्टेशन उनकी कोहनी की ऊंचाई के बराबर होना चाहिए। छोटे बच्चों के बैठने की उचित स्थिति के लिए कुर्सी को आकार में ऊपर उठाने की आवश्यकता हो सकती है। यदि आपके बच्चे के पैर फर्श पर मजबूती से टिकने के बजाय हवा में लटक रहे हैं, तो पैरों को स्‍टूल जैसी चीज से सहारा देना चाहिये।

इस अवसर पर प्रो अजय सिंह एचओडी और टीम पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स केजीएमयू (डॉ सुरेश और डॉ फैसल) ने जहां बच्चों में स्वस्थ हड्डियों को रखने के उपायों के बारे में बताया।  वहीं यह टीम पेड ऑर्थो केजीएमयू और यूपीओए के इलेक्टिव प्रेसीडेंट प्रो आशीष कुमार द्वारा संवाद के माध्‍यम से इस विषय में लोगों में फैले भ्रम को दूर किया गया। मुख्‍य चिकित्‍सा अधीक्षक प्रो एस एन संखवार ने इस तरह के जन जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन के महत्व के बारे में बताया।

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