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बदलता मौसम और आपका दिल

बरसात और ठण्‍ड भरा मौसम देखकर आपका दिल मचल उठता है। लेकिन, इससे आप ब्‍लड प्रेशर के शिकार हो सकते हैं। ग्लास्गो यूनिवर्सिटी की रिसर्च में यह बात सामने आई है। इस रिसर्च में कहा गया है कि कैसे कई लोगों का रक्‍तचाप आस-पास के तापमान के आधार पर ऊपर-नीचे होता रहता है। जैसे-जैसे पारा नीचे जाता है, खतरा बढ़ता जाता है। इसमें यह बात भी सामने आई है कि मौसम में इस तरह के बदलाव के कारण कई लोग अपनी जान भी गवां सकते हैं।

एक आम आदमी के लिए यह बात ज़रा हैरान करने वाली हो सकती है। लेकिन, त्‍वचा के ऊपरी हिस्‍से की रक्‍त-वाहिनी ठण्‍ड के प्रति अधिक संवेदनशील होती है। वे गरमाहट को बचाने के लिए ऐसी होती है,क्‍योंकि गर्मी से रक्‍तचाप बढ़ता है। रक्‍तचाप में बदलाव के कारण शरीर में तनाव पैदा होता है और इससे हृदयाघात और स्‍ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, किसी व्‍यक्ति का रक्‍तचाप देखते समय डॉक्‍टर को चाहिए कि उस समय के तापमान को भी नोट करे। तो, इससे डॉक्‍टर को यह अंदाजा लगाने में मदद मिलती है कि कोई व्‍यक्ति कितना संवेदनशील है। इससे इलाज करने में भी मदद मिलती है।

स्वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों ने पश्‍चिमी स्‍कॉटलैण्‍ड की मौसम सम्‍बन्‍धी जानकारियों और रोगियों के रक्‍तचाप के चालीस वर्षों के डाटा का अध्‍ययन करने के बाद यह बात कही। इसमें यह बात सामने आई कि आधे लोग मौसम में होने वाले बदलावों के प्रति संवेदनशील थे। इन लोगों में मौसम में दस डिग्री सेल्‍सियस की गिरावट से रक्‍तचाप तीन एमएम और छह एमएम बढ़ गया।

भले ही यह अन्‍तर बहुत अधिक महसूस नहीं होता हो, लेकिन आपको यह जानकार हैरानी होगी कि रक्‍तचाप में महज दो एमएम की बढ़त भी हृदयाघात का खतरा पैदा कर सकती है।

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