ई सिगरेट पर बैन लगाने की राज्‍य सरकारों को केंद्र की सलाह

सिगरेट के विकल्‍प में बनी मिंट वाली सिगरेट में भी भरी जाने लगी तम्‍बाकू

सिगरेट की लत छुड़ाने के उद्देश्‍य से बनायी गयी ई सिगरेट की मैन्‍यूफैक्‍चरिंग और बिक्री पर बैन लगाने की सिफारिश स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने राज्‍य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से की है। दरअसल ई सिगरेट बनाते समय इसका उद्देश्‍य सिगरेट छुड़ाना था और इस सिगरेट में मिंट का इस्‍तेमाल किया जाता था यानी जो व्‍यक्ति यह सिगरेट पीता था वह मनोवैज्ञानिक रूप से मिंट वाला धुआं छोड़कर सिगरेट पीने का अहसास कर लेता था, लेकिन सूत्र बताते हैं कि बाद में इसमें मिंट के साथ-साथ तम्‍बाकू मिलाना भी शुरू कर दिया गया नतीजा यह हुआ कि जिस वजह से ई सिगरेट का इजाद किया गया वह वजह कायम रही।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार स्वास्थ्य मंत्रालय ने ई-सिगरेट, ई-निकोटीन फ्लेवर्ड वाले हुक्का और इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम (ईएनडीएस) को हेल्थ के लिए काफी खतरनाक बताया है. साथ ही राज्य सरकारों से इसके प्रोडक्शन और बिक्री पर रोक लगाने के लिए कहा है.

गर्भ में पल रहे बच्‍चे का मस्तिष्‍क अविकसित होने का खतरा

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि  अगर गर्भवती महिलाएं इसका इस्तेमाल करती हैं तो गर्भ में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क के विकास, बच्चे के सीखने की क्षमता पर असर पड़ सकता है.

मंत्रालय की तरफ से जारी निर्देश में कहा गया है कि इस बात के वैज्ञानिक साक्ष्य मौजूद हैं कि ईएनडीएस लोगों के हेल्थ के लिए काफी खतरनाक है. खासकर ऐसे प्रोडक्ट बच्चों, किशोरों और महिलाओं को काफी नुकसान पहुंचाता है. यह ट्यूमर को बढ़ावा देने वाला साबित हो सकता है।

इन राज्‍यों ने पहले से ही लगा रखा है बैन

आपको बता दें कि पंजाब, जम्मू-कश्मीर, बिहार, उत्तर प्रदेश, मिजोरम, कर्नाटक और केरल राज्य पहले से ही ईएनडीएस की बिक्री, निर्माण, वितरण और आयात पर रोक लगा चुके है।

30 देशों में पहले से है बैन

स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश में कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, मॉरिशस, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, कोरिया (डेमाक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक), श्रीलंका, थाईलैंड, ब्राजील, मैक्सिको, उरुग्वे, बहरीन, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात जैसे 30 देशों ने ईएनडीएस पर रोक लगा रखा है।

मंत्रालय ने कहा है कि इसे ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत भी मंजूरी नहीं मिली है. ऐसे में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी जाती है कि वे सभी ईएनडीएस प्रोडक्ट की बिक्री, प्रोडक्शन, डिस्ट्रिब्यूशन, आयात और विज्ञापन पर रोक लगा दें.