-आधी रात के बाद (04.06.2026 00.28 AM) आशियाना थाने में दर्ज किया गया मुकदमा
-31 मई को कार से जा रहे चिकित्सक पर दूसरी कार में सवार पुरुष व महिला ने की मारपीट व लूट का प्रयास

सेहत टाइम्स
लखनऊ। केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर विवेक सिंह के साथ आशियाना क्षेत्र में तीन दिन पहले 31 मई को हुई मारपीट की घटना की एफआईआर न लिखे जाने और डॉक्टर पर हमले के विरोध में 3 जून को केजीएमयू टीचर्स एसोसिएशन और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, लखनऊ द्वारा अपर मुख्य सचिव गृह को लिखे गये पत्र के बाद अंतत: आधी रात के बाद 12 बजकर 28 मिनट (4 जून, 2026) पर आशियाना थाने में एफआईआर दर्ज की गयी है।
मारपीट में घायल चिकित्सक केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हैं। 3 जून को केजीएमयू टीचर्स एसोसिएशन और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, लखनऊ ने गहरी नाराजगी जताते हुए दोनों एसोसिएशंस ने इस घटना के बारे में अपर मुख्य सचिव गृह को पत्र लिखकर पीडि़त चिकित्सक की एफआईआर लिखने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
केजीएमयू टीचर्स एसोसिएशन के महामंत्री डॉ संतोष कुमार द्वारा अपर मुख्य सचिव गृह को भेजे पत्र में कहा है कि डॉ. विवेक कुमार सिंह हमारे विश्वविद्यालय के यूरोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं, जो हिमालय इन्कलेव, वृंदावन योजना, लखनऊ में रहते हैं। डा. विवेक ने अवगत कराया है कि वह अपनी कार से बी.बी.ए. युनिवर्सिटी की तरफ दिनांक 31.05.2026 को सायं 5-6 बजे जा रहे थे, जिन्हें स्वीफ्ट कार नम्बर यूपीः 32 ईजे 9010 से टक्कर मारी गयी।
तहरीर के बाद भी एफआईआर न लिखे जाने का आरोप
पत्र में कहा गया है कि स्वीफ्ट कार में बैठी महिला व पुरुष ड्राइवर द्वारा उतर कर मारपीट व गाली-गलौज की गयी। डा. विवेक को चोटें भी आयी, जिसके कारण इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर में भर्ती होना पड़ा है। दुःखद घटना से डा. विवेक व उनका परिवार भयभीत है। डा. विवेक की पत्नी डा. विजेता सिंह द्वारा घटना की एफआईआर दर्ज करने के लिए थानाध्यक्ष, आशियाना को तहरीर दी गयी, लेकिन अभीतक दर्ज नहीं हुयी है, जबकि दूसरे पक्ष की गलत धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गयी है।
डॉ संतोष कुमार ने पत्र में लिखा कि डॉक्टरों पर हमले जैसा यह कृत्य अत्यंत निंदनीय एवं सरकार की मंशा के विपरीत है, जिससे केजीएमयू के समस्त शिक्षक अत्यंत दुःखी एवं आक्रोशित हैं। पत्र में अनुरोध किया गया है कि डा. विवेक की पत्नी डा. विजेता सिंह द्वारा थानाध्यक्ष, आशियाना को दी गयी तहरीर पर तत्काल एफआईआर दर्ज करने एवं डा. विवेक के परिवार को सुरक्षा प्रदान करने के लिए सम्बंधित को प्रभावी निर्देश देने की कृपा करें, जिससे केजीएमयू में आनेवाले जरूरतमंद मरीजों का उपचार सुचारु रूप से चलता रहे।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने पुलिस की निष्पक्षता पर उठाये सवाल
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, लखनऊ, ने भी इस घटना पर आक्रोश जताते हुए अपर मुख्य सचिव गृह को पत्र लिखकर एफआईआर दर्ज करने और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की। पत्र में कहा गया कि डॉ. विवेक सिंह घटना के बाद घायल अवस्था में अपनी शिकायत दर्ज कराने पुलिस चौकी और तत्पश्चात थाना आशियाना पहुंचे, परंतु उनकी ओर से दी गई शिकायत पर तत्काल FIR दर्ज नहीं की गई। इसके विपरीत, दूसरे पक्ष की FIR रात में दर्ज कर ली गई। यह स्थिति पुलिस की निष्पक्षता और समान कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
आईएमए लखनऊ की ओर से अध्यक्ष और सचिव द्वारा लिखे गये पत्र में कहा गया है कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, लखनऊ शाखा इस घटना की कड़ी निंदा करती है। ड्यूटी पर कार्यरत चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। ऐसी घटनाएं चिकित्सक समुदाय में भय, असुरक्षा एवं आक्रोश का वातावरण उत्पन्न करती हैं, जिसका सीधा प्रभाव जनहित एवं चिकित्सा सेवाओं पर पड़ता है।
पत्र में मांग की गयी कि 1. डॉ. विजेता सिंह द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर उचित धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई जाए। 2. घटना में शामिल आरोपियों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच कर कठोर कानूनी कार्यवाही की जाए। 3. डॉ. विवेक कुमार सिंह एवं उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए। 4. चिकित्सक समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु संबंधित अधिकारियों को प्रभावी निर्देश दिए जाएं। पत्र में उम्मीद जतायी गयी कि इस गंभीर प्रकरण में शीघ्र एवं न्यायसंगत कार्यवाही की जाएगी, जिससे चिकित्सक समाज में विश्वास एवं सुरक्षा की भावना बनी रहे।
घटना से जुड़े साक्ष्यों को जांच में शामिल करने की मांग
IMA ने घटना से जुड़े सभी उपलब्ध साक्ष्य, जैसे CCTV footage, 112 कॉल रिकॉर्ड, मेडिकल रिपोर्ट, अस्पताल रिकॉर्ड और घटनास्थल के आसपास के प्रमाण सुरक्षित कर जांच में शामिल करने की मांग करते हुए कहा है कि दोनों पक्षों के तथ्यों की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए और किसी भी प्रकार के दबाव या प्रभाव से मुक्त कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
आईएमए का मानना है कि मामला केवल एक चिकित्सक का व्यक्तिगत विवाद नहीं है, बल्कि डॉक्टरों की सुरक्षा, सम्मान और न्याय से जुड़ा गंभीर विषय है। यदि एक वरिष्ठ चिकित्सक की शिकायत भी समय पर दर्ज नहीं होती, तो यह समाज और चिकित्सा समुदाय दोनों के लिए चिंताजनक संकेत है। डॉक्टरों की सुरक्षा और गरिमा से समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन डॉ. विवेक सिंह के साथ खड़ा है।

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