लखनऊ। राजधानी लखनऊ में प्रैक्टिस करने वाले आयुर्वेदिक, यूनानी व होम्योपैथी के चिकित्सकों का पंजीकरण अब मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में नहीं होगा। अब होम्योपैथिक चिकित्सकों को जिला होम्योपैथिक उच्च अधिकारी के कार्यालय तथा आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सकों को क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी के कार्यालय में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा, यह पंजीकरण 20 अप्रैल तक कराया जा सकता है।
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी डॉ शिव शंकर त्रिपाठी के अनुसार अभी तक करीब 100 चिकित्सकों ने ही पंजीकरण कराया है जबकि भारतीय चिकित्सा परिषद में शहर में 3500 चिकित्सक पंजीकृत हैं, इनमें क्लीनिक, नर्सिंग होम और प्राइवेट हॉस्पिटल के चिकित्सक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि नया नियम लागू हो चुका है इसके अनुसार ही पंजीकरण कराया जाना अनिवार्य है। कम पंजीकरण को लेकर उनका कहना था कि पंजीकरण के लिए 20 अप्रैल तक आवेदन किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि जल्दी ही इसकी जांच के लिए अभियान चलाया जायेगा तथा पंजीकरण न मिलने पर काररवाई की जायेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनेक चिकित्सक दूसरे शहरों में भी जाकर प्रैक्टिस करते हैं उनके लिए भी उन्हेें पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
