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जिस एसजीपीजीआई में जिन्दा रहकर की थी मरीजों की सेवा, वहीं पांच जरूरतमंदों को मरने के बाद दे गये जिन्दगी

-सेवानिवृत्त सहायक नर्सिंग अधीक्षक फनीश मणि त्रिपाठी सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद हो गये थे ब्रेनडेड

-अंगदान की सहमति के लिए संस्थान ने अपने सेवानिवृत्त कर्मचारी के परिवार के प्रति जताया आभार

–एसजीपीजीआई ने मृत अंगदान के इतिहास में देखा एक महत्वपूर्ण क्षण

सेहत टाइम्स

लखनऊ। एसजीपीजीआई SGPGI ने 29 मई 2026 को मृत अंगदान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण देखा। संस्थान के सेवानिवृत्त कर्मचारी (सहायक नर्सिंग अधीक्षक) फनीश मणि त्रिपाठी को एक सड़क दुर्घटना के बाद ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था। इस कठिन समय में, उनके परिवार ने अंगदान के लिए सहमति दी, जिससे दूसरों को नया जीवन मिला। संस्थान ने अपने सेवानिवृत्त कर्मचारी के परिवार के इस नेक और निःस्वार्थ निर्णय के लिए परिवार के प्रति हार्दिक आभार और गहरा सम्मान व्यक्त किया है।

संस्थान द्वारा यह जानकारी देते हुए बताया गया कि सभी टीमों के बीच घनिष्ठ समन्वय के माध्यम से 29 मई 2026 को उसी दिन अंग प्राप्त करने और उसी दिन प्रत्यारोपण करने का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया। डोनर से दो गुर्दे, Kidneys, एक लिवर Liver और दो कॉर्निया Corneas प्राप्त किए गए। गुर्दे और लिवर का प्रत्यारोपण उसी दिन एसजीपीजीआईएमएस में किया गया।

एसजीपीजीआईएमएस में पहली बार, मृत दाता से कॉर्निया प्राप्त करने का कार्य भी सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। उत्तर प्रदेश स्थित सोट्टो और लखनऊ स्थित केजीएमयू की टीम के समन्वय से कॉर्निया प्राप्त किए गए और उसी दिन केजीएमयू में प्रत्यारोपित किए गए। सोट्टो के संयुक्त निदेशक प्रोफेसर आर हर्षवर्धन और उनकी पूरी टीम ने इसके लिए रात भर काम किया।

सटीक कार्यकुशलता से कार्य करने वाली चिकित्सा टीमें

1. किडनी रिट्रीवल एवं ट्रांसप्लांट Kidney Retrieval and Transplant : प्रो. एम.एस. अंसारी, विभागाध्यक्ष, यूरोलॉजी एवं गुर्दा प्रत्यारोपण विभाग के नेतृत्व में डॉ. उदय पी. सिंह और डॉ. संचित रस्तोगी के साथ किया गया।

2. लिवर रिट्रीवल एवं ट्रांसप्लांट Liver Retrieval and Transplant: विभागाध्यक्ष प्रो. अनु बिहारी और प्रभारी प्रो. सुप्रिया शर्मा के नेतृत्व में लिवर प्रत्यारोपण इकाई द्वारा डॉ. यशवर्धन सिन्हा, डॉ. प्रदीप, डॉ. पायल, डॉ. दीपक और डॉ. अक्षत के साथ किया गया।

3. कॉर्निया रिट्रीवल: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ की विशेषज्ञ टीम द्वारा किया गया।

4. प्राथमिक प्रभारी चिकित्सक जिनके अधीन रोगी को भर्ती किया गया: डॉ. प्रतीक सिंह बैस, एनेस्थेसियोलॉजी।

ब्रेन डेथ प्रमाणन टीम के सदस्य: डॉ. कांति कुंतल दास, न्यूरोसर्जरी; और डॉ. हर्षित खरे, कार्डियोलॉजी।

5. उपचार दल: डॉ. प्रतीक सिंह बैस; डॉ. सुरुचि अम्बस्त,
नोडल अधिकारी,  एटीसी ट्रांसप्लांट कैडेवरिक समिति, जिन्होंने ब्रेन स्टेम डेड दाता के परामर्श और प्रबंधन में सक्रिय रूप से भाग लिया; डॉ. पवन कुमार वर्मा व रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. दीक्षा और डॉ. अनंत चैतन्य।

एसजीपीजीआई में ही विकसित कर रहे पूर्ण क्षमता

इस उल्लेखनीय सफलता पर एसजीपीजीआई के निदेशक प्रोफेसर राधा कृष्ण धीमन Director, Prof. Radha Krishna Dhiman ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य संस्थान के भीतर ही पूर्ण क्षमता का निर्माण करना है, ताकि एसजीपीजीआईएमएस में प्राप्त अंगों और ऊतकों का प्रत्यारोपण उसी दिन यहीं किया जा सके। उन्होंने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ Chief Minister Yogi Adityanath ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि राज्य के किसी भी मरीज को अंग और ऊतक प्रत्यारोपण सहित किसी भी प्रकार के उपचार के लिए उत्तर प्रदेश से बाहर न जाना पड़े, और एसजीपीजीआईएमएस इसके प्रति प्रतिबद्ध है।

उन्होंने यह भी कहा कि यह एडवांस क्वाटर्नरी हेल्थ केयर (उन्नत चतुर्थक स्वास्थ्य सेवाओं) की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहला कदम है, जिन्हें एसजीपीजीआईएमएस आने वाले वर्षों में विकसित करना चाहता है। प्रो धीमन ने उत्तर प्रदेश राज्य के भीतर उन्नत ट्रॉमा सेंटर/अंग प्रत्यारोपण केंद्रों के महत्व पर भी बल दिया।

निर्बाध समन्वय का परिणाम है यह उपलब्धि

यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर एम.एस. अंसारी ने कहा कि यह उपलब्धि यूरोलॉजी एवं गुर्दा प्रत्यारोपण, नेफ्रोलॉजी, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, न्यूरोलॉजी और एनेस्थीसिया विभागों के साथ-साथ अस्पताल प्रशासन और उत्तर प्रदेश के सोट्टो (SOTTO) के बीच निर्बाध समन्वय को दर्शाती है।

उन्होंने बताया कि दोनों गुर्दे एक ही दिन दो युवा रोगियों में प्रत्यारोपित किए गए, जो वर्षों से डायलिसिस मशीनों पर निर्भर थे। वेटलिस्ट के अनुसार दो मरीजों का चयन किया। यह पूरी प्रकिया प्रो नारायण प्रसाद, विभागाध्यक्ष, नेफ्रोलॉजी विभाग की देखरेख में संपन्न की गई। बहराइच के 32 वर्षीय पुरुष (2022 से डायलिसिस पर) और अमेठी की 31 वर्षीय महिला (2021 से डायलिसिस पर) में गुर्दा प्रत्यारोपित किया गया।

उन्होंने आगे कहा कि निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) राधा कृष्ण धीमन के नेतृत्व में इस पहल को काफी गति मिली है, जिनकी दूरदृष्टि और संस्थागत सहयोग ने मृत अंगदान कार्यक्रम को मजबूत और निरंतर बनाए रखने में मदद की है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मुख्य रूप से डोनर परिवारों की है, जिनके नेक और करुणापूर्ण निर्णय ने उनके व्यक्तिगत नुकसान को दूसरों के लिए आशा में बदल दिया और पूरे उत्तर प्रदेश में लोगों के जीवन को फिर से संवारने में मदद की।

अत्यंत भावुक क्षण

सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी Surgical Gastroenterology विभाग की प्रोफेसर डॉ. सुप्रिया शर्मा ने कहा कि एसजीपीजीआईएमएस में हाल ही में हुए अंगदान से संस्थान के लिए एक अत्यंत भावुक क्षण बना और यह मानवता और विश्वास का एक उल्लेखनीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि परिवार द्वारा अपने प्रियजन के अंगों को उसी संस्थान में दान करने का निर्णय, जहां उन्होंने सेवा की थी, एसजीपीजीआई में गहरी आस्था और निष्पक्ष एवं पारदर्शी रोगी सेवा के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने आगे कहा कि सफल अंग प्रत्यारोपण ने संस्थान की उन्नत चिकित्सा क्षमताओं को उजागर किया और यह डॉक्टरों, रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, प्रत्यारोपण समन्वयकों और दिन-रात काम करने वाली सहायक टीमों के अथक प्रयासों के कारण संभव हो पाया। उन्होंने कहा कि इस नेक कार्य के माध्यम से, दाता एसजीपीजीआईएमएस की जीवन रक्षक विरासत का एक अभिन्न अंग और कई रोगियों के लिए आशा का प्रतीक बन गया है।

कॉर्नियल ट्रांसप्लांट सेवाएं की जा रही हैं मजबूत

नेत्र विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रोफेसर विकास कनौजिया ने बताया कि एसजीपीजीआई अपनी कॉर्नियल ट्रांसप्लांट सेवाओं को सक्रिय रूप से मजबूत कर रहा है और मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम (एचओटीए) के तहत वैधानिक आवश्यकताओं की पूर्ति के अधीन, सितंबर 2026 तक अस्पताल आधारित कॉर्नियल रिट्रीवल और कॉर्नियल ट्रांसप्लांट सेवाएं शुरू करने की योजना बना रहा है। उन्होंने आगे बताया कि अगले चरण में, संस्थान आई बैंक एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मानदंडों के अनुसार एक समर्पित आई बैंक Dedicated Eye Bank स्थापित करने की भी योजना बना रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश के रोगियों के लिए ऊतक दान और दृष्टि बहाली सेवाओं को और मजबूती मिलेगी।