एम्बुलेंस सेवा में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए नये दिशानिर्देश

विभागीय अधिकारियों को अक्षरश: पालन करने के निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने 102 एवं 108 एम्बुलेंस सेवा को सुदृढ़ एवं पारदर्शी बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाते हुए इनके संचालन हेतु नए दिशा-निर्देश तय किए हैं। साथ ही विभागीय अधिकारियों को इस व्यवस्था का अक्षरश: अनुपालन सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

पीसीआर और डीबीआर का रखरखाव प्रभावी ढंग से करने की व्यवस्था

यह जानकारी प्रमुख सचिव, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, प्रशान्त त्रिवेदी ने आज 15 जून को यहां दी । उन्होंने बताया कि 102 एवं 108 एम्बुलेंस संचालन में काफी अनियमिततायें प्रकाश में आ रही थी। प्रदेश सरकार ने इसे गम्भीरता से लेते हुए इनके संचालन हेतु प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की है। इससे एम्बुलेंस सेवा के संचालन में पारदर्शिता आयेगी और जरूरतमंदों को भी समय से इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि एम्बुलेंस 102 एवं 108 से संबंधित पेशेण्ट केयर रिकार्ड (पी.सी.आर.) एवं ड्रॉप बैक किए जाने वाले सभी लाभार्थियों का ड्रॉप बैक रिकार्ड (डी.बी.आर.) के रख रखाव की भी प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

दोनों एम्बुलेंस सेवाओं के लिए अलग-अलग रजिस्टर रखने जरूरी

प्रमुख सचिव ने बताया कि 24 घण्टे प्रदेश की सभी चिकित्सा इकाइयों में एम्बुलेंस सेवा से लाये जाने वाले रोगियों को अटेंड करने हेतु न्यूनतम 3 अधिकारियों/कर्मियों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। अधिकारियों/कर्मचारियों की अधिकतम संख्या चिकित्सालय के आकार पर निर्भर होगी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक रिपोर्टिंग अधिकारी/कर्मचारी का उत्तरदायित्व होगा कि वे रोगी को रिसीव, डिस्चार्ज एवं ड्रॉप बैक करते समय पीसीआर/डीबीआर को हस्ताक्षरित करेंगे। साथ ही दोनों एम्बुलेंस सेवाओं के लिए अलग-अलग रजिस्टर भी रखने होंगे। इसके लिए आवश्यक प्रारूप भी निर्धारित कर दिये गये हंै। निर्धारित प्रारूप के अनुसार रजिस्टर तैयार कराये जाने का पूर्ण उत्तर दायित्व संबंधित चिकित्सा इकाई के प्रभारी को सौंपा गया है। अभिलेखों में दर्ज सूचना वास्तविकता से भिन्न पाये जाने पर दोषी के विरुद्ध सख्त दण्डात्मक कार्रवाई करने का भी प्राविधान किया गया है।

लाभार्थियों के लिए एक यूनिक केस आईडी अंकित किया जायेगा

श्री त्रिवेदी ने बताया कि चिकित्सालयों में ओपीडी रजिस्ट्रेशन, इण्डोर तथा इमरजेंसी रजिस्टर में एम्बुलेंस सेवा के लिए एक कॉलम अतिरिक्त जोड़ा जाएगा, जिसमें एम्बुलेंस से चिकित्सालय लाये गये मरीज का केस आईडी अंकित किया जाएगा। साथ ही एम्बुलेंस सेवाप्रदाता द्वारा लाभार्थियों के लिए एक यूनिक केस आईडी भी एलॉट किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पी.सी.आर. तथा डी.बी.आर को और अधिक सुदृढ़ एवं पारदर्शी बनाने के लिए रोगी तथा उनके परिजनों के पहचान पत्र के प्रकार एवं संख्या का अंकन सेवा प्रदाता द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा। एम्बुलेंस द्वारा ड्रॉपबैक किए जाने वाले रोगियों की पुष्टि भी आवश्यक रूप से करानी होगी। सेवा प्रदाता द्वारा पीसीआर एवं डीबीआर की एक प्रति चिकित्सालय को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।

सीएमओ के लिए प्रत्येक माह 10 तारीख तक सूचना देना अनिवार्य

प्रमुख सचिव ने बताया कि एम्बुलेंस स्टाफ द्वारा रोगी को स्थल पर ही उपचार उपलब्ध करा देने के पश्चात यदि अस्पताल ले जाने की आवश्यकता नहीं होती है तो रोगियों की सूचना सेवा प्रदाता द्वारा तत्काल संबंधित निकटवर्ती चिकित्सा इकाई पर देनी होगी। चिकित्सा इकाई के प्रभारी का दायित्व होगा कि वे इसके सत्यापन की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने बताया कि समस्त चिकित्सा इकाइयों द्वारा आगामी माह की 7 तारीख को निर्धारित प्रारूप में सूचनायें मुख्य चिकित्सा अधिकारी को अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी होगी। सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारी समस्त सूचनाओं को प्रत्येक माह की 10 तारीख को परिवार कल्याण महानिदेशालय में उपलब्ध कराएंगे। यदि निर्धारित तिथि तक सीएमओ द्वारा सूचना नहीं उपलब्ध कराई जाती है, तो उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही भी की जाएगी।