फॉसिल फ्यूल्स की जगह वैकल्पिक ईंधन के प्रयोग की सलाह

व्याख्यान देते पद्मश्री प्रो. डी बालासुब्रामनियन।

लखनऊ। कोशिकीय एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र (सीसीएमबी) के पूर्व निदेशक व प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एलवी प्रसाद नेत्र संस्थान, हैदराबाद पद्मश्री प्रो. डी बालासुब्रामनियन ने अपील की है कि हरित बनाने और पर्यावरण के संरक्षण के लिए वैकल्पिक ईंधन के संसाधनों का उपयोग करें।

विश्व पर्यावरण दिवस पर आईआईटीआर में व्याख्यान आयोजित

प्रो बालासुब्रामनियन 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर)में आयोजित पर्यावरण दिवस समारोह में व्याख्यान दे रहे थे। भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान में पर्यावरण दिवस समारोह मनाया गया इस अवसर पर भारत के वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एकत्र हुए। पर्यावरण दिवस समारोह में विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उल्लेखनीय यथार्थ मिश्रण दिखा। इस मौके पर संस्थान के निदेशक प्रोफ़ेसर आलोक धवन ने कहा कि पद्मश्री प्रोफेसर डी. बालासुब्रामनियन, और पद्मश्री डॉ. नित्यानंद, पूर्व निदेशक, सीएसआईआर-केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान(सीडीआरआई), लखनऊ की इस अवसर पर उपस्थिति,  मौलिक विज्ञान को मूर्त मानव लाभ में परिवर्तित करने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस अवसर पर सीएसआईआर-आईआईटीआर के अनेक पूर्व एवं वर्तमान वैज्ञानिक और कर्मचारी तथा शोध छात्र उपस्थित थे।

सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा और माइक्रोबियल ईंधन कोशिकाओं से बायोइलेक्ट्रीसिटी जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करें

प्रो डी. बालासुब्रामनियन ने इस अवसर  पर 21वां डॉ. सीआर कृष्णानमूर्ति व्याख्यान दिया। ग्लोबल वार्मिंग पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने जीवाश्म ईंधनों (फॉसिल फ्य़ूल्स) को त्यागने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि भावी विश्व स्वच्छ सुंदर हो और पर्यावरण को संजोए रखा जा सके । प्रो. बालासुब्रामनियन ने  कहा कि इस समय नितांत आवश्यक है कि सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा और माइक्रोबियल ईंधन कोशिकाओं से बायोइलेक्ट्रीसिटी जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करके पर्यावरण के अनुकूल रहा जाये।

स्कूलों में पर्यावरण विज्ञान पर नियमित पाठ्यक्रम रखना चाहिये : प्रो नित्यानंद

समारोह की अध्यक्षता सीडीआरआई के पूर्व निदेशक डॉ. नित्यानन्द ने की।  उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि पर्यावरण सबसे पवित्र वस्तु है, जिससे  जीवन का अस्तित्व सुविधाजनक बनता है और इसलिए इसे संरक्षित करने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूलों और कॉलेजों को पर्यावरण विज्ञान पर एक नियमित पाठ्यक्रम रखना चाहिए । उन्होंने सभी से  वातावरण को सुरक्षित बनाने के लिए कार्य करने हेतु प्रतिज्ञा करने के लिए भी अनुरोध किया।

रिपोर्ट पूर्व मानसून 2017 के दौरान लखनऊ शहर के परिवेश वायु गुणवत्ता का आंकलन रैंडम सर्वे के निष्कर्ष जारी करते डॉ डी. कार चौधरी, डॉ नित्यानंद, प्रोफेसर डी. बालासुब्रामनियन, प्रोफेसर आलोक धवन, डॉ डी परमार और ई एएच खान।

इस अवसर पर संस्थान के पर्यावरण निगरानी विभाग द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट, प्री मानसून, 2017 के दौरान लखनऊ शहर के परिवेश वायु गुणवत्ता का आंकलन, इस अवसर पर जारी की गई। इस रिपोर्ट का विवरण संस्थान की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
इसी क्रम में दो आयु समूहों में स्कूल के छात्रों के लिए एक पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई,  जिसके विजयी प्रतिभागियों को  इस अवसर पर पुरस्कारों का वितरण किया गया। अंत में ई ए एच. खान, प्रधान  वैज्ञानिक, सीएसआईआर-आईआईटीआर एवं  समारोह के संयोजक के धन्यवाद ज्ञापन के  साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।