-जिंदगी का एक तिहाई हिस्सा होता है नींद का, लेकिन अनदेखी कर रहे लोग : डॉ वेद प्रकाश

सेहत टाइम्स
लखनऊ। जिंदगी का एक तिहाई हिस्सा नींद का होता है लेकिन आज लोग इसे अनदेखा कर रहे हैं। दुनिया भर में लगभग 93 करोड़ लोग तथा भारत में करीब 15 से 20 करोड़ तक लोग पर्याप्त नींद न लेने से प्रभावित हैं। जब रात में नींद क्वालिटी की नहीं आएगी तो दिन में नींद आएगी, ताजगी नहीं महसूस होगी, याददाश्त कमजोर होगी, सेक्सुअल एक्टिविटीज प्रभावित होगी, शरीर में ऊर्जा जैसी मिलनी चाहिए नहीं मिलेगी। पर्याप्त नींद से शरीर को रिचार्ज होने और रिपेयरिंग करने का मौका मिल जाता है, ब्रेन भी अपने आप को अगले दिन के लिए तैयार कर लेता है।
विश्व निद्रा दिवस पर पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ वेद प्रकाश ने यह जानकारी देते हुए बताया कि स्लीपिंग डिसऑर्डर से ग्रस्त लोग कहीं भी सोने लगते हैं, अखबार पढ़ रहे हैं, गाड़ी में बैठ कर जा रहे हैं, टीवी देख रहे हैं, बड़ी मीटिंग चल रही है, जैसी स्थितियों में भी कुछ लोग सोने लगते हैं और खर्राटे की आवाज आने लगती है तो हम लोग कई बार उनकी हंसी बनाते हैं लेकिन न हम उनकी बीमारी को नहीं समझ पाते हैं ना ही वे समझ पाते हैं, यह जागरूकता की कमी है. डॉ वेद ने कहा कि इसका नतीजा यह है कि समस्याएं तब सामने आती हैं जब कोई न कोई बड़ा कॉम्प्लिकेशन हो जाता है कभी हार्ट अटैक हो रहे हैं, साइलेंट हार्ट अटैक हो रहे हैं, जिनको हाई ब्लड प्रेशर, शुगर की बीमारी, कोलेस्ट्रॉल की समस्याएं, मेमोरी लॉस, शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस या व्यवहार में परिवर्तन, चिड़चिड़ापनजैसी समस्याएं होने लगती हैं।
उन्होंने कहा कि सोते समय जिस तरह से मोबाइल का उपयोग हो रहा है यह गलत है। उन्होंने बताया कि रौशनी और आवाज नींद में बाधक हैं, जबकि मोबाइल में लाइट भी है, और साउंड भी है। उन्होंने कहा कि हम लोग यह सलाह देते हैं कि आप लाइट, साउंड सबको ऑफ करके ही लेटिये।

