Tuesday , July 7 2026

आरएमएलआई में लगीं अत्याधुनिक मशीनें अब न्यूरो और हड्डी के रोगियों को देंगी बड़ा आराम

-नेशनल फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन डे पर रिहैबिलिटेशन और इंटरवेंशनल सुविधाओं की शुरुआत

-निदेशक ने कहा, अब एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वाली विश्व-स्तरीय एविडेंस-बेस्ड रिहैबिलिटेशन सेवाएँ दे सकेंगे

सेहत टाइम्स

लखनऊ। नेशनल फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन डे (पीएमआर डे) 2026 के मौके पर, डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (DrRMLIMS), लखनऊ के फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (PMR) विभाग में मरीज़ों की देखभाल के लिए कई अत्याधुनिक रिहैबिलिटेशन और इंटरवेंशनल सुविधाओं की शुरुआत हुई। इन सुविधाओं में रिपीटिटिव ट्रांसक्रानियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (rTMS), वर्चुअल रियलिटी (VR)-आधारित रिहैबिलिटेशन, हाई-रिज़ॉल्यूशन मस्कुलोस्केलेटल अल्ट्रासाउंड (MSK-USG), और इंटरवेंशनल फिजियेट्री और पेन मैनेजमेंट के लिए रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) शामिल हैं।

फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (PMR) विभाग द्वारा इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल (IQAC-NAAC) के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में इन सुविधाओं की शुरुआत संस्थान के निदेशक प्रो सीएम सिंह ने की। कार्यक्रम में दिव्यांग लोगों और बीमारी या चोट से उबर रहे लोगों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में रिहैबिलिटेशन मेडिसिन की बढ़ती भूमिका पर ज़ोर दिया गया। पीएमआर डे 2026 की इस साल का थीम है “सभी के लिए रिहैबिलिटेशन, जीवन भर के लिए रिकवरी।”

रिहैबिलिटेशन आधुनिक हेल्थकेयर का एक अहम हिस्सा : प्रो सीएम सिंह

प्रो. सीएम सिंह ने कहा कि रिहैबिलिटेशन आधुनिक हेल्थकेयर का एक अहम हिस्सा है और यह मरीज़ों की कार्यक्षमता, आज़ादी और सम्मान को बहाल करने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने ज़ोर दिया कि इन एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज़ के आने से विभाग और संस्थान विश्व-स्तरीय, एविडेंस-बेस्ड रिहैबिलिटेशन सेवाएँ दे पाएँगे और मरीज़ों की व्यापक देखभाल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मज़बूत कर पाएँगे। उन्होंने कहा कि नई शुरू की गई सुविधाओं से स्ट्रोक, रीढ़ की हड्डी की चोट, दिमाग की गंभीर चोट (ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी), पार्किंसंस रोग, सेरेब्रल पाल्सी, मस्कुलोस्केलेटल विकारों, स्पोर्ट्स इंजरी, पुराने दर्द की स्थितियों और अन्य न्यूरोलॉजिकल और ऑर्थोपेडिक दिव्यांगताओं वाले मरीज़ों के इलाज में काफी सुधार होने की उम्मीद है। ये एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज़ ज़्यादा सटीक डायग्नोसिस, टारगेटेड इंटरवेंशन, तेज़ी से रिकवरी और बेहतर फंक्शनल नतीजों में मदद करेंगी।

प्रो. सिंह ने शहीद पथ कैंपस में 1000 बिस्तरों की सुविधा के लिए हो रही प्रगति की भी जानकारी दी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शहीद पथ कैंपस में सुविधा शुरू होने के बाद और जगह की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने अपनी बात इन शब्दों के साथ खत्म की, “PMR दिव्यांग लोगों को आज़ादी, सम्मान और एक गरिमापूर्ण व संतोषजनक जीवन जीने में सक्षम बनाता है।”

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कैसे राहत पहुंचायेंगी नयी मशीनें

आपको बता दें कि (1) रिपीटिटिव ट्रांसक्रानियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन का उपयोग गंभीर अवसाद (डिप्रेशन) और ओसीडी (OCD) जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इसमें मस्तिष्क के मनोदशा-नियंत्रक हिस्सों को विद्युत-चुंबकीय तरंगों द्वारा उत्तेजित किया जाता है। (2) वर्चुअल रियलिटी (VR)-आधारित रिहैबिलिटेशन एक अत्याधुनिक तकनीक है जो 3D कंप्यूटर-निर्मित वातावरण का उपयोग करके शारीरिक और मानसिक चिकित्सा को अधिक प्रभावी बनाती है। वीआर हेडसेट पहनकर मरीज ऐसे इंटरैक्टिव गेम्स और अभ्यासों में भाग लेते हैं जो वास्तविक जीवन की गतिविधियों का अनुकरण करते हैं। (3) हाई-रिज़ॉल्यूशन मस्कुलोस्केलेटल अल्ट्रासाउंड (MSK-USG)  एक उन्नत तकनीक है जो ध्वनि तरंगों का उपयोग करके मांसपेशियों, टेंडन, लिगामेंट्स, नसों और जोड़ों की स्पष्ट और वास्तविक समय (real-time) तस्वीरें प्रदान करती है। यह सुरक्षित, दर्द-रहित और विकिरण-मुक्त (radiation-free) है तथा (4) रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) एक न्यूनतम इनवेसिव (चीर-फाड़ मुक्त) प्रक्रिया है जो पुराने दर्द के प्रबंधन के लिए रेडियो तरंगों से उत्पन्न गर्मी का उपयोग करती है। यह दर्द पैदा करने वाली नसों को निष्क्रिय करके मस्तिष्क तक दर्द के सिग्नल को रोकती है, जिससे मरीजों को लंबे समय तक राहत मिलती है।

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रिहैबिलिटेशन मेडिसिन सिर्फ बीमारी के इलाज तक सीमित नहीं

सभा को संबोधित करते हुए, PMR विभाग के प्रमुख प्रो. विरिंदर सिंह गोगिया ने बताया कि रिहैबिलिटेशन मेडिसिन (पुनर्वास चिकित्सा) केवल बीमारी के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की कार्यक्षमता, आत्मनिर्भरता, भागीदारी और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि नियमित पुनर्वास प्रक्रिया में rTMS और वर्चुअल रियलिटी जैसी आधुनिक तकनीकों को शामिल करना, इस क्षेत्र में बेहतर और व्यापक पुनर्वास सेवाएँ प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

जागरूकता गतिविधियाँ भी आयोजित

इस कार्यक्रम में फैकल्टी सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर, फिजियोथेरेपिस्ट, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, स्पीच और लैंग्वेज थेरेपिस्ट, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नर्सिंग स्टाफ, मेडिकल सोशल वर्कर, छात्र और अन्य हेल्थकेयर कार्मिक शामिल हुए। PMR विभाग के मरीज़ों और उनकी देखभाल करने वालों ने भी इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया। विकलांगता की रोकथाम, शुरुआती पुनर्वास, सहायक तकनीकों और समावेशी स्वास्थ्य सेवा पर ज़ोर देने वाली जागरूकता गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं। PMR विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और नेशनल PMR डे 2026 के आयोजन समन्वयक डॉ. यश वीर सिंह ने सहयोग के लिए निदेशक, गणमान्य व्यक्तियों, फैकल्टी सदस्यों, कर्मचारियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विभाग के उस विज़न को दोहराया जिसमें उन्नत पुनर्वास सेवाओं का विस्तार करना और हेल्थकेयर पेशेवरों व आम जनता के बीच पुनर्वास चिकित्सा के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना शामिल है।