Saturday , March 14 2026

 

प्रेस विज्ञप्ति

 

माइग्रेन में जब दवाएं हुईं बेअसर, तब बोटुलिनम टॉक्सिन थेरेपी रही कारगर

When medications proved ineffective for migraines, Botulinum toxin therapy proved effective.

 

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-एसजीपीजीआई के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग में आयोजित दो दिवसीय SPARC 2026 का पहला दिन

सेहत टाइम्स

 

लखनऊ | संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGIMS), लखनऊ में एनेस्थीसियोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय SPARC 2026 (SGPGI पेन रिफ्रेशर कोर्स) की आज शनिवार 14 मार्च को शुरुआत हुई। इस कोर्स का विषय “सिर एवं गर्दन के दर्द : निदान और प्रबंधन” है।

 

कार्यक्रम की शुरुआत एनेस्थीसियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजय धीरज के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने क्रॉनिक दर्द से संबंधित बीमारियों के बढ़ते बोझ पर प्रकाश डालते हुए इनके प्रभावी प्रबंधन में इंटरवेंशनल पेन मैनेजमेंट की भूमिका पर जोर दिया।

 

वैज्ञानिक सत्रों में सिरदर्द, सर्वाइकोजेनिक सिरदर्द, चेहरे का दर्द, माइग्रेन, गर्दन का दर्द तथा ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया जैसे विषयों पर चर्चा की गई। इस दौरान डॉ. सुजीत गौतम, डॉ. चेतना शमशेरी और डॉ. संदीप खुबा (SGPGIMS लखनऊ), डॉ. अजीत कुमार (AIIMS ऋषिकेश), डॉ. सरिता सिंह (KGMU लखनऊ), डॉ. शिवानी रस्तोगी (RMLIMS लखनऊ), डॉ. रवि शंकर शर्मा (AIIMS गोरखपुर), डॉ. राखी गुप्ता (HIMS लखनऊ) तथा डॉ. विनीता गोपाल (तिरुवनंतपुरम) सहित विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए।

 

इस अवसर पर एसजीपीजीआई के डॉ. अभिषेक राज सिंह द्वारा क्रॉनिक माइग्रेन में बोटुलिनम टॉक्सिन थेरेपी पर एक केस चर्चा भी प्रस्तुत की गई। उन्होंने बताया कि जब दवाओं से सिर दर्द में फायदा ना हो और महीने में करीब 15 दिनों तक दर्द बना रहे तो ऐसी स्थिति में इस थेरेपी का उपयोग कर मरीज को दर्द से राहत दिलाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि इस थेरेपी में दिमाग की मांसपेशियों में इंजेक्शन लगाकर उन्हें शांत किया जाता है, जिससे दर्द में राहत मिलती है। उन्होंने बताया कि इसके लिए मरीज को सुबह से शाम तक अस्पताल में रखा जाता है तथा बाद में घर वापस भेज दिया जाता है।

 

डॉ अभिषेक ने एक 21 वर्षीय युवती का केस प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले 8-10 सालों से कई-कई दवाएं खाने के बाद भी माइग्रेन के दर्द से राहत नहीं मिल रही थी। उसका उपचार इसी थेरेपी से किया गया, जिससे उसे लाभ हुआ है।

 

कार्यक्रम का समापन “हाउ आई डू इट” शीर्षक से आयोजित इंटरैक्टिव सत्र के साथ हुआ, जिसका संचालन प्रो. अनिल अग्रवाल ने किया। इस सत्र में विशेषज्ञों ने विभिन्न इंटरवेंशनल पेन प्रक्रियाओं के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की।

 

कोर्स का दूसरा दिन कल आयोजित होगा, जिसमें उन्नत इंटरवेंशनल पेन प्रक्रियाओं के लाइव डेमोंस्ट्रेशन किए जाएंगे।