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हार्ट फेल्योर, कैंसर, फायब्रॉयड, गंभीर मानसिक रोगों के होम्योपैथिक उपचार को साक्ष्य सहित किया पेश

-सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी में आयोजित पांचवें होम्यो सेमिनार में जुटे होम्योपैथिक फिजी​शियंस

-सीसीआरएच के डीजी की मौजूदगी में आयोजित सेमिनार में डॉ गिरीश गुप्ता भी रहे आमंत्रित

सेहत टाइम्स

लखनऊ/राजकोट। गुजरात के राजकोट में सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी और हेल्थ केयर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में 6 मार्च को पांचवें होम्यो सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया। सेमिनार के मुख्य अतिथि सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ उत्पल जोशी ने सेमिनार का औपचारिक उद्घाटन किया। अटल बिहारी वाजपेयी ऑडीटोरियम में सम्पन्न इस सेमिनार में देशभर से आये चिकित्सकों के साथ ही बड़ी संख्या में मेडिकल स्टूडेंट्स सहित करीब 900 लोगों ने हिस्सा लिया। सेमिनार की खास बात यह रही कि हार्ट फेल्योर, कैंसर, फायब्रॉयड, गंभीर मानसिक रोग पर किये गये सफल शोधों को साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत किया गया।

सेमिनार के आयोजन अध्यक्ष डॉ कल्पित सांघवी के अनुसार इस सेमिनार में जिन विषयों पर आधारित चर्चा और व्याख्यान हुए उनमें रोज़ाना की होम्योपैथिक प्रैक्टिस में रिसर्च, क्लिनिकल डेटा कलेक्शन का महत्व, प्रैक्टिस आधारित साक्ष्य बनाम साक्ष्य आधारित प्रैक्टिस, होम्योपैथिक रिसर्च को मज़बूत करने में प्रैक्टिशनर की भूमिका विषय शामिल रहे। इसके अलावा वक्ताओं ने आउटकम असेसमेंट और फॉलो-अप डॉक्यूमेंटेशन, रिसर्च सिद्धांतों के सपोर्ट वाली क्लिनिकल सक्सेस स्टोरीज़ भी बतायीं। सेमिनार में एक सत्र में होम्योपैथिक सिद्धांतों की सीमाएं, मॉडर्न कॉन्टेक्स्ट में ऑर्गनॉन सिद्धांतों को फिर से समझना, आज के मरीज़ों में इंडिविजुअलाइजेशन, ससेप्टिबिलिटी और वाइटैलिटी, क्लासिकल होम्योपैथी को मॉडर्न डायग्नोस्टिक्स के साथ इंटीग्रेट करने जैसे विषयों पर भी प्रस्तुतिकरण हुए।

एक अन्य सत्र में लाइफस्टाइल डिसऑर्डर और क्रोनिक बीमारियों में होम्योपैथी, प्रिवेंटिव, प्रमोटिंग और होलिस्टिक हेल्थ अप्रोच, प्रैक्टिस में लीगल, एथिकल और प्रोफेशनल चैलेंजेस के साथ ही फ्यूचर को शेप देने में नौजवान होम्योपैथिक चिकित्सकों की भूमिका पर चर्चा हुई।

सेमिनार में लखनऊ के गौरांग क्लीनिक एंड सेंटर फॉर होम्योपैथिक रिसर्च के चीफ कन्सल्टेंट डॉ गिरीश गुप्ता ने फायब्रॉयड पर साक्ष्य आधारित उपचार पर अपनी रिसर्च के बारे में प्रस्तुति दी। सेमिनार में डॉ गिरीश गुप्ता के डॉक्यूमेंटेशन कार्य की भी मुक्तकंठ से प्रशंसा की गयी। डॉ फारुख मास्टर ने ओवेरियन कैंसर के सफल उपचार पर अपना व्याख्यान दिया। मॉर्डर्न मेडिसिन में कार्डियोलॉजी से एमडी करने के बाद होम्योपैथिक चिकित्सा क्षेत्र में शामिल होकर अब सिर्फ होम्योपैथी की प्रैक्टिस करने वाले डॉ आदिल चिम्थनवाला ने हार्ट फेल्योर के मरीजों पर किये गये अपने सफल शोध को प्रस्तुत किया, सेमिनार में डॉ मनोज पटेल ने गंभीर मनोरोगों के होम्योपैथिक उपचार पर अपनी प्रस्तुति देते हुए वीडियो के माध्यम से दिखाया कि एक महिला जो बहुत ही आक्रामक हो जाती थी, उसे दवाओं से किस प्रकार सामान्य किया गया।

सेमिनार में नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी (एनसीएच) के चेयरमैन डॉ तारकेश्वर जैन ने विजन 2030 होम्योपैथी, सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन होम्योपैथी (सीसीआरएच) के महानिदेशक डॉ सुभाष कौशिक ने साक्ष्य आधारित उपचार के प्रभाव, एचईबी एनसीएच के प्रेसीडेंट डॉ रजत चटोपाध्याय ने शिक्षा, प्रैक्टिस एवं शोध के एकीकरण पर अपना सम्बोधन दिया। इसके अतिरिक्त एनसीएच के पूर्व प्रेसीडेंट डॉ अनिल खुराना तथा बीईआरएच के पूर्व प्रेसीडेंट डॉ पिनाकिन त्रिवेदी ने भी सेमिनार में सक्रिय भागीदारी निभायी।