आखिर किसने और क्यों रची थी किडनी चोरी का झूठा आरोप लगाने की साजिश?

त्रकार वार्ता में डॉ संदीप तिवारी और डॉ आनंद मिश्र के साथ मौजूद सीएमएस डॉ एसएन संखवार, मीडिया सेल के मेडिसिन फैकल्टी प्रभारी डॉ नरसिंह वर्मा, सर्जरी विभाग के डॉ समीर मिश्र।

चिकित्सकों ने कहा, सरकार को करनी चाहिये साजिश की जांच

लखनऊ। मंत्री द्वारा क्लीन चिट दिये जाने के बाद बाराबंकी के एक युवक की किडनी चोरी के आरोप का दंश झेल रहे किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्व विद्यालय के दो शिक्षकों ने झूठे आरोप लगाने के पीछे का सच जानने के लिए सरकार से जांच की मांग की है। चिकित्सकद्वय का कहना है कि आखिर ये कैसा रैकेट चल रहा है कि ढाई साल बाद कोई युवक किडनी चोरी का आरोप लगाये और बिना जांच किये सीधे एफआईआर दर्ज हो जाये, जबकि सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था के अनुसार डिग्रीधारी चिकित्सक के खिलाफ शिकायत आने पर मेडिकल बोर्ड की जांच के पश्चात ही प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिये। उन्होंने कहा कि इसके पीछे कोई गहरी साजिश प्रतीत हो रही है।

हमने और हमारे परिवार ने जो जलालत झेली उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल

सर्जन प्रो.संदीप तिवारी और प्रो.आनंद मिश्र ने कहा है कि चिकित्सा शिक्षा मंत्री द्वारा किडनी चोरी की जांच रिपोर्ट में मरीज के शरीर में किडनी मौजूद होने का बयान समाचार पत्र में देखकर काफी दिनों बाद तनाव से राहत मिली है लेकिन इतने दिनों तक हमने और हमारे परिवार ने जो जलालत झेली है उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकते हैं।

बाराबंकी के युवक ने लगाया था किडनी निकालकर बेचने का आरोप

ज्ञात हो केजीएमयू के दो शिक्षकों पर ढाई साल पूर्व 19 फरवरी, 2015 को ट्रॉमा सेंटर में किये गये ऑपरेशन के दौरान बाराबंकी के युवक की किडनी निकाल कर बेचने का आरोप लगाते हुए पिछले दिनों बाराबंकी में एफआईआर दर्ज करवायी गयी थी। चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने मामले का संज्ञान लेते हुए संजय गांधी पीजीआई के गुर्दा रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आरके शर्मा की अध्यक्षता में एक जांच समिति का गठन कर मामले की सत्यता का पता लगाने के आदेश दिये थे।

कमेटी की जांच में किडनी मौजूद दिखी

बताया जाता है कि इस समिति ने जांच पड़ताल करते हुए मरीज की जांच करायी तो उसके शरीर में किडनी मौजूद दिखी हालांकि उसका आकार छोटा हो गया है। माना यह जा रहा है कि बाराबंकी में कम क्षमता वाली मशीन से पूर्व में जांच होने के कारण किडनी नहीं दिखी होगी जबकि कमेटी द्वारा मरीज की जांच में उच्च क्षमता वाली मशीन का उपयोग किया गया तो सच्चाई सामने आयी कि मरीज की किडनी सूख गयी है, लेकिन मौजूद है। इस आशय का बयान गुरुवार को चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने दिया था।

पत्रकारों के सामने दोनों चिकित्सकों ने खोले दिल के पन्ने

किडनी चोरी का आरोप लगने के बाद आज 2 जून को केजीएमयू में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में दोनों चिकित्सा शिक्षक प्रो.संदीप तिवारी और प्रो. आनंद मिश्र ने अपने दिल के पन्ने खोले। उन्होंने कहा कि जिस मरीज ने हम पर आरोप लगाया था उस मरीज के पेट में चारों तरफ मल और आंतों का गंदा पानी भरा हुआ था तथा आंत का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह से कटा-फटा था साथ ही आंत के बीच का हिस्सा भी फटा हुआ था। हम लोगों ने अथक परिश्रम करके उसकी जान बचायी थी, वरना इस तरह के केस में जान बचनी मुश्किल होती है। हम लोगों ने अपना फर्ज निभाया लेकिन बदले में जो उस युवक ने आरोप लगाये उससे दुख पहुंचा। उन्होंने कहा कि ताज्जुब इस बात का है कि अगर मरीज को संदेह हुआ था कि उसकी किडनी निकाली गयी है तो उसे कम से कम से कम इसकी शिकायत यहां संस्थान में या हम लोगों से तो करनी चाहिये थी। हम यहां उसकी पुन: सीटी स्कैन कराते तो अपने आप ही स्पष्ट हो जाता।
इस आरोप पर कि बिना सीटी स्कैन किये सर्जरी क्यों की गयी, चिकित्सकों ने कहा कि ट्रॉमा सेंटर में कई बार मरीज ऐसी नाजुक हालत में आता है कि उसे तुरंत उपचार देना आवश्यक होता है अन्यथा जान को खतरा हो सकता है। ऐसी स्थिति में जांच में समय बचाते हुए आकलन करके ही उपचार शुरू करना पड़ता है।

क्रॉस एफआईआर का निर्णय केजीएमयू पर निर्भर

यह पूछे जाने पर कि आप लोगों के खिलाफ साजिश रचने वालों को बेनकाब करने के लिए आप लोग क्रॉस एफआईआर दर्ज करायेंगे। इसका जवाब देते हुए प्रो.संदीप ने कहा कि यह साजिश हम लोगों पर व्यक्तिगत ही नहीं है बल्कि केजीएमयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की प्रतिष्ठा पर भी हमला है, ऐसे में आगे की कार्रवाई का फैसला केजीएमयू प्रशासन करेगा कि क्या करना है।

अब डॉक्टर पहले अपनी, फिर मरीज की जान बचा रहा

पत्रकार वार्ता में उपस्थित डॉ समीर मिश्रा ने कानूनी बिंदु को बताते हुए कहा कि आखिर किस दबाव में आकर बिना मेडिकल बोर्ड की जांच के ही सीधे एफआईआर दर्ज कर दी गयी। उन्होंने कहा कि इस तरह के कृत्यों से मरीज और चिकित्सक के बीच का रिश्ता प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद से इमरजेंसी में अगर कोई भी ऑपरेशन होता है तो रेजीडेन्ट डॉक्टर पहले सवाल करते हैं कि सर इसका ऑपरेशन करने से पहले बाद के आरोपों से बचने के लिए जांचें करा लें क्या। पता नहीं कल फिर कोई मरीज अंग चोरी का आरोप लगा दे। उन्होंने कहा कि यह स्थिति भयावह है क्योंकि जब मरीज को तुरंत उपचार की जरूरत होती है तो डॉक्टर पहले अपने को भविष्य के आरोपों से सुरक्षित करता है बाद में मरीज का उपचार करता है। उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बात की है इस तरह की घिनौनी हरकत कर उल्टे-सीधे आरोप लगाने की साजिश करने वालों को बेनकाब किया जाये ताकि चिकित्सक और मरीज के बीच विश्वास का रिश्ता कायम रहे। पत्रकार वार्ता में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सीएमएस डॉ एसएन संखवार, अधीक्षक डॉ विजय कुमार, मीडिया सेल के मेडिसिन फैकल्टी प्रभारी डॉ नरसिंह वर्मा, सर्जरी विभाग के डॉ समीर मिश्र भी उपस्थित थे।