दुबली-पतली गर्भवती महिला को निकले डायबिटीज तो दें विशेष ध्यान

लखनऊ। यहां आयोजित 12वीं नेशनल कॉन्फ्रेेंस ऑफ डायबिटीज इन प्रेगनेंसी स्टडी ग्रुप ने तीन दिनों तक नयी-नयी स्टडी का आदान-प्रदान करते हुए गर्भावस्था में डायबिटीज विषय पर मंथन किया। इस कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन गर्भावस्था में डायबिटीज होने पर इंसुलिन देने की शुरुआत कैसे करें तथा कौन सी दवाएं दी जा सकती हैं जो सुरक्षित हैं इस पर चर्चा हुई। इस बात पर भी चर्चा हुई कि पतली महिला को गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज का पता चलने पर उसका विशेष प्रकार से इलाज आवश्यक है।

12वीं नेशनल कॉन्फ्रेेंस ऑफ डायबिटीज इन प्रेगनेंसी स्टडी ग्रुप सम्पन्न

यह जानकारी कॉन्फ्रेंस के सचिव प्रो अनुज माहेश्वरी ने दी। उन्होंने बताया कि आज की चर्चा में बताया गया कि जैसा कि आमतौर पर माना जाता है कि डायबिटीज मोटे लोगों को ही होती है तो ऐसा नहीं है कुछ पतली महिलाओं में भी गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज पायी गयी, ये वे महिलाएं होती हैं जिनके परिवार में कभी किसी को डायबिटीज रही हो यानी कि आनुवांशिकता के चलते पतली महिलाओं को भी डायबिटीज होने का खतरा रहता है। अगर ऐसा हो कि पतली महिला को डायबिटीज निकल आये तो फिर उन बीमारियों, जिनमें अनुवांशिकता का प्रभाव रहता है, के बारे में जरूर ध्यान देना चाहिये। इसके बारे में भी आज चर्चा हुई।

एकदम से गिर जाता है शुगर का लेवल

क्वीनमेरी हॉस्पिटल की हेड डॉ विनीता दास से बताया कि पतली महिला को गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज हो जाने पर उसके इलाज में विशेष सावधानी बरतनी जरूरी होती है क्योंकि इंसुलिन देते समय इनकी शुगर का लेवल एकदम से नीचे गिर जाता है।  इनका इलाज अलग तरीके से चलता है।

दिन भर के खाने को छह भागों में बांट दें

सीजीएचएस के चिकित्सक व कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता डॉ निरुपम प्रकाश ने बताया कि आज की चर्चा में यह भी बताया कि इंसुलिन कब शुरुआत की जाय, किस तरह से शुरू करें तथा इस बारे में मरीज को क्या जानकारी दी जाये। उन्होंने बताया कि मरीज को यह बताना जरूरी है कि खाना आपको एकदम से कम नहीं करना है क्योंकि सामान्यत: लोगों में यह धारणा होती है कि डायबिटीज हो गयी है खाना कम खायें लेकिन ऐसे में यह आवश्यक है कि जहां महिला की डायबिटीज कंट्रोल में रखना जरूरी है वहीं यह भी आवश्यक है कि उसका खानपान किसी भी प्रकार से कम न हो, हां इतना अवश्य है कि खानपान का समय अवश्य निर्धारित कर लेना चाहिये। इसमें गर्भवती महिला को प्रत्येक तीन-चार घंटे के अंतराल पर अपने नाश्ते और भोजन का निर्धारण करना चाहिये। यानी उस महिला के लिए एक दिन में जितनी कैलोरी का खाना उपयुक्त हो उसे छह भाग में बांट लें। इस प्रकार अगर आठ घंटे सोने के निकाल दिये जायें तो 16 घंटों में तीन-चार घंटे के अंतराल में नाश्ता और खाना लें। उन्होंने बताया कि हरी सब्जी का सेवन बहुत अच्छा रहता है।