-जीसीसीएचआर में की गयी स्टडीज प्रकाशित हुई हैं प्रतिष्ठित जर्नल में : डॉ गिरीश गुप्ता

सेहत टाइम्स
लखनऊ। विश्व हेपेटाइटिस दिवस हर साल 28 जुलाई को वायरल हेपेटाइटिस के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लिवर में सूजन के चलते होने वाले इस रोग से 2024 में 287 मिलियन लोग क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी या सी से पीड़ित थे। 2024 में केवल 45% शिशुओं को ही जन्म के 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस बी का टीका लगाया गया था। 2024 में क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी और सी से 13 लाख लोगों की मौत हुई। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि वायरल हेपेटाइटिस विश्व भर में रोकी जा सकने वाली बीमारियों और मौतों का एक प्रमुख कारण बना हुआ है। उसका कहना है कि कलंक, सीमित जागरूकता, स्वास्थ्य प्रणाली की कमियों और लगातार असमानताओं के कारण लाखों लोग या तो निदान से वंचित हैं, उपचार नहीं करवा पा रहे हैं या स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच नहीं पा रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस चिन्ता को होम्योपैथिक उपचार से कैसे दूर किया जा सकता है, इसको लेकर ‘सेहत टाइम्स’ ने गौरांग क्लीनिक एंड सेंटर फॉर होम्योपैथिक रिसर्च (जीसीसीएचआर) लखनऊ के चीफ कन्सल्टेंट डॉ गिरीश गुप्ता के साथ विशेष वार्ता की, जिसमें उन्होंने कहा कि होम्योपैथी में हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी दोनों ही हेपेटाइटिस का सफल उपचार है, उन्होंने अपने रिसर्च सेंटर पर ही स्टडी की है, जो प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि किसी एक विशेष दवा से सभी रोगियों को लाभ हो जाये ऐसा आवश्यक नहीं है। होम्योपैथी के जनक डॉ सैमुअल हैनिमैन के सिद्धांत में कहा गया है कि इलाज के लिए औषधि का चुनाव प्रत्येक रोगी के अनुसार उसकी पसंद-नापसंद, उनके स्वभाव, उनकी मन:स्थिति को ध्यान में रखते हुए करना चाहिये।

हेपेटाइटिस बी
डॉ गिरीश गुप्ता ने बताया कि इसी सिद्धांत पर चलते हुए हमारे रिसर्च सेंटर जीसीसीएचआर पर हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी के मरीजों के किये गये उपचार पर स्टडीज की गयी हैं। उन्होंने बताया कि पैथोलॉजिकल जांच में हेपेटाइटिस बी के पॉजिटिव पाये गये 18 केसेज की स्टडी में सफलता की दर 78 प्रतिशत पायी गयी। इन 18 केसेज में नौ लोगों में वायरस निगेटिव हो गया, पांच केसों में वायरल लोड कम हुआ, जबकि चार रोगियों को दवाओं से लाभ नहीं हुआ। यह स्टडी ‘एडवांसमेंट्स इन होम्योपैथिक रिसर्च’ जर्नल के मई 2022 अंक में ‘एन एवीडेंस बेस्ड क्लीनिकल स्टडी ऑन होम्योपैथिक ट्रीटमेंट ऑफ हेपेटाइटिस बी पेशेंट्स’ शीर्षक से छपी है।

हेपेटाइटिस सी
डॉ गुप्ता ने बताया कि इसी प्रकार हेपेटाइटिस सी के 13 केसेज की स्टडी की गयी थी, इसमें सफलता का प्रतिशत 69 रहा। इन 13 केसेज में से 9 केसेज में वायरस निगेटिव हो गया या वायरल लोड कम हो गया जबकि चार केसेज में दवाओं से कोई लाभ नहीं हुआ। इस स्टडी का प्रकाशन ‘एडवांसमेंट्स इन होम्योपैथिक रिसर्च’ जर्नल के मई 2017 के अंक में ‘रोल ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन्स इन द पेशेन्ट्स ऑफ क्रॉनिक हेपेटाइटिस सी’ शीर्षक से किया गया है।
बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान
डॉ गिरीश गुप्ता ने बताया कि चूंकि हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी का संक्रमण इससे ग्रस्त व्यक्ति के खून या शरीर से निकलने वाले अन्य तरल पदार्थों के माध्यम से होता है, इसीलिए लोगों को सतर्कता बरतनी आवश्यक है, जैसे एक सीरिंज से एक से ज्यादा व्यक्ति को इंजेक्शन न लगायें, एक ही ब्लेड से दो लोग दाढ़ी न बनायें, सैलून में भी बाल कटाते और दाढ़ी बनवाते समय ध्यान रखें कि उस्तरे में नया ब्लेड लगा हो। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाने चाहिये तथा खून चढ़ाते समय यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि उस रक्त की संक्रमण की जांच हो चुकी है।

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