-भ्रष्टाचार और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर प्राथमिक जांच में पाये गये दोषी

सेहत टाइम्स
लखनऊ। भ्रष्टाचार और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राजर्षि दशरथ स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय अयोध्या के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार की मुसीबतें बढ़ गयी हैं, उप मुख्यमंत्री व चिकित्सा शिक्षा मंत्री ब्रजेश पाठक ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिये हैं। आरोपों की प्रारम्भिक जांच में उन्हें दोषी पाये जाने के बाद उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति की गई है। अयोध्या मेडिकल कॉलेज के उपाध्यक्ष व अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने इस उच्चस्तरीय जांच की कमान तेज तर्रार प्रशासनिक अधिकारी महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण नेहा शर्मा को सौंपी है।
अपर मुख्य सचिव द्वारा जारी कार्यालय ज्ञाप में कहा गया है कि डॉ ज्ञानेन्द्र कुमार द्वारा सरकारी धन के अनाधिकृत व्यय के संबंध में मिली शिकायत पर महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण को प्रश्नगत प्रकरण में जांच कराकर जॉच आख्या शासन को उपलब्ध कराये जाने के लिए निर्देश दिये गये थे। इस पर महानिदेशक द्वारा प्रश्नगत प्रकरण में उपलब्ध करायी गयी प्रारम्भिक जांच आख्या के आधार पर यह पाया गया कि डॉ० ज्ञानेन्द्र कुमार द्वारा अनाधिकृत अवकाश पर रहते हुए भुगतान के लिए चेक हस्ताक्षरित किये गए हैं।
उन्होंने कहा कि अनाधिकृत अवकाश पर रहना एवं अवकाश पर रहते हुए भुगतान किया जाना दोनों ही नियमानुकूल नहीं है। इसके साथ ही डा० ज्ञानेन्द्र कुमार के विरुद्ध उ०प्र० सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-7 के अन्तर्गत अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित करते हुए इस प्रकरण की जांच के लिए महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण को जाँच अधिकारी नामित किया गया है।

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