Saturday , May 23 2026

केजीएमयू के चिकित्सक ने अफ्रीका में किया भारत का प्रतिनिधित्व

-केप टाउन में आयोजित हुई इंटरनेशनल सोसायटी फॉर मैग्नेटिक रिजोनेंस इन मेडिसिन की वार्षिक बैठक

-डॉ. दुर्गेश के. द्विवेदी ने किया महत्वपूर्ण अफ्रीका प्लेनरी सत्र का सह-संचालन

सेहत टाइम्स

लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के लिए यह गौरव का क्षण रहा कि रेडियोडायग्नोसिस विभाग के डॉ. दुर्गेश के. द्विवेदी ने दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में आयोजित इंटरनेशनल सोसायटी फॉर मैग्नेटिक रिजोनेंस इन मेडिसिन 2026 International Society for Magnetic Resonance in Medicine (ISMRM) 2026 की वार्षिक बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और एक महत्वपूर्ण अफ्रीका प्लेनरी सत्र का सह-संचालन किया।

केजीएमयू के मीडिया प्रवक्ता डॉ के के सिंह द्वारा जारी विज्ञप्ति में यह जानकारी देते हुए बताया गया है कि यह सम्मेलन 9 से 14 मई 2026 तक केप टाउन में आयोजित हुआ। इस वर्ष सम्मेलन की थीम “Ubuntu” थी, जिसका अर्थ है — “I am, because we are”। यह थीम MR Imaging के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग, समानता और साझेदारी की भावना को दर्शाती है।

इस प्लेनरी सत्र का सह-संचालन डॉ. दुर्गेश के. द्विवेदी, KGMU, और डॉ. Harry Hu, Mayo Clinic, Jacksonville, Florida, ने किया। इस सत्र को अंतरराष्ट्रीय रेडियोलॉजी मीडिया, including AuntMinnie, में भी प्रमुखता से रिपोर्ट किया गया।

MRI में समानता, पहुंच और भविष्य की दिशा

आयोजित अफ्रीका प्लेनरी में MRI में समानता, पहुंच और भविष्य की दिशा विषय पर आयोजित सत्र में अफ्रीका के प्रमुख विशेषज्ञों ने MRI की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार रखे। उन्होंने बताया कि मुख्य वक्ताओं में केन्यट्टा नेशनल हॉस्पिटल, नैरोबी Kenyatta National Hospital, Nairobi के डॉ. मार्टिन गैथोगो Martin Gathogo ने केन्या में एमआरआई, यूनिवर्सिटी ऑफ प्रेटोरिया University of Pretoria के लाइडिया सेकोली Lydia Sekoli ने साउथ अफ्रीका में एमआरआई ने तथा कोर्ले बू टीचिंग हॉस्पिटल ऐक्रा Korle Bu Teaching Hospital, Accra  के डॉ. यॉ मेनसाह Dr. Yaw Mensah ने पश्चिम अफ्रीका में एमआरआई पर आधारित सत्र में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि अफ्रीका के कई देशों में प्रति दस लाख आबादी पर एक से भी कम MRI स्कैनर उपलब्ध है, जबकि जापान और अमेरिका जैसे देशों में यह संख्या कहीं अधिक है।

वक्ताओं ने बताया कि low-field MRI और AI-assisted MRI जैसे नए तकनीकी समाधान कम लागत और कम infrastructure में advanced imaging को अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। यह मॉडल भारत और दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्रों के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक है।

ज्ञात हो कि केजीएमयू, लखनऊ भारत के सबसे पुराने और बड़े टर्शियरी केयर मेडिकल इंस्टीट्यूशंस tertiary care medical institutions में से एक है। उत्तर प्रदेश जैसे 24 करोड़ से अधिक आबादी वाले राज्य में स्थित होने के कारण यहां trauma, neurosurgery और neurological disorders से संबंधित मरीजों की बड़ी संख्या आती है।

इसी बड़े clinical burden को research opportunity में बदलते हुए KGMU के रेडियोडायग्नोसिस विभाग ने advanced MRI और AI-based imaging के क्षेत्र में एक मजबूत research programme विकसित किया है। यह कार्य अब ISMRM जैसे विश्व के सबसे प्रतिष्ठित MR imaging मंचों पर प्रस्तुत किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश और भारत के लिए शोध का महत्व

डॉ. द्विवेदी का शोध कार्य मुख्य रूप से उन बीमारियों और clinical problems पर केंद्रित है जो भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश की जनसंख्या को बड़े स्तर पर प्रभावित करती हैं।

आघातजन्य मस्तिष्क की चोट

भारत में आघातजन्य मस्तिष्क की चोट traumatic brain injury एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है। कई हल्की आघातजन्य मस्तिष्क की चोट में मरीजों की conventional MRI सामान्य दिखाई देती है, लेकिन वे बाद में याददाश्त, संज्ञानात्मक और तंत्रिका-संबंधी समस्याएं  से जूझते रहते हैं। KGMU में advanced diffusion MRI, NODDI, SMT, resting-state fMRI और MR spectroscopy की सहायता से ऐसी सूक्ष्म मस्तिष्क की चोट को समझने और पहचानने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रोस्टेट कैंसर 

डॉ द्विवेदी ने बताया कि हाइब्रिड मल्टीडाइमेंशनल एम आर आई Hybrid multidimensional MRI के माध्यम से prostate cancer की बेहतर और non-invasive characterization पर कार्य किया जा रहा है। इससे unnecessary biopsies को कम करने और early diagnosis में मदद मिल सकती है। उन्होंने बताया कि AI-based MRI Reconstruction and Super-Resolution:AI की सहायता से कम समय और कम लागत वाले MRI scans से उच्च-गुणवत्ता की जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य advanced MRI को district hospitals और resource-limited settings तक पहुंचाना है।

केजीएमयू में एआई इमेजिंग पहल

डॉ. द्विवेदी के समूह ने KGMU में MRI और artificial intelligence पर केंद्रित कई research directions शुरू किए हैं, जिनमें शामिल हैं:

डीप लर्निंग-बेस्ड MRI सुपर-रिज़ॉल्यूशन

AI-एन्हांस्ड डिफ्यूजन MRI रिकंस्ट्रक्शन

सिंगल-शेल डिफ्यूजन MRI से क्लिनिकली यूज़फुल फाइबर ट्रैकिंग

माइल्ड TBI की AI-असिस्टेड डिटेक्शन

प्रोस्टेट MRI कैरेक्टराइजेशन

इंडियन पॉपुलेशन के लिए फाउंडेशन मॉडल्स और फेडरेटेड लर्निंग

दीर्घकालिक लक्ष्य KGMU में AI in Medical Imaging विकसित करना है, जो भारतीय मरीजों, भारतीय स्कैनर प्रोफाइल्स और भारतीय डिजीज पैटर्न्स के अनुरूप AI tools विकसित कर सके।

ISMRM Indian Chapter की बैठक

सम्मेलन के दौरान डॉ. द्विवेदी ने ISMRM Indian Chapter की General Body Meeting भी आयोजित की। इस बैठक में भारतीय radiologists, MR scientists और clinicians ने chapter की भविष्य की दिशा, training activities, capacity building और India में MRI research को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।

ISMRM 2026 में KGMU के शोध कार्य

KGMU की ओर से ISMRM 2026 में कई शोध कार्य प्रस्तुत किए गए, जिनमें माइल्ड ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी में एडवांस्ड डिफ्यूजन MRI से व्हाइट मैटर में बदलाव,  सिंगल-शेल डिफ्यूजन MRI से V-Net बेस्ड fODF रिकंस्ट्रक्शन,  प्रोस्टेट कैंसर कैरेक्टराइजेशन के लिए हाइब्रिड मल्टीडायमेंशनल MRI, TBI में MR स्पेक्ट्रोस्कोपी से न्यूरोमेटाबोलिक बदलाव,  TBI में डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क कनेक्टिविटी में बदलाव।

ये शोध कार्य दर्शाते हैं कि KGMU में clinical burden से जुड़े वास्तविक समस्याओं पर advanced imaging और AI आधारित समाधान विकसित किए जा रहे हैं।

भारत में ISMRM Annual Meeting 2030–31 की मेजबानी का प्रयास

डॉ. द्विवेदी ने बताया कि ISMRM Indian Chapter भारत में 2030 या 2031 में मुख्य ISMRM Annual Meeting आयोजित करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है। इस सम्मेलन में लगभग 6,000 अंतरराष्ट्रीय delegates के आने की संभावना रहती है, जिनमें बड़ी संख्या North America और Europe से होती है।

उन्होंने कहा कि इतने बड़े scientific event की मेजबानी केवल academic सम्मान नहीं, बल्कि भारत के लिए एक बड़ा राष्ट्रीय अवसर है। इससे medical imaging, AI, tourism, hospitality, aviation और local economy को भी बड़ा लाभ मिल सकता है। इसके लिए world-class convention infrastructure, सुरक्षित वातावरण, good accommodation, suitable weather window और government support की आवश्यकता होगी।

इस आयोजन के लिए Bangalore, Hyderabad और Mumbai जैसे शहरों की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।रेडियोडायग्नोसिस विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनित परिहार ने डॉ. द्विवेदी को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि इससे विभाग की international visibility और research presence को मजबूती मिली है।

कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने भी डॉ. द्विवेदी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसी उपलब्धियां KGMU को translational biomedical research और advanced medical imaging के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत बनाती हैं।

डॉ. द्विवेदी ने इस अवसर के लिए ISMRM का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने विद्यार्थियों, सहयोगियों, फंडिंग एजेंसियों, रेडियोडायग्नोसिस विभाग तथा KGMU के सभी संकाय सदस्यों को उनके निरंतर सहयोग और समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सामूहिक प्रयास और KGMU में विकसित हो रही मजबूत शोध संस्कृति का परिणाम है।