अकेले कमरे में सिगरेट पीकर भी आप अपने बच्चे को बीमार बना रहे हैं

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर राम नाईक ने कहा, इतने तो बड़े-बड़े युद्ध में भी नहीं मरते जितने तम्बाकू के सेवन से मर रहे हैं

लखनऊ. राज्यपाल एवं कुलाधिपति किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी राम नाईक ने कहा है कि भारत में प्रतिवर्ष तंबाकू जनित रोगों से प्रभावित होकर 10 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है. इतनी बड़ी संख्या में तो लोग बड़े-बड़े युद्ध में भी नहीं मरते हैं. इससे यह समझना चाहिए कि इसके प्रति गंभीर रूप से विचार करें तथा लोगों को इसके इस्तेमाल न करने के बारे में बताया जाये. उन्होंने कहा कि इसको रोकने के लिए कानून तो बनाना चाहिए लेकिन साथ-साथ जब तक लोगों में इसके खिलाफ जागरूकता नहीं बढ़ेगी तब तक पूरी तरह से इसको निषेध करना संभव नहीं हो सकेगा. उन्होंने डॉक्टरों पर भी उंगली उठाते हुए कहा कि बहुत से ऐसे चिकित्सक हैं जो तंबाकू का सेवन करते हैं. उन्होंने कहा कि जरूरी है कि जन समुदाय के बीच तंबाकू के निषेध के लिए उनका मन बनाया जाए.

 

युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनाना जरूरी

 

राज्यपाल ने यह बात आज विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर केजीएमयू में आयोजित एक समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कही. समारोह का आयोजन केजीएमयू एवं नेशनल मेडिकोज आर्गेनाईजेशन अवध प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था. कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित तंबाकू निषेध अभियान के विश्व स्वास्थ्य संगठन के एंबेसडर डॉ रमाकांत ने कहा कि यह देखा गया है कि ज्यादातर युवा तनाव से मुक्त होने के लिए इसका सेवन करते हैं और फिर धीरे-धीरे इसके आदी बन जाते हैं, इसलिए जरूरत है कि युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत किया जाए.

 

10 वर्ष कम हो जाती है आयु

कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने इस मौके पर कहा कि तंबाकू से ह्रदय संबंधी 20% बीमारियां होती हैं वैसे कुल 65 प्रकार की बीमारियां इसकी वजह से होती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि तंबाकू का सेवन करने वाले व्यक्ति की औसत आयु 10 वर्ष कम हो जाती है.कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ विनोद जैन ने कहा कि औषधि के नाम पर देश में लायी गई तंबाकू अब लोगों की जान की दुश्मन बन गई है. उन्होंने एक खास बात बतायी कि यह तो सभी जानते हैं कि सिगरेट पीने वाला व्यक्ति जब सिगरेट पीता है उस समय वह अपना नुकसान तो करता ही है उसके आसपास के लोग भी धुएं का शिकार होकर बीमारी की तरफ बढ़ जाते हैं,  इसके अतिरिक्त थर्ड हैंड स्मोक भी होता है इस बारे में उन्होंने बताया कि बहुत से लोग अपने घर में अकेले कमरे में सिगरेट पीते हैं, अकेले कमरे में वह यह सोच कर पीता है कि इसका नुकसान किसी दूसरे को न हो, खासतौर से बच्चों के सामने भी न पीयें, तो उसका यह सोचना गलत है. उन्होंने बताया कि अकेले कमरे में सिगरेट पीकर पंखा चला कर उसका धुआं निकाल कर सोच लेते हैं कि मैंने तो बच्चों के सामने सिगरेट नहीं पी. लेकिन आपको जानकर यह आश्चर्य होगा कि उनके बच्चों को फिर भी इसका नुकसान होता है. इसके बारे में उन्होंने बताया जब व्यक्ति सिगरेट पीता है तो उसके धुएं से निकलने वाले रासायनिक तत्व आसपास के वातावरण में जमा हो जाते हैं, कमरे की अगर बात करें तो जैसे खिलौना, पर्दा इन जगहों पर जब यह रासायनिक तत्व जम जाते हैं और बाद में बच्चा आकर उस खिलौने को या पर्दे को चाट लेता है तो वह रासायनिक तत्व उसके अंदर प्रवेश कर जाते हैं जिससे अनजाने में ही बच्चे को नुकसान होता है.

 

प्रतिबन्ध की मांग वाला पत्र स्वयं राज्यपाल भेजेंगे केंद्र को, राष्ट्रपति को भी सौंपेंगे 

 

इस मौके पर पल्मोनरी विभाग के हेड डॉ सूर्यकांत ने बताया कि किस तरह लोग तंबाकू, सिगरेट से फेफड़ों के रोग के शिकार हो जाते हैं. प्रो0 सूर्य कांत ने कहा कि जब से तम्बाकू एक कमाऊ पूत हो गया है तब से ये हटने का नाम नही ले रहा है। जहांगीर ने जब से तम्बाकू पर टैक्स लगाया था और तब आज तक आज हिन्दुस्तान में भी तम्बाकू से होने वाले आय की वजह से सरकारें इस पर प्रतिबंध नही लगाती हैं। उन्होंने इस मौके पर तंबाकू पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र के बारे में भी बताया. इस पत्र में बताया गया है कि किस तरह से तंबाकू बिक्री से मिलने वाले राजस्व के कारण इसको अब तक बंद नहीं किया जा सका है जबकि असलियत यह है कि जितना इससे राजस्व मिलता है, उससे ज्यादा तंबाकू से होने वाली बीमारियों पर सरकार का खर्च हो जाता है.  डॉ सूर्यकांत के प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र की कॉपी राज्यपाल ने अपने पत्र के साथ आज ही भेजने का आश्वासन डॉक्टर सूर्यकांत को दिया. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आगामी 2, 3 एवं 4 जून को होने वाले राज्यपालों के सम्मेलन में भी वह इस मुद्दे को रखेंगे तथा यह मांग राष्ट्रपति तक पहुंचाएंगे.

 

इस अवसर पर डॉ. एके त्रिपाठी, विभागाध्यक्ष क्लीनिकल हिमैटालजी विभाग के शोध, परिकल्पना पर आधारित लघु फिल्म संवरती जिन्दगी का विमोचन राज्यपाल द्वारा किया गया। यह लघु फिल्म एनीमिया रोग के बारे में रुचिकर तथा सरल रूप से दर्शको को जागरूकत करती है। इस प्रयास से निश्चित ही इस रोग को दूर करने में मदद मिलेगी। हमारे देश की आधी से अधिक जनसंख्या एनीमिया से ग्रस्त है।

इस दिशा में कार्य करने वालो को किया गया सम्मानित

 

इस मौके पर पैरामेडिकल स्टूडेंट द्वारा पोस्टर प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पाने वाले बच्चों क्रमश:  आकाश कुशवाहा, दिव्या श्रीवास्तव और आशीष चतुर्वेदी को राज्यपाल ने पुरस्कृत भी किया. इसके अतिरिक्त राज्यपाल ने प्रोफ़ेसर रमाकांत को विशिष्ट चिकित्सा सेवा सम्मान से सम्मानित किया तथा इसके अलावा मसीहा कैंसर फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ अनवर रिजवी, आरोग्य भारती के सचिव आयुर्वेद डॉक्टर अभय नारायण तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार विवेक शुक्ला, केजीएमयू की शालिनी गुप्ता, डॉक्टर अंकिता जौहरी,  शिवानी श्रीवास्तव तथा बिट्स पिलानी की छात्रा व समाज सेविका शुभी जैन को तंबाकू निषेध कार्यक्रमों में सतत योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किये गए. अंत में धन्यवाद प्रस्ताव प्रो.ए के त्रिपाठी ने रखा.