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10 रुपये और 10 महीने के समय में हासिल हुई एक अरब की सम्‍पत्ति

-ओयल फैमिली को आरटीआई के जरिये हासिल हुए सम्‍पत्ति के मूल प्रपत्र

पत्रकार वार्ता में बायें से कुंवर हरिनारायण सिंह, आरटीआई एक्टिविस्‍ट सिद्धार्थ नारायण, राजा विष्‍णु नारायण दत्‍त सिंह व कुंवर प्रद्युम्‍न नारायण दत्‍त सिंह

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश के एक राजघराने को मात्र दस माह के समय में दस रुपये खर्च करके एक अरब की सम्‍पत्ति हासिल हुई है। चौंक गये न, हम आपको बताते हैं कि ऐसा कैसे हुआ है। आजादी से पूर्व 1928 में लखीमपुर खीरी जिले की ओयल रियासत के राजा युवराज दत्‍त सिंह द्वारा तत्‍कालीन डिप्‍टी कलेक्‍टर को कार्यालय के लिए किराये पर दिये अपने 2.60 लाख स्‍क्‍वॉयर फीट के महल के दस्‍तावेज उनके पौत्र कुंवर प्रद्युम्‍न नारायण दत्‍त सिंह ने प्रशासन से हासिल करने में सफलता प्राप्‍त की है। कुंवर प्रद्युम्‍न नारायण ने ये दस्‍तावेज 10 रुपये की फीस पर आरटीआई दाखिल करके हासिल किये हैं।

यह जानकारी देने के लिए यहां राणा प्रताप मार्ग स्थित कुंवर प्रद्युम्‍न नारायण दत्‍त सिंह के आवास पर शनिवार 20 फरवरी को पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। इस पत्रकार वार्ता में कुंवर प्रद्युम्‍न नारायण दत्‍त सिंह ने बताया कि उनके दादा राजा युवराज दत्‍त सिंह ने 1928 में यूनाइटेड प्रॉविंस (अब उत्‍तर प्रदेश) के गवर्नर को तीस वर्षों के लिए अपना महल किराये पर दिया था। जिसमें इस समय जिलाधिकारी आवास है। उन्‍होंने बताया कि भारत के आजाद होने के बाद 1958 में जब लीज की मियाद पूरी हुई तो इसे तीस साल के लिए और बढ़ा दिया गया। उन्‍होंने बताया कि इसके बाद 1984 में उनके दादा यानी राजा युवराज दत्‍त सिंह की मृत्‍यु हो गयी। इसके बाद जब 1988 में लीज की मियाद पूरी होने के बाद जब फि‍र से नये कॉन्‍ट्रेक्‍ट की बारी आयी तो मूल कागजों को तलाशा गया लेकिन दुर्भाग्‍यवश कागजात कहीं गुम हो गये।

उन्‍होंने बताया कि ओयल परिवार ने अपने पुश्‍तैनी महल के अभिलेखों को बहुत ढूंढ़ा लेकिन निराशा ही हाथ लगी। इसके लिए कई बार लखीमपुर जाकर कोशिश की गयी लेकिन काम नहीं बना। इसके बाद 2019 में परिवार ने आरटीआई एक्टिविस्‍ट सिद्धार्थ नारायण से भेंट कर अपनी समस्‍या बतायी।

ओयल फैमिली के सदस्‍य

पत्रकार वार्ता में मौजूद सिद्धार्थ नारायण ने बताया कि मैंने इसके लिए 10 रुपये की फीस के साथ आरटीआई के तहत सूचना मांगी तो पता चला कि महल के अभिलेख लखीमपुर में नहीं हैं, ये अभिलेख सीतापुर में हैं, क्‍योंकि 1928 में ओयल का मुख्‍यालय सीतापुर ही था। इसके बाद चार नये केस सीतापुर में दाखिल किये गये जहां से अक्‍टूबर 2020 में डीड के मूल प्रपत्र हमें प्राप्‍त हुए। ओयल फैमिली और सिद्धार्थ नारायण ने इस कार्य में मिले सभी अधिकारियों के सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि यह सूचना के अधिकार का ही असर है कि हमें बिना मुकदमा दायर किये 1928 के दस्‍तावेज इतनी जल्‍दी प्राप्‍त हो सके। इस मौके पर ओयल फैमिली के राजा विष्‍णु नारायण दत्‍त सिंह, कुंवर हरिनारायण सिंह भी उपस्थित रहे।

सिद्धार्थ नारायण ने कहा कि भारत का यह आरटीआई के तहत यह पहला केस है जिसमें 10 माह के समय में 10 रुपये के शुल्‍क में एक अरब की सम्‍पत्ति का स्‍वामित्‍व सिद्ध हुआ है। ज्ञात हो सिद्धार्थ नारायण को सूचना अधिकार क्षेत्र में योगदान के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।

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