क्‍या लड़खड़ायेंगी लोहिया चिकित्‍सा संस्‍थान की ओपीडी सेवायें ?

-प्रांतीय चिकित्‍सा सेवा के 34 डॉक्‍टरों की सम्‍बद्धता समाप्‍त, दो को कोर्ट ने रोका  

-नयी नियुक्तियों में लगेगा कुछ समय, तब तक अस्‍थायी व्‍यवस्‍था किया गया दावा

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। गुरुवार से डॉ.राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के हॉस्पिटल ब्लॉक में चलने वाली ओपीडी पर संकट के बादल छा रहे हैं। आशंका है कि ओपीडी में आने वाले मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ेगा साथ ही तमाम दुश्वारियां भी झेलनी पड़ेंगी। डेंटल ओपीडी तो बंद ही रहेगी। इसकी वजह है कि 32 चिकित्‍सकों के चेहरे अब यहां की ओपीडी में नहीं दिखेंगे, ये वे चिकित्‍सक हैं जो आरएमएल अस्‍पताल में कार्यरत थे, तथा संस्‍थान ने शुरुआती व्‍यवस्‍था के तहत इन्‍हें दो साल के लिए संस्‍थान से संबद्ध कर दिया था, यह सम्‍बद्धता की अवधि आज 31 मार्च को समाप्‍त हो गयी, नतीजा यह है कि ओपीडी संचालन की व्‍यवस्‍था पूरी तरह से संस्‍थान के डॉक्‍टरों पर आ जायेगी, हालांकि कहा यह जा रहा है कि जिन विधाओं के चिकित्‍सक की सम्‍बद्धता समाप्‍त हो रही है उनके स्‍थान पर नये चिकित्‍सक रखने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, और संभव है एक सप्‍ताह के अंदर नये चिकित्‍सक ज्‍वॉइन कर लें, लेकिन यह सब अभी अनुमान है। और तब तक संस्‍थान के चिकित्‍सकों के सहारे यह कितनी सुचारु रहेगी, यह समय बतायेगा।

दोनों अस्पतालों के विलय के दौरान प्रांतीय चिकित्सा सेवा के लोहिया अस्पताल में कार्यरत 34 चिकित्सक, जिन्हें 2 वर्ष के लिए संबद्ध किया गया था, बुधवार को अवधि पूर्ण होने पर, सभी को संस्थान छोड़ने के आदेश जारी हो चुका है। हालांकि उनमें से दो चिकित्सकों ने न्यायालय की शरण ले ली है, उन्हें संस्थान नहीं छोड़ना पड़ेगा।
ज्ञातव्य हो कि लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू करने की कयावद को वर्ष 2017 में वर्तमान योगी सरकार ने अमली जामा पहनाया था, जिसके बाद लोहिया अस्पताल के इन्हीं 37 चिकित्सकों की मौजूदगी दिखाकर ही 2018 में एमबीबीएस का प्रथम बैच को प्रवेश मिला और अबतक तीन बैच शिक्षा ग्रहण कर रहें हैं। लोहिया संस्थान की डिमांड पर, स्वास्थ्य विभाग ने लोहिया अस्पताल में कार्यरत 37 चिकित्सकों को दो वर्ष के अनुबंध पर लोहिया संस्थान में संबद्ध किया था। जिनमें तीन ने खुद ही छोड़कर स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में तैनाती प्राप्त कर ली हैं। अन्य 34 विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुबंध अवधि 31 मार्च 2021 को पूर्ण हो गई है। जिन्हें गुरुवार को स्वास्थ्य महानिदेशालय में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।

गौरतलब है कि लोहिया संस्थान प्रशासन ने पीएमएस के इन 34 चिकित्सकों के विकल्प तैयार किए बगैर ही सभी चिकित्सकों की जरूरतों को खारिज कर दिया। जिसके बाद हॉस्पिटल ब्लॉक की ओपीडी संचालन में संकट आन खड़ा हुआ है। संस्थान द्वारा नई नियुक्ति किए बगैर, पीएमएस के चिकित्सकों को हटाये जाने से पीएमएस के चिकित्सकों में रोष व्याप्त है, जिनमें से मानसिक रोग विभाग के डॉ.देवाशीष शुक्ल व त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ.सुरेश अहिरवार ने न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है। सूत्रों की माने तो कि मरीजों के प्रति संवेदनहीनता पूर्ण रवैये को लेकर कुछ संगठन न्यायालय में पीआईएल भी डालने का मन बना चुके हैं।  विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए अगले सप्ताह इंटरव्यू होगा।


संस्थान के निदेशक डॉ.एके सिंह का कहना है कि संविदा पर 34 चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए 132 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनका इंटरव्यू अगले सप्ताह प्रस्तावित है, चयनित चिकित्सकों को शीघ्र ही ज्वॉइन कराने का प्रयास किया जायेगा। जिसके बाद अस्पताल की ओपीडी सामान्य संचालित होंगी। फिलवक्त गुरुवार से अस्पताल की ओपीडी संस्थान के विशेषज्ञों के नेतृत्व में संचालित होगी, डेंटल ओपीडी में संशय बना है मगर अन्य विभागों की ओपीडी सामान्य चलेंगी। मानसिक रोग व त्वचा रोग विभाग के चिकित्सकों के लिए न्यायालय के निर्देशानुसार दोनों चिकित्सक पूर्ववत ओपीडी में मरीजों को उपचारित करेंगे।