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दिव्‍यांगों के साथ यह मजाक क्‍यों ? हमें सड़क पर उतरने को मजबूर न करें

-दिव्‍यांग उपकरण बनाने वाले प्रदेश के एकमात्र वर्कशॉप लिम्‍ब सेंटर को न हटाने की मुख्‍यमंत्री से अपील की विकलांग मंच ने

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विकलांग मंच ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि दिव्यांगों की चिकित्सा से संबंधित सभी सुविधाएं जैसे सहायक उपकरण का निर्माण, उसकी मरम्मत, विकलांग सर्टीफि‍केट बनना, ट्रेन के लिए छूट वाला पास बनना, एक्‍सरसाइज, पुनर्वास जैसे कार्य एक छत के नीचे होने की सुविधा देने वाले संस्थान डालीगंज स्थित लिंब सेंटर को वहां से न हटाकर अस्‍थायी रूप से बनाये जा रहे कोविड अस्‍पताल के कहीं और बनवा लिया जाये, इससे जहां पैसों की बर्बादी रुकेगी वहीं दिव्‍यांगों को भी परेशानी से नहीं जूझना पड़ेगा। ज्ञात हो केजीएमयू प्रशासन इस स्‍थान पर कोविड हॉस्पिटल बनाने पर अड़ा हुआ है।

उत्तर प्रदेश विकलांग मंच के सचिव सूरज यादव ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित अपने पत्र में कहा है कि प्रार्थी शारीरिक रूप से विकलांग है एवं 1 जुलाई को जब वह अपने सहायक उपकरण की मरम्मत के लिए लिम्‍ब सेंटर के वर्कशॉप पहुंचा तो वहां केजीएमयू प्रशासन की टीम द्वारा वर्कशॉप को हटाने के लिए निरीक्षण एवं नाप जोख की जा रही थी।

पत्र में कहा गया है कि इतनी सारी सुविधायें एक छत के नीचे देने वाले दिव्यांगों के एकमात्र अस्पताल को अगर कोविड अस्पताल के रूप में परिवर्तित कर दिया जाएगा तो हम दिव्यांग अपने कार्य के लिए कहां जाएंगे,  क्योंकि उत्तर प्रदेश में लिंब सेंटर ही एकमात्र केंद्र है जहां दिव्यांगों का पूर्ण पुनर्वास किया जाता है। सूरज यादव प्रश्‍न उठाते हैं कि वर्कशॉप में लगी मशीनों को उखाड़कर नई जगह स्थापित करने से अगर मशीन खराब हो गई तो दिव्यांगों का कार्य बाधित होगा इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, जिस भी नयी जगह लिंब सेंटर को स्थापित किया जाएगा वहां पर दिव्यांगों के चलने-फिरने के अनुसार बिल्डिंग का निर्माण क्या किया जाएगा, क्‍या उस बिल्डिंग में एक ही जगह ये सुविधायें देते हुए एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए रैम्‍प का निर्माण करायेगा, इधर से उधर मशीन फि‍ट कराने में के निर्णय से तोड़फोड़ एवं पैसे की बर्बादी ही होनी है इसको करने में कम से कम 6 माह का समय लग सकता है।

पत्र में कहा गया है कि हम दिव्यांगजन सुचारू रूप से चलने फिरने के लिए सक्षम नहीं होते हैं ऐसे में हमें अलग ओपीडी, अलग कृत्रिम अंग वर्कशॉप, अलग वार्ड, अलग फिजियोथेरपी, अलग जांचें, विकलांग प्रमाण पत्र के लिए, रेलवे कंसेशन इत्यादि के लिए कहां-कहां दौड़ाया जाएगा। सचिव ने पत्र में लिखा है कि केजीएमयू प्रशासन द्वारा लिंब सेंटर को कोविड अस्पताल बनाने के नाम पर पिछले कई माह से दिव्यांगों का मजाक उड़ाया जा रहा है एक तरफ ईश्वर की कृपा से हम शारीरिक रूप से अक्षम हैं तो दूसरी तरफ केजीएमयू प्रशासन हमें इधर से उधर दौड़ाने का कुचक्र रच रहा है। कभी समाचार पत्रों से पता चलता है कि लिंब सेंटर को यहां से नहीं हटाया जाएगा और कभी फिर खबर दिखती है कि हटाया जाएगा।

पत्र में मुख्यमंत्री से अनुरोध पूर्वक कहा गया है कि हम दिव्यांग लॉक डाउन का पालन करते हुए पत्राचार के माध्यम से अपनी बात आप तक पहुंचा रहे हैं किंतु अगर हमारी बात को नहीं सुना गया तो हमें अपने अधिकार के लिए प्रदेश के सभी जिलों से लाखों की संख्या में एकत्र होकर विधानसभा के सामने धरने पर बैठने को मजबूर होना पड़ेगा। इसलिए आपसे अनुरोध है कि प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए दिव्यांग शब्द की उपाधि का उपहास न उड़ाते हुए अन्‍यत्र कहीं भी अस्पताल का निर्माण किया जाए तथा इस संस्‍थान से दिव्यांगों को मिल रही सुविधा से वंचित न किया जाए।