Friday , August 19 2022

ज्‍यादा दवायें, शराब व तम्‍बाकू का सेवन करता है हड्डियों को कमजोर

यूपी चैप्टर ऑफ एसोसिएशन ऑफ फिजीशियन ऑफ इंडिया का वार्षिक अधिवेशन समाप्‍त

लखनऊ। यूपी चैप्टर ऑफ एसोसिएशन ऑफ फिजीशियन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के अटल बिहारी वाजपेई साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित वार्षिक अधिवेशन के अंतिम दिन के.जी.एम.यू. गठिया रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अनुपम वाखलू ने बोन मिनिरल डेंसिटी के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि बोन मिनिरल डेंसिटी बोन मास मापने की तकनीक है। उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। इसका मुख्य कारण अत्याधिक दवाइयों का सेवन, शराब एवं तंबाकू का सेवन है, जिससे बोन मिनिरल डेंसिटी कम होती है।

महिलाओं में मीनोपॉज के बाद हो जाती है समस्‍या

उन्होंने बताया कि (डुएल एनर्जी एक्स रे) तकनीक के द्वारा इस को मापा जाता है उन्होंने बताया कि 50 वर्ष के बाद खासतौर से महिलाओं में मासिक बंद होने (मीनोपॉज) के बाद यह समस्या ज्यादा दिखाई देती है उन्होंने इसके बचाव के लिए भोजन में कैल्शियम को ज्यादा ज्यादा मात्रा में शामिल करना, विटामिन डी थ्री का सेवन करना एवं नियमित व्यायाम व्यायाम करना चाहिए तथा इसके उपचार के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों को दिखाया जाना चाहिए उन्होंने बताया कि यदि मरीज लंबे समय से बिस्तर पर हैं तो बोन लॉस की वजह से ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या बढ़ जाती है उन्होंने बताया कि फेमस टूल डेकसा के द्वारा हड्डी के टूटने की संभावना का पता लगाया जाता है यदि व्यक्ति शराब तंबाकू का सेवन करता है तो हड्डी टूटने की संभावना बढ़ जाती है।

…तो करायें विटामिन बी12 की जांच

इस अवसर पर राम मनोहर लोहिया संस्थान के निदेशक प्रोफेसर ए.के. त्रिपाठी ने साइटोपेनिया पर जानकारी देते हुए कहा कि जब मरीजों में आर.बी.सी. और डब्ल्यू.बी.सी. प्लेटलेट्स कम होने लगता है सामान्य  तौर पर यह बुखार आदि के समय होता है परंतु अगर लगातार ऐसा हो रहा है तो इसके लिए विटामिन बी12 की जांच करानी चाहिए। उन्होंने इसके लिए अनियमित जीवन शैली तथा तंबाकू, गुटके का प्रयोग को इसके लिए जिम्मेदार बताया और कहा कि यदि गंभीर लक्षण जैस लिम्फ नोड इत्यादि हो तो बोन मैरो की जांच कराई जाती है। जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि किसी प्रकार का ब्लड कैंसर -जैसे अप्लास्टिक, एनीमिया आदि तो नहीं है। सामान्य तौर पर मरीज को बिना सलाह के दवाइयों का प्रयोग नहीं करना चाहिए इससे नुकसान हो सकता है तथा ब्लड काउंट कम हो जाता है।

डॉ के के सावलानी और डॉ एस सी चौधरी ने क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया डॉ एस एन गुप्ता अवार्ड प्रथम डॉ अंकुर गुप्ता, दूसरा डॉ विवेक भगत तीसरा इमरान खान, डॉ एन एन गुप्ता अवार्ड में प्रथम पुरस्कार डॉ दिव्या सरीन द्वितीय डॉ वनिषा पुंडीर तृतीय डॉ अभिषेक टण्डन, डॉ वेदान गुप्ता अवार्ड में प्रथम डॉ ज्ञान प्रकाश द्वितीय डॉ मोनिका कुलकर्णी तृतीय डॉ अर्पित बंसल को, डॉ जी पी एल्हेन्स अवार्ड में प्रथम पुरस्कार डॉ नाहिद द्वितीय डॉ अंकिता सिंह तृतीय छितिज प्रसाद को मिला।

डॉ सावलानी ने कहा ये प्रतियोगिताएं पी जी और यू जी स्टूडेंट्स के लिए थीं। वेलिडिक्टरी सत्र में प्रोफेसर वीरेंद्र आतम ने कहा कि यह सेमिनार कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। मेडिकल स्टूडेंट्स को काफी कुछ सीखने को मिला। पार्टिसिपेंट्स की संख्या, शोध पत्रों की संख्या इस सेमिनार को सफल बनाती है। डॉ डी हिमांशु ने सेमिनार में आये हुए प्रतिभागियों , गेस्ट स्पीकरों का,  स्टूडेंट्स का , कार्यकर्ताओं का और मीडिया बंधुओ का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डॉ कौसर उस्मान, डॉ प्रज्ञा पांडे, डॉ शीतल वर्मा आदि उपस्थित थे।