सीट बेल्‍ट और हेलमेट का प्रयोग बचा सकता है 70 फीसदी सड़क दुर्घटनायें

-5 से 40 वर्ष आयु के लोगों की मौत की सबसे बड़ी वजह है रोड एक्‍सीडेंट

-स्‍वास्‍थ्‍य विभाग और ट्रैफि‍क पुलिस आपसी सहयोग से लोगों को करें जागरूक

-वर्ल्‍ड ट्रॉमा डे पर केजीएमयू ने आयोजित किया वॉकाथॉन, ट्रॉमा प्रशिक्षण शिविर

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। आपको यह जानकर आश्‍चर्य होगा कि 5 वर्ष से 40 वर्ष की आयु के लोगों की मौत का सबसे बड़ा कारण सड़क दुर्घटना है। चौपहिया वाहन में सीटबेल्‍ट और दो पहिया वाहन में हेलमेट का प्रयोग करके सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में 70 फीसदी की कमी लायी जा सकती है। स्‍वास्‍थ्‍य विभाग और ट्रैफि‍क पुलिस आपसी सहयोग से लोगों को सुरक्षित यात्रा के लिए अपनाये जाने वाली सावधानियों के बारे में जागरूक किया जा सकता है।

ये वे बातें हैं जिनकी चर्चा आज 17 अक्‍टूबर को विश्‍व आघात दिवस (वर्ल्‍ड ट्रामा डे) के मौके पर किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सर्जरी विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में की गयी। सर्जरी विभाग द्वारा विश्व आघात दिवस मनाने की शुरुआत सुबह 1090 चौराहे पर वॉकाथॉन के आयोजन से की गयी। यह वॉकाथॉन 1090 चौराहे से शुरू होकर डॉ राम मनोहर लोहिया पार्क होते हुए वापस 1090 चौराहे पर आकर समाप्त हुई। इस वॉकाथॉन को चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ बिपिन पुरी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस वॉकाथॉन में चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों एवं आमजन ने प्रतिभाग किया।

इसके बाद शताब्दी अस्पताल में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में कुलपति ने अपने सम्‍बोधन में कहा कि प्रत्येक वर्ष विश्व में लगभग 10 लाख लोगों की मौत सड़क हादसों की वजह से होती है और करीब 5 से 6 लाख लोग विकलांगता के शिकार होते हैं। उन्होंने बताया कि हार्ट अटैक और कैंसर के बाद विश्व में होने वाली मौत की तीसरी सबसे बड़ी वजह ट्रॉमा है। उन्होंने कहा कि कानून का पालन करने के साथ ही स्वास्थ्य विभाग और ट्रैफिक पुलिस को आपसी सहयोग से आमजन को जागरूक किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हेलमेट एवं सीटबेल्ट का प्रयोग न करना और नशे में वाहन चलाने की मानसिकता से युवाओं का बाहर निकालना पड़ेगा।

ट्रॉमा सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ संदीप तिवारी ने बताया कि देश में प्रतिवर्ष करीब डेढ़ लाख लोगों की सड़क हादसों में मौत हो जाती है, 5 से 40 वर्ष की उम्र में मौत का सबसे बड़ा कारण रोड ऐक्सीडेंट है, जबकि यातायात नियमों का पालन कर ज्यादातर मामलों को टाला जा सकता है और सीट बेल्ट एवं हेलमेट के प्रयोग से करीब 70 फीसदी सड़क हादसों में कमी लाई जा सकती है।

उन्होंने बताया कि प्री-हॉस्पिटल केयर के माध्यम से दुर्घटना के बाद और अस्पताल पहुंचने तक किस प्रकार घायल व्यक्ति को गोल्डन आवर में चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराकर उसकी जान बचाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में थोड़ी से जागरूकता एवं संवेदनशीलता अपना कर होने वाली मौतों में कमी लाई जा सकती है। 

कार्यक्रम का समापन ट्रॉमा सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ समीर मिश्रा द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ किया। इस अवसर पर ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर अजय सिंह, डॉ राजीव मिश्रा सहित तमाम चिकित्सक, विद्यार्थी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।