टीबी के उपचार की अवधि आधी व चुभन गाय‍ब हुई नयी दवाओं से

-लखनऊ रेल मेट्रो कॉरपोरेशन में आयोजित व्‍याख्‍यान में बोले डॉ सूर्यकांत

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। टी.बी. के इलाज में पिछले कुछ वर्षों से बहुत प्रगति हुयी है, पहले बड़ी टी.बी. या एम.डी.आर. टी.बी. के इलाज में दो साल तक का समय लग जाता था, परन्तु अब नई दवाओं जैसे-बिडाकुलीन और डेलामिनिड के आने से एक साल से कम समय में मरीज का इलाज हो जाता है। इसके साथ ही पिछले कुछ वर्षों में एम.डी.आर. टी.बी. के रोगियों को सुई लगने वाले इलाज से मुक्ति मिली है, अब इनका इलाज खाने की गोलियों से हो जाता है।

यह जानकारी विश्व टी.बी. दिवस की पूर्व संध्या पर केजीएमयू के रेस्परेटरी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष, एवं उ0प्र0 स्टेट टास्क फोर्स (क्षय उन्मूलन) के चेयरमैन डॉ सूर्यकांत, ने लखनऊ रेलवे मेट्रो कॉरपोरेशन के कार्यक्रम में टी.बी. रोग पर व्याख्यान में दी।  

डा0 सूर्यकान्त ने बताया कि क्षय रोग से ग्रसित व्यक्ति खांसता, छींकता या बोलता है तो उसके साथ संक्रामक न्यूक्लीआई उत्पन्न होता है, जो हवा के माध्यम से फैल सकता है। विश्व में टी.बी. का हर चौथा मरीज भारतीय है। विश्व में प्रतिवर्ष 14 लाख मौतें टी.बी. से होती हैं, उनमें से एक चौथाई से अधिक मौतें अकेले भारत में होती हैं। भारत विश्व का टी.बी. रोग से सर्वाधिक प्रभावित देश है। हमारे देश में लगभग 1000 लोगों की मृत्यु प्रतिदिन टी.बी रोग के कारण होती है।

पैम्‍फलेट जो मेट्रो में यात्रियों को बांटा जायेगा

उन्होंने बताया कि लगातार 2 हफ्ते तक खांसी आना, खांसी के साथ साथ खून का आना, छाती में दर्द होना, वजन कम होना, शाम को बुखार का आना, रात में पसीना होना जैसे लक्षण होने पर मरीज को तुरन्त टी.बी. की जांच करानी चाहिए। टी.बी. रोग की जांच एवं उपचार सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त उपलब्ध है। उन्‍होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री ने 2025 तक टी.बी. मुक्त भारत बनाने का सपना देखा है। रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग 2025 तक टी.बी. को खत्म करने के प्रति दृढ़ प्रतिज्ञ है। रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग समय-समय पर टी.बी. रोग से लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाता रहता है।

इसी क्रम में उ0प्र0 स्टेट टास्क फोर्स (क्षय उन्मूलन) के चेयरमैन डा0 सूर्यकान्त ने बताया कि रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग द्वारा टी.बी. जागरूकता पर बनाया गया पैम्‍फलेट 24 मार्च 2021 (विश्व टी.बी. दिवस) से मेट्रो में यात्रा करने वाले यात्रियों को वितरित किया जाना प्रारम्भ हो गया है, जिससे हजारों लोगो में टी.बी. के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। इसके साथ ही उन्होनें बताया कि मैट्रो में टी.बी.जागरूकता पर ई-विज्ञापनों का भी प्रसारण किया जाएगा, जिससे यात्रियों और आम जनमानस में टी.बी. के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और हम 2025 तक प्रधानमंत्री द्वारा दिये गये टी.बी.मुक्त भारत के सपने को पूरा कर सकेंगे।

आज रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग में भी विश्व टी.बी. दिवस के उपलक्ष्य में मरीजों को टी.बी. के बारे में जागरूक किया गया और उन्हें फल और पैम्पलेट वितरित किए गए। इस अवसर पर विभाग के समस्त फैकल्टी मेंबर्स डा0 आर.ए.एस. कुशवाहा, डा0 एस.के. वर्मा, डा0 राजीव गर्ग, डा0 संतोष कुमार, डा0 अजय कुमार वर्मा, डा0 आनन्द श्रीवास्तव, डा0 दर्शन बजाज, डा0 अंकित कटियार, डा0 ज्योति, रेजिडें