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बस बहुत हो गया मरीजों पर अभ्‍यास, अब दक्षता हासिल करके ही कर सकेंगे मरीजों का उपचार

इंजेक्‍शन लगाने से लेकर ऑपरेशन तक की दक्षता विशेष तरीके से सिखायी जायेगी केजीएमयू के स्किल इंस्‍टीट्यूट में

डॉ विनोद जैन

लखनऊ। मरीजों को गुणवत्ता पूर्ण इलाज मिले इसके लिए आवश्यक है कि उपचार करने में शामिल होने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने कार्य में दक्ष हो। चाहे वह चिकित्सक हो अथवा नर्स या कोई भी पैरामेडिकल स्टाफ, अगर वह दक्ष होगा तभी सटीक इलाज कर सकेगा। अंग्रेजी में एक कहावत है कि practice makes a man perfect , चूंकि उपचार से जुड़े लोगों की प्रैक्टिस मरीजों से जुड़ी है, ऐसे में दक्षता प्राप्त करने के दौरान सारे ऐक्सपैरिमेंट मरीजों पर ही होते हैं नतीजा यह होता है कि दक्षता के लेवल तक पहुंचने की सीढ़ी कुछ मरीज ही बनते हैं। जाहिर है ऐसे में कुछ मरीजों को नुकसान भी हो जाता है, मरीजों को यह नुकसान न हो इसके लिए किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में एक अच्छी पहल शुरू हो रही है। यहां एक ऐसा स्किल सेंटर खोला जा रहा है जिसमें इंजेक्शन लगाने से लेकर बड़ी सर्जरी करने तक की शिक्षा दक्षता हासिल करने के लिए दी जायेगी। इसके लिए जीवित व्यक्ति की तरह के पुतलों का इस्‍तेमाल किया जायेगा। केजीएमयू इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल्स नाम के इस सेंटर की स्था्पना का मुख्य  उद्देश्य जिेस वाक्य  में छिपा है वह है ‘दक्षता जीवन बचाती है’। यह संस्थान केजीएमयू के साइंटिफि‍क कन्वे न्शन सेंटर में बनाया गया है।

इस स्किल सेंटर के बारे में ‘सेहत टाइम्स’ ने केजीएमयू इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल्स  के निदेशक डॉ विनोद जैन से विशेष वार्ता की। डॉ जैन ने बताया कि इस इंस्टी्ट्यूट में प्रशिक्षण के दौरान इंजेक्शन लगाने से लेकर ऑपरेशन करने तक के बारे में समग्र तरीके से जानकारी दी जायेगी। उन्होंने बताया कि इंस्टीट्यूट की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और उम्मीद है कि अगले माह यानी फरवरी के अंत तक इंस्टीट्यूट का उद्घाटन हो जायेगा। उन्होंने बताया कि अक्सर यह सुनने को मिलता है कि जब डिग्री या डिप्लोमा लेकर स्टूडेंट निकलता है और जॉब‍ करता है तो अपने कार्य को ठीक से कर नहीं पाता है। इसकी वजह से मरीजों को कभी-कभी काफी दिक्क्त हो जाती है। इस इंस्टीट्यूट में दिये जाने वाले प्रशिक्षण से इस तरह की दिक्कतें नहीं आयेंगी। यह प्रशिक्षण अलग-अलग कोर्स के माध्यम से होगा।

इस तरह से होगा प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के बारे में डॉ जैन ने बताया कि यहां पर प्रशिक्षार्थियों को पुतलों के माध्यम से उनके कार्य में दक्षता लाना सिखाया जायेगा। उदाहरण के लिए इंजेक्शन लगाना है तो उसे भी पु‍तले पर सिखाया जायेगा। इसी तरह अगर मरीज के भोजन की नली डालना है तो वह भी पुतले के ही डालकर बताया जायेगा कि किस तरह नली डाली जाती है। उन्होंने बताया कि  इन विशेष प्रकार के पुतलों में उसी तरह आंतरिक अंग लगे रहते हैं जैसे कि किसी जीवित व्यक्ति में होते हैं। उन्होंने बताया कि जैसे कि इंजेक्शन लगाना है तो पुतलों के हाथ में नस भी होगी या भोजन नली डालनी है तो नाक के अंदर से पेट तक जाने का रास्ताै वैसा ही होगा जैसा मनुष्य में होता है। उन्होंने बताया कि इन पुतलों पर सिखाने से यह होगा कि सीखते समय गलती होने पर मरीज की जान का नुकसान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि‍ इसी प्रकार सभी प्रकार की सर्जरी भी इन्हीं पुतलों के माध्यम से सिखायी जायेगी।

किन लोगों को सिखाया जायेगा

डॉ जैन ने बताया कि केजीएमयू में पढ़ने वाले मेडिकल के छात्र-छात्राएं, पैरामेडिकल के छात्र-छात्राएं, नर्सिंग कोर्स करने वालों को तो यह प्रशिक्षण दिया ही जायेगा। दूसरे मेडिकल कॉलेजों के सभी छात्र के लिए भी प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध  रहेगी। उन्होंने बताया यही नहीं प्रॉविन्श्यिल मेडिकल सर्विसेज (पीएमएस) के डॉक्टर भी इस प्रशिक्षण को ले सकते हैं,  इसके लिए काफी पहले चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक के यहां पत्र भी भेजा जा चुका है। उन्होंने बताया कि संस्थान में यह भी सिखाया जायेगा कि मरीज से कैसे बात की जाये, किस तरह का व्यवहार किया जाये। उन्होंने बताया कि संस्थान में सिखाने वाले लोगों को भी समय-समय पर अपग्रेड होने के लिए दूसरे स्थानों पर प्रशिक्षण के लिए भेजा जायेगा। उन्होंने बताया कि हम लोगों का प्रयास यह है कि लखनऊ ही नहीं पूरे प्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों में रहकर चिकित्सीय कार्य करने वाले लोग इस प्रशिक्षण का लाभ उठा सकें ताकि उच्च् गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा गांव से लेकर शहरों तक में मरीजों को मिल सके।

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