जले हुए मरीजों के इलाज के लिए परिजनों की त्वचा लगाना ज्यादा अच्छा

विदेशों की तर्ज पर भारत में भी स्किन बैंक की स्‍थापना पर जोर

दुनिया भर के जले हुए मरीजों में 25 प्रतिशत अकेले भारत में

लखनऊ। गंभीर जले हुए मरीजों के इलाज में अब त्‍वचा का प्रयोग किया जा रहा है, विदेश में इसके लिए त्‍वचा बैंक खुले हुए हैं, इसी तर्ज पर भारत में आवश्‍यक है कि स्किन बैंक खोले जायें।

यह बात आज यहां किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्लास्टिक सर्जरी विभाग द्वारा आयोजित 9वें प्रोफेसर एसके भटनागर ओरेशन में मुख्य अतिथि गुजरात भंसल हॉस्पिटल अहमदाबाद के डॉ पी के भिलवानी ने अपने सम्‍बोधन में कही। डॉ भिलवानी ने त्वचा प्रत्यारोपण पर चर्चा करते हुए बताया कि हमारे देश में बहुत से जले हुए मरीजों को स्किन की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि विश्व के लगभग एक चौथाई ऐसे मरीज भारत में हैं, जिन्हें अपने इलाज के लिए त्वचा की आवश्यकता है।

डॉ भिलवानी ने कहा कि विदेशों से अगर तुलना की जाए तो हमारे देश में ऐसे मरीजों के इलाज के लिए जो डॉक्टर्स या संसाधन मौजूद हैं वे नाकाफी हैं। इसका उपाय बताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे में विदेशों में स्थित स्किन बैंक की तर्ज पर ही अपने देश में भी स्किन बैंक की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत में ज्यादातर लोग अभी भी ज्वाइंट फैमिली में रहते है। ऐसे में मरीज को अपने ही घर या परिवार के किसी सदस्य से स्किन लेकर अपना उपचार करवाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि जले हुए मरीजों के मामले में रिश्तेदारों से त्वचा लेकर प्रत्यारोपण किया गया है। उन्होंने बताया कि ज्यादातर मामलों में मरीज की मां ने सामने आकर अपनी त्वचा दान की है। साथ ही उन्होंने बताया ऐसे तमाम मरीजों का उन्होंने उपचार किया है, जिन्होंने अपने किसी रिश्तेदार या परिवार के व्यक्ति से स्किन लेकर उपचार करवाया है और वह स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।

इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित केजीएमयू के कुलपति प्रोफेसर एमएलबी भट्ट ने बताया कि डॉक्टरों एवं संसाधनों की कमी के बावजूद केजीएमयू का प्लास्टिक सर्जरी विभाग अपनी चिकित्सीय सेवा के द्वारा मरीजों को बेहतरीन चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध करा रहा है, जो यह बताने के लिए काफी है कि यह विभाग केजीएमयू के लिए एक मजबूत स्तम्भ की तरह से कार्य कर रहा है।

इस अवसर पर ओरेशन के मुख्य आयोजनकर्ता प्लास्टिक सर्जरी विभाग के हेड डॉ एके सिंह ने कार्यक्रम कय संचालन किया। इसके साथ ही एसोसिएशन ऑफ प्लास्टिक सर्जन ऑफ इंडिया के प्रेसीडेंट डॉ सुरजीत भट्टाचार्य ने प्रोफेसर एस के भटनागर के बारे मे एक संक्षिप्त परिचय देते हुए उनके द्वारा किए गए कार्यों के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर सहारा हास्पिटल के न्यॅूरोसर्जरी विभाग के डॉ मजहर हुसैन, प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रो रमेश चन्द्रा, डॉ अंकुर भटनागर एवं डॉ बृजेश मिश्रा मुख्य रूप से उपस्थित रहे।