-सांप का भ्रम होने के लक्षण के आधार पर दवा दी तो सफेद दाग भी दूर और भ्रम भी
-डॉ गिरीश गुप्ता ने कहा, मरीज की हिस्ट्री लेते समय एक-एक लक्षण को ध्यान में रखना जरूरी

सेहत टाइम्स
लखनऊ। होम्योपैथिक दवाओं से उपचार में मरीज के माइंड से संबंधित लक्षणों का रोल बहुत अहम है, एक युवक के शरीर में स्थान विशेष पर व्हाइट स्पॉट के उपचार के लिए चुनी गयी दवा से सिर्फ इसलिए लाभ नहीं मिल रहा था क्योंकि मरीज ने अपनी हिस्ट्री बताते समय delusion of snake यानी सांप का भ्रम होने के लक्षण के बारे में नहीं बताया था, जब सांप का भ्रम होने के लक्षण को ध्यान में रख कर दूसरी दवा दी गयी तो तुरंत लाभ होना शुरू हो गया। पिछले आठ महीने से सांप होने का भ्रम नहीं हो रहा है, साथ ही सफेद दाग भी हल्के हो रहे हैं।
इस बारे में इस मरीज का इलाज करने वाले गौरांग क्लीनिक एंड सेंटर फॉर होम्योपैथिक रिसर्च (जीसीसीएचआर) के फाउंडर व चीफ कन्सल्टेंट डॉ गिरीश गुप्ता बताते हैं कि उनके पास 21 वर्षीय युवक अपने शरीर में स्थान विशेष पर व्हाइट स्पॉट की शिकायत लेकर आया था। लम्बी अवधि तक दवाएं चलने के बाद भी जब युवक के व्हाइट स्पॉट में कमी नहीं आयी तो एक बार फिर से उससे उसकी पसंद-नापसंद, दूसरी दिक्कतों के बारे में जानकारी ली गयी तो एक नयी जानकारी यह निकल कर सामने आयी कि युवक को सांप होने का भ्रम होता था, इसके अतिरिक्त कभी-कभी उसे सपने में भी सांप दिखायी देना, लड़ाई लड़ना जैसे लक्षणों के बारे में पता चला।
डॉ गुप्ता ने बताया कि पूर्व में मरीज जब पहली बार आया तो जब हिस्ट्री ली गयी थी तो उस समय उसे चिंता, घबराहट, एक्सीडेंट का डर, शंकालु प्रवृत्ति, गुस्सा जल्दी आना, चिड़चिड़ापन, हर काम बड़े ही सिस्टम से किया जाना पसंद होना, यदि कोई न करे तो गुस्सा हो जाना के साथ ही मसालेदार खाना पसंद होना जैसे लक्षणों और आदतों को पाया गया। इन लक्षणों के आधार पर युवक को दी जा रही दवा में बाकी लक्षणों के उपचार का समावेश तो था लेकिन सांप के भ्रम के लक्षण को लेकर दवा का चुनाव नहीं किया गया था। क्योंकि मरीज की हिस्ट्री लेते समय इस बात का जिक्र नहीं आया था। एक बार पुन: रिव्यू में सांप का भ्रम होने के लक्षण का पता चलने के बाद नये सिरे से उसकी रिपर्टरी करने के बाद दवा बदली गयी, उसके बाद अगली बार आने पर उसने बताया कि उसे आराम आना शुरू हो गया है। मरीज के अनुसार पिछले आठ महीने से उसे सांप होने का भ्रम होना दूर हो गया है और सफेद दाग भी काफी हल्के पड़ गये हैं।
डॉ गुप्ता ने बताया कि पिछले आठ माह से उसका सांप का भ्रम होना समाप्त हो गया है, तथा सफेद स्पॉट भी धीरे-धीरे काफी कम हो चुके हैं, मरीज की दवा अभी चल रही है। डॉ गुप्ता ने कहा कि मेरी दूसरे होम्योपैथिक डॉक्टरों के लिए भी यह सलाह है कि दवा का चुनाव करने से पूर्व रोगी की मन:स्थिति के बारे में अवश्य जानकारी लें।
