सरकारी संस्‍थानों के चिकित्‍सक हों या प्राइवेट, समस्‍यायें दोनों की दूर होनी चाहिये

-आईएमए के एजेंडा को अंजाम तक पहुंचाना ही मेरा लक्ष्‍य होगा
-आईएमए के अध्‍यक्ष पद के प्रत्‍याशी डॉ मनीष टंडन से विशेष बातचीत
डॉ मनीष टंडन

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। सरकारी संस्‍थानों के चिकित्‍सक हों या प्राइवेट, डॉक्‍टरों की समस्‍यायें दोनों क्षेत्रों में हैं, क्‍लीनिकल स्‍टेब्लिशमेंट एक्‍ट हो या रजिस्‍ट्रेशन सम्‍बन्‍धी दिक्‍कतें जो लड़ाई आईएमए अभी तक लड़ता आ रहा है, उसे जारी रखते हुए लक्ष्‍य तक पहुंचने के लिए रणनीति बनाने से लेकर इसे क्रियान्‍वयन करते हुए चिकित्‍सकों को इन समस्‍याओं से मुक्ति का मार्ग प्रशस्‍त करना मेरी प्राथमिकता होगी।

यह बात आईएमए लखनऊ के चुनाव में अध्‍यक्ष पद के उम्‍मीदवार डॉ मनीष टंडन ने ‘सेहत टाइम्‍स’ से एक खास मुलाकात में कहीं। यह पूछने पर कि जिस प्रकार का माहौल चल रहा है उसमें डॉक्‍टरों के अंदर बहुत सी आशंकाओं ने जन्‍म लेना शुरू कर दिया है, मरीज और चिकित्‍सकों का आपसी रिश्‍तों में दरार आ रही है, इस विषय में आपका क्‍या कहना है, इस प्रश्‍न के उत्‍तर में डॉ टंडन ने कहा कि देखिये चिकित्‍सक और मरीज का रिश्‍ता कभी तल्‍ख नहीं हो सकता, और अगर कही तल्‍खी नजर आती है तो इसका कारण सिर्फ और सिर्फ आपसी संवाद का अभाव है, संवाद से बड़े-बड़े मसले हल हो जाते हैं।

डॉ मनीष कहते हैं कि स्‍वस्‍थ समाज में दोनों का अपना महत्‍व है। मरीज के बिना चिकित्‍सक अधूरा है, और बीमार होने पर मरीज भी चिकित्‍सक से ही सम्‍पर्क करता है, ऐसे में हम सभी पूरे समाज को यह सोचना है कि हम लोग एक-दूसरे के पूरक हैं।

उन्‍होंने कहा कि जहां तक क्‍लीनिकल इस्‍टेब्लिशमेंट एक्‍ट, रजिस्‍ट्रेशन जैसे मुद्दे जो सरकार के स्‍तर पर तय होने हैं, उसे आईएमए पहले भी उठाता रहा है, मैं प्रयास करूंगा इसे और अधिक मेहनत कर रणनीति बनाकर आईएमए के बैनर तले हम लोग अपनी बात को सरकार के समक्ष रखेंगे, और सरकार को यह अहसास कराकर रहेंगे कि हमारी बात में कितना दम है।

डॉ मनीष टंडन ने कहा कि लखनऊ आईएमए का अपना ब्‍लड बैंक को सपना जो संस्‍था ने देखा है उसके निर्माण की शुरुआत हो चुकी है, इसमें मैं शुरू से पूरे तन-मन-धन से लगा हूं, और मैं चाहूंगा कि इसे शीघ्रातिशीघ्र अंजाम तक पहुंचाकर आमजन और चिकित्‍सकों की सुविधा के लिए इसे शुरू करा सकूं।

एक सवाल के जवाब में उन्‍होंने कहा कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़ने की बात है तो मैं पिछले करीब 16-17 वर्षों से तब से जुड़ा हुआ हूं जब मैं जयपुर में था। लखनऊ में मैं आईएमए से जुड़कर वर्ष 2008 से प्रैक्टिस कर रहा हूं। उन्‍होंने बताया कि आईएमए का आजीवन सदस्‍य होने के साथ ही मैं एपीआई-आईएसजी का भी आजीवन सदस्‍य हूं। डॉ मनीष ने बताया कि वह आईएमए में एक बार ज्‍वाइंट सेक्रेटरी तथा दो बार कार्यकारिणी के सदस्‍य रह चुके हैं। इसके अतिरिक्‍त आईएमए की तरफ से आयोजित सभी विरोध प्रदर्शनों, आईएमए ओपीडी तथा आउटरीच कार्यक्रमों (जैसे श्रावस्‍ती में आयोजित हुए शिविर) में अपने सेवायें देता रहा हूं।

आपको बता दें कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की लखनऊ शाखा के वार्षिक चुनाव के लिए रविवार 19 जनवरी को मतदान होना है। इसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। अध्‍यक्ष पद से लेकर कार्यकारिणी सदस्‍य के पद तक के प्रत्‍याशी अपने-अपने पक्ष में मतदान की अपील आईएमए सदस्‍यों से कर रहे हैं।