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प्राणमय, मनमय, विज्ञानमय व आनंदमय कोष से बताया आत्‍मसुख का रास्‍ता

केजीएमयू में मनाया गया शिक्षक दिवस, आईआईएम की निदेशक ने प्रस्‍तुत किये अत्‍यंत सारभूत तथ्‍य

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेनेजमेंट, लखनऊ की निदेशक डॉ अर्चना शुक्ला ने आत्मसुख के लिए वेदों में उल्लिखित कोषों का उल्लेख करते हुए प्राणमय, मनमय, विज्ञानमय एवं आनंदमय कोष का विस्तृत वर्णन करते हुए आत्मसुख की प्राप्ति हेतु अत्यंत ही सारभूत तथ्यों को प्रकट किया।

डॉ अर्चना ने अपने ये विचार किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में शिक्षक दिवस के अवसर पर अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्‍य अतिथि शामिल हुई थीं। समारोह में केजीएमयू के कुलपति प्रो एमएलबी भट्ट, उपकुलपति प्रो मधुमति गोयल, अधिष्ठाता, छात्र कल्याण प्रो0 जीपी सिंह तथा अधिष्ठाता, दंत संकाय प्रो0 शादाब मोहम्मद विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

डॉ अर्चना शुक्ला द्वारा अपने सम्बोधन में केजीएमयू को देश का महत्वपूर्ण चिकित्सा शिक्षा का संस्थान बताकर इसकी सराहना करते हुए कहा कि इस संस्थान द्वारा उत्कृष्ट चिकित्सा शिक्षा प्रदान की जाती है। उन्‍होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में एक शिक्षक को सदैव एक उत्प्रेरक की भूमिका निभानी होती है, जिससे कि वह विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा के साथ-साथ समाज में एक अच्छा नागरिक बनने के लिए जागरूक कर सके।

प्रो एमएलबी भट्ट ने शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि स्वयं एवं समाज की उन्नति के दो मूलभूत आधार हैं शिक्षा एवं स्वास्थ्य और सौभाग्य से हम सभी को इस संस्था में यह दोनों कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ है। हम शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य की दिशा में भी कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने देश के निर्माण में शिक्षा एवं स्वास्थ्य के स्तर के महत्व को समझाते हुए शिक्षा एवं स्वास्थ्य के स्तर में कमी को देश के निर्माण के लिए द्योतक तथा इसके विपरीत शिक्षा के स्तर में बढ़ोतरी को देश के निर्माण के लिए सहायक बताया गया। इस अवसर पर कुलपति द्वारा विश्वविद्यालय के शिक्षकों की, उनके उत्कृष्ट शैक्षिक एवं चिकित्सकीय कार्यो की प्रशंसा करते हुए इन्हें इनको सौपें गये चिकित्सक जैसे अति महत्वपूर्ण दायित्वों को कुशलतापूर्वक निर्वाह किये जाने के लिए भी अनुरोध किया गया।

इस अवसर पर चिकित्सा विश्वविद्यालय की उपकुलपति प्रो0 मधुमति गोयल ने डा0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन का उल्लेख करते हुए बताया कि डा0 राधाकृष्णन द्वारा कहा गया था कि शिक्षण एक पेशा न होकर एक उदे्दश्य है और तथा उनके द्वारा सदैव ऐसे ही कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया तथा इस प्रोफेशन में अनुभव सदैव काम आता है और हमेशा एक अच्छे शिक्षक के रूप में उभर कर सामने आयें।

समारोह में चिकित्सा विश्वविद्यालय में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए नेत्र विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो0 विनीता सिंह, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो0 उदय मोहन एवं नेत्र विभाग की प्रो पूनम किशोर को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में डीन, रिसर्च सेल प्रो आरके गर्ग एवं चिकित्सा विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त शिक्षक, वर्तमान चिकित्सा शिक्षक, छात्र-छात्रायें एवं कर्मचारी उपस्थिति रहे।