मोबाइल-इंटरनेट से चिपके रहने की आदत से हैं परेशान, तो आइये यहां मौजूद है समाधान

केजीएमयू में ‘क्‍लीनिक फॉर प्रॉब्लमेटिक यूज ऑफ टेक्नोलॉजी’ का उद्घाटन, हर गुरुवार को चलेगी क्‍लीनिक में ओपीडी

लखनऊ। क्‍या आप अपने बच्‍चे के ज्यादातर समय मोबाइल और इंटरनेट चलाने की आदत से परेशान हैं और आपको लगता है कि कहीं मेरा बच्‍चा इसका लती तो नहीं हो गया है तो आप बिना‍ किसी हिचकिचाहट के किंग जॉर्ज चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय के मनोचिकित्‍सा विभाग से सम्‍पर्क कर सकते हैं, यहां आगामी 4 अप्रैल से प्रत्‍येक गुरुवार को सुबह 8 बजे से दोपहर साढ़े बारह बजे तक क्‍लीनिक फॉर प्रॉब्लमेटिक यूज ऑफ टेक्नोलॉजी यानी टेक्‍नोलॉजी के इस्‍तेमाल से परेशानी होने की स्थिति में पहुंच चुके लोगों को इससे छुटकारा पाने के उपाय बताने का क्‍लीनिक प्रारम्‍भ होने जा रहा है। इसी क्‍लीनिक का शुक्रवार को केजीएमयू के कुलपति प्रो एमएलबी भट्ट ने उद्घाटन किया।

 

आपको बता दें कि शुक्रवार को ही  केजीएमयू के मनोचिकित्‍सा विभाग द्वारा अपने 48वें स्थापना दिवस कार्यक्रम का आयोजन कलाम सेंटर में किया गया। इस अवसर पर मनोचिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ पीके दलाल द्वारा विभाग की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए गत वर्षों में विभाग द्वारा प्राप्त की गईं उपलब्धियों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला गया।

उक्त कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एमएलबी भट्ट ने मनोचिकित्सा विभाग द्वारा मोबाइल और इंटरनेट के अत्याधिक इस्तेमाल से होने वाली मानसिक बीमारियों के उपचार के लिए क्‍लीनिक फॉर प्रॉब्लमेटिक यूज ऑफ टेक्नोलॉजी का उद्घाटन किया। इस यूनिट में 4 अप्रैल से हर गुरुवार ओपीडी चलेगी। जिसमें आने वाले किशोरों, बच्चों एवं उनके परिजनों की काउंसलिंग एंव साइकोथेरेपी के माध्यम से इंटरनेट और टेक्नोलॉजी की लत छुड़ाने और इसके प्रबंधन की सुविधा प्रदान किए जाने के साथ ही टेक्नोलॉजी के स्वस्थ उपयोग के बारे में जानकारी दी जाएगी।

 

इस अवसर पर कुलपति प्रो एमएलबी भट्ट ने मानसिक रोग विभाग द्वारा स्थापित क्‍लीनिक फॉर प्रॉब्‍लमेटिक यूज ऑफ टेक्नोलॉजी को विभाग का अनूठा प्रयोग बताते हुए इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। इस अवसर पर कुलपति ने विभाग द्वारा प्रकाशित स्मारिका का विमोचन किया। उन्होंने बताया कि मेडिकल काउसिल ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे भारत में 479 मेडिकल कॉलेज में से 49 मेडिकल कॉलेज ने पिछले दस वर्षो से एक भी शोधपत्र नहीं प्रकाशित किए थे, जिसके बाद एमसीआई ने शोधपत्र को प्रकाशित करना अनिवार्य कर दिया गया जबकि पूर्व में ऐेसा नहीं होता था।

 

कुलपति ने कहा कि केजीएमयू में मानसिक रोग विभाग को जो महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है, उसमें विभाग के 11 संकाय सदस्यों के द्वारा 61 शोधपत्रों का प्रकाशन भी एक सराहनीय उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि चिकित्सा विश्वविद्यालय की 450 की लगभग फैकेल्टी ने पिछले वर्ष 600 शोधपत्र प्रकाशित किए। अन्तरराष्ट्रीय स्तर के मापदंडों पर इसको एक सराहनीय उपलब्धि के रूप में देखा जा सकता है। इसकों और बढ़ावा देने के लिए तमाम राष्ट्रीय एवं अन्र्तराष्ट्रीय स्तर के विश्वविद्यालयों से एमओयू सम्पादित किए जा रहे हैं, जिससे सभी विभागों में एकाडमिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है।