मधु-कैटभ वध के प्रसंग का वर्णन है देवीमाहात्‍म्‍य के पहले पाठ में

-नवरात्रि के पहले दिन दुर्गासप्‍तशती का पहला पाठ

लखनऊ। श्री दुर्गासप्‍तशती में देवीमाहात्‍म्‍य के 13 पाठों का वर्णन किया गया है। शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिवस प्रथम पाठ जिसमें मेधा ऋषि का राजा सुरथ और समाधि को भगवती की महिमा बताते हुए मधु-कैटभ वध के प्रसंग का वर्णन किया गया है।

ऊषा त्रिपाठी https://www.pranichealingmiracles.com

योगिक मानसिक चिकित्‍सा सेवा समिति की संचालिका, समाज सेविका व प्राणिक हीलर ऊषा त्रिपाठी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि दुर्गा सप्‍तशती में दी गयी पाठ विधि के अनुसार प्रथम दिन प्रथम पाठ करना चाहिये। ऊषा त्रिपाठी ने कहा कि 13 पाठों वाली श्री दुर्गा सप्तशती नारायणावतार श्री व्यासजी द्वारा रचित महापुराणों में मार्कण्डेयपुराण से ली गई है। इस ग्रंथ में सात सौ पद्यों का समावेश होने के कारण इसे सप्तशती कहा गया है। दुर्गा सप्तशती में 360 शक्तियों का वर्णन है। इसके 700 श्‍लोकों को तीन भागों में विभाजित किया गया है जिसमें महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की महिमा का वर्णन किया गया है।। यह पाठ इस प्रकार है। (पाठ की विधि जानने के लिए क्लिक करें)